इंसाफ के इंतजार में सीएम विंडो का पहला फरियादी
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इतना ही नहीं पहली शिकायत के बाद वह सीएम विंडो पर इसी समस्या को लेकर वह चार बार और शिकायत लगा चुका है और उपायुक्त से लेकर थाना प्रभारी तक कई बार न्याय की गुहार लगा चुका हैं। लेकिन उसकी समस्या का आज तक कोई समाधान नहीं हुआ। बता दें कि 25 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री के आदेश पर हर जिला मुख्यालय पर सीएम विंडो की शुरूआत की गई।
मेवात में इसकी शुरूआत तत्कालीन उपायुक्त अशोक सांगवान ने छपेडा निवासी राजेंद्र की शिकायत अपने हाथों से खिडकी पर देकर यथावत शुरूआत की। लेकिन इसे अधिकारियों की लापरवाही कहें या मनमानी कि पहली ही शिकायत का आज तक कोई समाधान नहीं हो पाया। राजेंद्र ने शिकायत दी थी कि उनके पिताजी के नाम गांव में लाल डोरा से बाहर एक 6644 की प्लाट है।
जिसे उत्तर व पूर्व दिशा में गांव के ही कुछ दबंगों ने अवैध रुप से कब्जाया हुआ है। प्रार्थी ने इसकी पैमाइश लोकल कमिश्नर से तहसील की फीस भरकर कराई हुई है। लेकिन आरोपियों ने उसे नहीं माना और दोबारा तहसीलदार को मौका पैमाइश के आर्डर कराएं और तहसीलदार ने निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट प्रार्थी के हक में दी। इसके बाद प्रार्थी ने अन्य अधिकारियों को भी शिकायत दी, जिसकी रिपोर्ट उसके हक में रही। लेकिन फिर भी प्लाट से कब्जा नहीं छूटा।
इस पर प्रार्थी ने सीएम विंडो की शुरूआत में ही अपनी शिकायत लगाई। इसके बाद प्रार्थी ने 9 अक्तुबर 2015, 7 दिसंबर 2015, 24 दिसंबर 2015 व 18 मार्च 2016 को इसी समस्या को लेकर सीएम विंडो पर शिकायत लगाई। प्रार्थी ने 2 मार्च 2016 को उपायुक्त को शिकायत लगाई कि थाना नूंह से एएसआई संतलाल मौके पर पहुंचा। लेकिन फिर भी समस्या को कोई समाधान नहीं हुआ। प्रार्थी ने कहा कि वह दलित परिवार से है और उसे दबंगों से जान-माल का खतरा बना हुआ है।
जरूर दिलवाएंगे कब्जा-
सीएम विंडो की सीधी गाइडलाइन हैं कि यदि कोई लापरवाही की जाती है तो संबंधित कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ कडी कार्यवाई होगी। वहीं शिकायत का समाधान कराने लायक होगा तो उसका तुरंत समाधान कराएंगे, यह मामला अब उनके संज्ञान में आ गया है और इस पर जल्द कार्यवाई होगी।-मनीराम शर्मा, उपायुक्त मेवात।