बकरीद के लिए आखिरी दौर में कुर्बानी का जानवर खरीद रहे हैं लोग
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शुक्रवार को होने वाली बकरीद की तैयारियां जोरों पर हैं। आखिरी दिनों में बकरों की मंडियां गुलजार हैं। जिन्होंने अभी तक कुर्बानी के लिए जानवर नहीं खरीदा था, वो अब बाजार का रुख कर रहे हैं।
बाजार में 14 से 75 हजार तक के बकरे मौजूद हैं। सेवईयां और मेवे की दुकानें सज चुकी हैं। लोग इत्र, मेवे के साथ नए कपड़ों की खरीददारी में जुटे हैं। ईद-उल-जुहा की नमाज के लिए मस्जिदों और ईदगाह में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
पिछले साल के मुकाबले इस बार बकरे के दामों में उछाल है। आखिरी समय में कीमत में और उछाल देखने को मिल रहा है। शहर के सदर बाजार स्थित बकरा बाजार में बकरों की कीमत 20 हजार से लेकर 75 हजार रुपये तक है।
कोल्ड ड्रिंक और जूस पीता है बकरा
सबसे महंगा बकरा करीब 80 किलोग्राम का है। व्यापारी सद्दाम कहते हैं कि 80 किलोग्राम का तंदुरुस्त बकरा दिन में डेढ़ किलो चना और पांच किलोग्राम पत्ते खाता है। इसके अलावा कोल्ड ड्रिंक और मौसमी का जूस भी पीता है।
महंगे बकरे के साथ ही 30 और बकरे लेकर आए शमीम अहमद ने बताया कि बकरे को तंदुरुस्त करने के लिए शुरू से ही उसकी खुराक अच्छी रखनी पड़ती है। मेवाती, जाफराबादी, जमुनापारी नस्ल के बकरे लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इनकी खुराक भी अधिक होती है।
स्पेशल नाम वाले बकरे भी हैं मौजूद
लोगों को आकर्षित करने के लिए कई कारोबारियों ने बकरे का नाम भी दिया है। नाम वाले, 786 और पीठ पर चांद बने बकरों की कीमत व्यापारी अधिक वसूल रहे हैं। बकरा व्यापारी अजीमुल्ला कहते हैं कि सल्लू मियां, सोना, जब्बू की मांग भी काफी है।
ये जानवर खरीदकर नहीं लाए गए हैं, इन्हें घर में ही प्यार से पाला गया है। साल भर इस पर मेहनत की गई है, इसलिए अधिक कीमत ली गई है। जामा मस्जिद के इमाम कहते हैं शरीयत के मुताबिक तंदुरुस्त जानवर कुर्बानी के लिए वाजिब है। स्पेशल नाम का कुर्बानी से कोई ताल्लुक नहीं है।