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Delhi NCR News: विश्व फिजियोथेरेपी दिवसः फिजियोथेरेपी से हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम किया जा सकता है कम
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आरएमएल अस्पताल में स्क्रीनिंग से सकारात्मक परिणाम मिले
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। फिजियोथेरेपी हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में सहायक है। यह केवल दर्द या मांसपेशियों की समस्याओं का इलाज नहीं, बल्कि शारीरिक निष्क्रियता और मोटापे जैसे जोखिमों को भी घटाती है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ऐसे मरीजों की स्क्रीनिंग से सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
आरएमएल अस्पताल की फिजियोथेरेपी विभाग प्रमुख पूजा सेठी ने बताया कि फिजियोथेरेपी स्ट्रोक और हृदय के संभावित जोखिम को कम कर सकती है। इस वर्ष विश्व फिजियोथेरेपी दिवस की थीम हृदय रोग और स्ट्रोक है। अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग ने एक स्क्रीनिंग केंद्र बनाया है। यहां मरीजों के उच्च रक्तचाप और मधुमेह से संभावित हृदय रोग व स्ट्रोक का आकलन किया जाता है।
बीते एक वर्ष में 500 से अधिक मरीजों की स्क्रीनिंग की गई। इन मरीजों को अलग-अलग फिजियोथेरेपी देकर स्वास्थ्य में सुधार देखा गया। इसमें हाई इंटेंसिटी फोकस्ड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक थेरेपी और इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन इंटरफेरॉन थेरेपी जैसी विधियां शामिल हैं। ये मांसपेशियां मजबूत करने और वजन कम करने में मदद करती हैं। अधिक वजन से स्ट्रोक और हृदय रोग की संभावना बढ़ती है। उच्च रक्तचाप, अस्वस्थ खान-पान, तंबाकू, शराब, तनाव और नींद की कमी भी हृदयवाहिनी रोग के जोखिम कारक हैं।
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फिजियोथेरेपी के दौरान व्यक्ति की शारीरिक क्षमता का आकलन किया जाता है। इसके बाद उसकी जरूरत के मुताबिक गतिविधि और व्यायाम की योजना बनती है। इसका उद्देश्य शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय बनाना और शारीरिक क्षमता बढ़ाना है।
विभिन्न आयु वर्गों के लिए सुझाव
वयस्कों को प्रति सप्ताह 150 से 300 मिनट एरोबिक गतिविधि करनी चाहिए। उन्हें सप्ताह में दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां भी करनी चाहिए। बच्चों और किशोरों को प्रतिदिन लगभग 60 मिनट शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। बुजुर्गों को सप्ताह में तीन दिन संतुलन और शक्ति बढ़ाने वाली गतिविधियां करनी चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। फिजियोथेरेपी हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में सहायक है। यह केवल दर्द या मांसपेशियों की समस्याओं का इलाज नहीं, बल्कि शारीरिक निष्क्रियता और मोटापे जैसे जोखिमों को भी घटाती है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ऐसे मरीजों की स्क्रीनिंग से सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
आरएमएल अस्पताल की फिजियोथेरेपी विभाग प्रमुख पूजा सेठी ने बताया कि फिजियोथेरेपी स्ट्रोक और हृदय के संभावित जोखिम को कम कर सकती है। इस वर्ष विश्व फिजियोथेरेपी दिवस की थीम हृदय रोग और स्ट्रोक है। अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग ने एक स्क्रीनिंग केंद्र बनाया है। यहां मरीजों के उच्च रक्तचाप और मधुमेह से संभावित हृदय रोग व स्ट्रोक का आकलन किया जाता है।
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बीते एक वर्ष में 500 से अधिक मरीजों की स्क्रीनिंग की गई। इन मरीजों को अलग-अलग फिजियोथेरेपी देकर स्वास्थ्य में सुधार देखा गया। इसमें हाई इंटेंसिटी फोकस्ड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक थेरेपी और इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन इंटरफेरॉन थेरेपी जैसी विधियां शामिल हैं। ये मांसपेशियां मजबूत करने और वजन कम करने में मदद करती हैं। अधिक वजन से स्ट्रोक और हृदय रोग की संभावना बढ़ती है। उच्च रक्तचाप, अस्वस्थ खान-पान, तंबाकू, शराब, तनाव और नींद की कमी भी हृदयवाहिनी रोग के जोखिम कारक हैं।
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फिजियोथेरेपी के दौरान व्यक्ति की शारीरिक क्षमता का आकलन किया जाता है। इसके बाद उसकी जरूरत के मुताबिक गतिविधि और व्यायाम की योजना बनती है। इसका उद्देश्य शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय बनाना और शारीरिक क्षमता बढ़ाना है।
विभिन्न आयु वर्गों के लिए सुझाव
वयस्कों को प्रति सप्ताह 150 से 300 मिनट एरोबिक गतिविधि करनी चाहिए। उन्हें सप्ताह में दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां भी करनी चाहिए। बच्चों और किशोरों को प्रतिदिन लगभग 60 मिनट शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। बुजुर्गों को सप्ताह में तीन दिन संतुलन और शक्ति बढ़ाने वाली गतिविधियां करनी चाहिए।