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सत्य निकेतन हादसा: 'पीजी-हॉस्टल छात्रों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन', दिल्ली हाईकोर्ट में छात्र ने दायर की याचिका

Sat, 26 Sep 2026 07:07 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 26 Sep 2026 07:07 PM IST
सार

दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें पीजी, किराए के फ्लैट और निजी हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन और नियमित सुरक्षा जांच की मांग की गई है।

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PIL filed in Delhi High Court regarding safety of students in Delhi after satya niketan incident
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली में पीजी, किराए के फ्लैट और निजी हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। याचिका में छात्रों की शिकायतों के लिए 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन और रहने की जगहों की नियमित सुरक्षा जांच की व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। 

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यह पीआईएल दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज के दूसरे वर्ष के छात्र शिवांश कालिया ने दायर की है। याचिका वकील आशु बिधूड़ी के माध्यम से दाखिल की गई है। इसमें कॉलेज, विश्वविद्यालय और बड़े छात्र एवं कोचिंग केंद्रों के स्तर पर ''''स्टूडेंट अकोमोडेशन एडवाइजरी एंड मॉनिटरिंग कमेटी'''' बनाने का सुझाव दिया गया है।
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याचिका में कहा गया है कि अभी छात्रों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां दिल्ली नगर नगम (एमसीडी), दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस, जिला प्रशासन और शिक्षण संस्थानों के बीच बंटी हुई हैं। छात्रों के लिए ऐसा कोई एक सिस्टम नहीं है, जहां वे अपनी रहने की जगह से जुड़ी सुरक्षा समस्या की शिकायत कर सकें और उन्हें एक साथ संबंधित विभागों से मदद मिल सके। 
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याचिकाकर्ता ने 24 घंटे की हेल्पलाइन, अलग ई-मेल और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल बनाने का सुझाव दिया है। इनके जरिए छात्र इमारत की खराब हालत, आग का खतरा, बिजली की समस्या, साफ-सफाई, ज्यादा भीड़, उत्पीड़न या रहने की जगह से जुड़ी अन्य समस्याओं की शिकायत कर सकेंगे।

पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा जांच का सुझाव
प्रस्तावित कमेटियां छात्रों के रहने की जगहों की समय-समय पर सुरक्षा जांच में मदद करेंगी। साथ ही एमसीडी, फायर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर इमारत, बिजली और अग्नि सुरक्षा की स्थिति की जांच कराने का काम करेंगी। याचिका में बिना मंजूरी चल रहे या असुरक्षित भवनों की पहचान कर संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए जानकारी देने का भी सुझाव दिया गया है।

छात्रों का सुरक्षित डेटाबेस बनाने की मांग
याचिका में निजी आवासों में रहने वाले छात्रों का स्वैच्छिक डेटाबेस बनाने का सुझाव भी दिया गया है। इसमें छात्रों की सहमति और डेटा की सुरक्षा का ध्यान रखने की बात कही गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इससे आपात स्थिति में छात्रों तक जल्दी पहुंचने और उन इलाकों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। याचिका में कॉलेज स्तर की कमेटी में कॉलेज प्रशासन, छात्र, पुलिस, जिला प्रशासन, एमसीडी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। वहीं, विश्वविद्यालय स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एमसीडी, दिल्ली सरकार, पुलिस और छात्र प्रतिनिधियों को शामिल करने की बात कही गई है। बड़े कोचिंग और छात्र केंद्रों के लिए भी इसी तरह की कमेटियां बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

सुरक्षित और सस्ते हॉस्टल बढ़ाने की मांग
पीआईएल में सरकारी और विश्वविद्यालयों के हॉस्टल की संख्या और क्षमता बढ़ाने की भी मांग की गई है, ताकि छात्रों को सुरक्षित और किफायती आवास मिल सके। याचिका के साथ दायर अंतरिम आवेदन में मामले का अंतिम फैसला आने तक छात्रों की शिकायतों के लिए तुरंत एक नोडल सिस्टम बनाने, संबंधित विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने और बड़े छात्र व कोचिंग केंद्रों में निजी आवासों की पहचान कर उनकी सुरक्षा जांच कराने की मांग की गई है।

याचिका में दिल्ली सरकार, एमसीडी, दिल्ली पुलिस, दिल्ली विश्वविद्यालय, जीजीएसआईपी विश्वविद्यालय, पीजीडीएवी कॉलेज, यूजूसी, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, जेएनयू और डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली समेत कई संस्थानों को प्रतिवादी बनाया गया है।

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