पेट्रोल व डीजल महज शुरूआत, दूसरे झटके के लिए रहें तैयार
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दाल-चावल, खाना बनाने का तेल और फल-सब्जी में महंगाई झेल रहे लोगों को अब महंगाई का एक और झटका खाने के लिए तैयार रहना होगा।
तेल विपणन करने वाली सरकारी कंपनियों ने पिछले 16 दिन में डीजल की कीमतों में पांच रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी कर दी है। इस वजह से ट्रकों का किराया 7-8 फीसदी बढ़ने का अनुमान किया जा रहा है।
जब ट्रक भाड़ा ही बढ़ जाएगा तो फिर उससे ढुलाई होने वाला सब सामान महंगा हो जाएगा। सरकारी तेल कंपनियों ने बीते 30 अप्रैल को पेट्रोल में प्रति लीटर 3.96 रुपये जबकि डीजल में प्रति लीटर 2.37 रुपये की बढ़ोतरी की थी।
शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत में 3.13 रुपये जबकि डीजल में प्रति लीटर 2.71 रुपये की बढ़ोतरी हुई। दोनों को मिला दें तो महज 16 दिन में पेट्रोल 7.09 रुपये जबकि डीजल 5.08 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है।
ऐसे समझें माल भाड़े में बढ़ोतरी का गणित
ये तो कीमत दिल्ली की है जहां वैट अन्य राज्यों के मुकाबले कम है। अन्य राज्यों में तो डीजल-पेट्रोल और महंगा हुआ है। सामान्य रूप से प्रति लीटर डीजल की कीमत पांच रुपये की कीमत बढ़ने से ट्रक भाड़े में 7-8 फीसदी की बढ़ोतरी की गुंजाइश बनती है।
यदि ट्रक ट्रांसपोर्टर भाड़े में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी कर दे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। सभी चीजों के दाम बढ़ने की संभावना इसलिए व्यक्त की जा रही है क्योंकि डीजल का उपयोग किसानों से लेकर ट्रक आपरेटर, फैक्ट्री चलाने वाले और रेलवे भी करता है।
रेलवे इस समय समय हर साल करीब 270 करोड़ लीटर डीजल का उपयोग करता है। उस पर भी बोझ बढ़ा है तो जाहिर है कि वे अपने वस्तु एवं सेवाओं का मूल्य/भाड़ा बढ़ाएंगे। पेट्रोलियम के बढ़े दामों पर इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) के सीनियर फेलो एस पी सिंह का कहना है कि इस समय गेहूं खलिहानों से गोदाम या दूसरे राज्यों में जा रहा है।
इसलिए ट्रकों की काफी मांग है। ऐसे में डीजल की कीमत में प्रति लीटर 5 रुपये से ज्यादा का इजाफा हो गया है तो ट्रक वाले यदि भाड़ा बढ़ा देंगे तो कोई विरोध भी नहीं होगा।