बवाना अग्निकांड में जिंदा झुलसे लोगों की ऐसे की गई शिनाख्त, 14 लोगों को पहचानने में हुए सफल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आग की चपेट में आकर मरने वालों के शरीर इस कदर झुलस गए थे कि उनकी शिनाख्त करने में लोगों को परेशानी आ रही थी। ऐसे में परिवार वालों ने किसी की पहचान अंगूठी से की तो किसी ने कड़े से अपनों की शिनाख्त की।
अमन विहार के बंटूलाल ने बताया कि उन लोगों ने बेटी सोनम की पहचान अंगूठी से की। उसका चेहरा झुलस गया था। उन लोगों ने अंगूठी और काले रंग की जैकेट से उसकी पहचान की।
वहीं अफसाना की पहचान उसके पति मुख्तार ने की। उसने बताया कि अफसाना का चेहरा भी झुलस गया था। उसका शरीर पूरी तरह से अकड़ गया था। उसके कपड़े से पहचान की जा सकी।
वहीं मेट्रो विहार की बेबी की पहचान उसकी बहनों किरण देवी और रिंकू देवी ने की। किरण ने बताया कि बेबी के कड़े और लाल रंग के कपड़े से उसकी पहचान की गई। रीता के भाई दीपू ने बताया कि रीता का चेहरा काला पड़ गया था।
उन लोगों ने कपड़ों व जुराब से उसकी पहचान की। वहीं राजो के बेटे लक्ष्मण ने बताया कि उन्होंने अपनी मां की पहचान पीले रंग की साड़ी और नीले रंग की ब्लाउज से की थी। मुबिना ने बताया कि उसने अपनी मां मदीना की पहचान उसके कपड़ों से की। क्योंकि उनका चेहरा आधा झुलस गया था।
अपने मरीजों का गम भूलकर तिमारदार मोर्चरी पर पहुंचे
अस्पताल में भर्ती अपने मरीजों का गम भूलकर उनके तिमारदार सुबह से ही मोर्चरी के पास आ गए। अपनों के शवों को तलाश रहे लोगों की मदद की और उनके दुख में शामिल हुए।
मृतक के परिवार वाले जब अपनों को याद कर रहे थे तो मरीजों के तिमारदारों की आंखें नम थीं। यहां तैनात सिविल डिफेंस के पचास से अधिक कर्मचारी उनका विशेष ध्यान रख रहे थे।
उन्हें किसी तरह की कोई दिक्कत न हो इसका विशेष ध्यान रख रहे थे। करीब 12 बजे से परिजनों को शव सौंपने का काम शुरू कर दिया गया। किसी को शव ले जाने में किसी तरह का दिक्कत न हो इसके लिए एंबुलेंस के इंतजाम किया गया था।
चाय वाले को याद आ रहीं महिलाओं की बातें
फैक्ट्री के पड़ोस में चाय की दुकान चलाने वाले रमेश ने बताया कि उसे अब भी यहां काम करने वाली दो महिलाओं की बातें याद आ रही हैं। वह यहां काम करने वाले मजदूरों को 14 दिन से चाय पिला रहा था।
घर जाने के दौरान महिलाएं उससे मजाक करती थीं और कहती थी कि चाय में दूध डाल दिया करो। रमेश ने बताया कि घटना से कुछ देर पहले उसने फैक्ट्री में 41 चाय भेजी थी। उसके मुताबिक वह हर दिन करीब 40 चाय फैक्ट्री में भेजता था।
नौ बजे रात तक नहीं आने पर पहुंचा फैक्ट्री
रज्जो के बेटे लक्ष्मण ने बताया कि रात नौ बजे तक मां के फैक्ट्री से नहीं आने पर वह घर से रवाना हो गया। लेकिन रास्ते में किसी ने बताया कि फैक्ट्री में आग लग गई है।
वहां पहुंचने पर पुलिस वालों ने उसे अस्पताल जाने के लिए कहा, जहां पता चला कि उसकी मां का देहांत हो गया है। मां फैक्ट्री के बेसमेंट में काम करती थी।
उधर, मदीना की बेटी मुबिना ने बताया कि उसके पिता नसरूद्दीन दिमागी रूप से कमजोर हैं। मदीना ही फैक्ट्री में काम करके पूरे परिवार का पालन पोषण करती थी। उसकी मां 15 दिन से इस फैक्ट्री में काम कर रही थी।