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Delhi: अंतरराष्ट्रीय डॉग डे पर विशेष... कुत्तों से दोस्ती भी करना चाहते हैं और डरते भी हैं दिल्ली के लोग

Tue, 26 Aug 2025 05:26 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 26 Aug 2025 05:26 AM IST
सार

एमसीडी के अनुमानों के अनुसार, राजधानी में करीब 10 लाख लावारिस कुत्ते मौजूद हैं। हर साल हजारों लोग इनके हमलों का शिकार होते हैं। गत वर्ष 2024-25 में ही करीब 50 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों के काटने से अस्पतालों तक पहुंचे।

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People of Delhi want to befriend dogs but are scared of them too
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय डॉग डे दुनिया भर में इंसान और कुत्ते के बीच के रिश्ते को सम्मान देने का दिन है। लेकिन दिल्ली में इस दिन की पूर्व संध्या पर कुत्तों के प्रति प्यार और संवेदनशीलता के साथ-साथ खतरे और चिंता की हकीकत भी सामने आई।

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आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों की जिंदगी में डर का कारण बन रही है। एमसीडी के अनुमानों के अनुसार, राजधानी में करीब 10 लाख लावारिस कुत्ते मौजूद हैं। हर साल हजारों लोग इनके हमलों का शिकार होते हैं। गत वर्ष 2024-25 में ही करीब 50 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों के काटने से अस्पतालों तक पहुंचे।
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विशेषज्ञ मानते हैं कि असली संख्या और भी अधिक हो सकती है क्योंकि ज्यादातर लोग सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करवाते। उधर, एमसीडी ने कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए 20 नसबंदी केंद्र बना रखे हैं। यहां पर गत दो वर्षों से प्रतिवर्ष एक लाख कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण करने का दावा किया जाता है। साथ ही, हाल ही में एमसीडी ने इस दिशा में एक उप समिति बनाई है और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से सुझाव भी मांगे हैं। हालांकि हकीकत यह है कि कुत्तों की तादाद पर अंकुश लग नहीं पा रहा। नसबंदी केंद्रों में संसाधनों और स्टाफ की भारी कमी है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में  पिल्ले सड़कों पर आ जाते हैं और स्थिति जस की तस बनी रहती है। राजधानी के कई इलाकों में लावारिस कुत्ते झुंड में सड़क, गली और पार्कों में घूमते रहते हैं।
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 आए दिन बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर इन कुत्तों के हमले की खबरें आती रहती हैं। रैबीज जैसी खतरनाक बीमारी के मामले भी सामने आते हैं। लोगों का कहना है कि जहां पालतू कुत्तों पर कड़े नियम लागू किए जाते हैं, वहीं लावारिश कुत्तों को लेकर एमसीडी और प्रशासन की लापरवाही चिंता बढ़ा रही है। इसके बावजूद, एनजीओ और समाजसेवी संस्थाएं कुत्तों को लेकर जागरूकता बढ़ाने में लगी हैं।

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