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आदि शंकराचार्य पर पवन कुमार वर्मा ने लिखी पुस्तक, कहा-किसी को मारना नहीं सिखाता हिंदू धर्म
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 03 Aug 2018 10:16 AM IST
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पवन वर्मा ने लिखी आदि शंकराचार्य की जीवनी पर पुस्तक
- फोटो : अमर उजाला
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मॉब लिंचिंग किसी भी धर्म की सभ्यता नहीं है। किसी को मारना हिंदू धर्म नहीं। आपसी सौहार्द के लिए जिस धर्म को हजारों वर्ष पहले बनाया हो, उसे चंद लोग तोड़-मरोड़कर देश में प्रस्तुत कर रहे हैं, ये सरासर गलत है।
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हिंदू धर्म को परिभाषित करते हुए इसकी उत्पत्ति और प्रभाव को पवन कुमार वर्मा ने साहित्यिक अंदाज में इस तरह व्यक्त किया। पूर्व राजदूत, राजनेता और बतौर लेखक पवन कुमार वर्मा का कहना है कि हिंदू, सिक्ख, ईसाई और मुस्लिम सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। धर्म की आड़ में राजनीतिक गलियारों में शोर मचाना भी गलत है और लोगों को भ्रमित करना भी अधर्म है।
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गुरुवार को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम कलम में लेखक पवन कुमार वर्मा ने अपनी पुस्तक आदि शंकराचार्य पर भी चर्चा की। प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रस्तुतकर्ता दिनेश नंदिनी रामकृष्णन डालमिया फाउंडेशन रहा। इस कार्यक्रम में अमर उजाला मीडिया पार्टनर था।
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चाणक्य, बीइंग इंडियन, बिकमिंग इंडियन और गालिब द मैन सहित करीब 20 पुस्तकों को शब्दों का रुप दे चुके लेखक पवन कुमार ने कहा कि आदि शंकराचार्य का हिंदू धर्म को लेकर 32 वर्षों का योगदान रहा। आज की युवा पीढ़ी को शंकराचार्य के बारे में जानना चाहिए। मुझे गर्व है कि मैं एक ङ्क्षहदू हूं और सभी धर्मों का सम्मान भी करता हूं। हमारे धर्म में भाव को ही सर्वोपरि माना है। योग, पूजा-पाठ सभी के लिए इंसान के भाव महत्वपूर्ण हैं।
एक सवाल पर उन्होंने बताया कि राजदूत पद से इस्तीफा देने के बाद उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार से मिलने का मौका मिला। इस मुलाकात के बाद उन्हें बतौर कैबिनेट सलाहकार का पद मिला। इस जिम्मेदारी को लेकर उन्होंने कई बार ऐतराज भी जताया, लेकिन सीएम नीतिश कुमार ने विश्वास दिलाते हुए जिम्मेदारी सौंपी। पवन कुमार बताते हैं कि नीतिश एक ऐसे राजनेता हैं, जिनका निजी जीवन स्वच्छ जल की भांति साफ और निर्मल है। उन्होंने ये भी कहा कि आधुनिकता को परिभाषित करना आसान नहीं है। ये सामान्य से एकदम अलग है।
उन्होंने कहा कि अतीत को छोड़कर आगे बढना आधुनिकता है, लेकिन इसके साथ पाश्चात्य को जोडना ठीक नहीं। अतीत से सीख आगे बढना ही सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है। ये सब हिंदू धर्म सिखाता है, लेकिन मतभेद के चलते लोग अपने नियमों को बनाकर इस धर्म की संस्कृति और विचारधारा को बदलने में लगे हैं। हमारे देश के कई राज्य अभी भी गरीबी से जूझ रहे हैं। केंद्र स्तर पर सरकारों को इन राज्यों की परेशानियों को समझना चाहिए। जिस देश में प्यार और सौहार्द हो, उसके लिए हर इंसान को आगे बढना ही चाहिए। कार्यक्रम के अंत में श्रोताओं ने हिंदू धर्म और राजनीति के साथ-साथ मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को लेकर भी लेखक से सवाल किए।
लेखक का परिचय
पवन कुमार वर्मा एक लेखक, कूटनीतिज्ञ और राजनेता हैं। हाल-फिलहाल तक ये राज्यसभा सांसद थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के सलाहकार भी रह चुके हैं। पवन एक दर्जन से भी ज्यादा बेस्टसेलिंग किताबों के लेखक हैं, जिनमें गालिब द मैन, द टाइम्स, द ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास, द बुक ऑफ कृष्ण, बीइंग इंडियन, बिकमिंग इंडियन और चाणक्याज न्यू मैनिफैस्टो मुख्य रुप से शामिल हैं। आप कई देशों में राजदूत के तौर पर काम कर चुके हैं। लंदन में नेहरु सेंटर के डायरेक्टर, विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता और भारत के राष्ट्रपति के प्रेस सचिव रहे हैं। पवन कुमार वर्मा को कूटनीति, साहित्य, संस्कृति और सौंदर्यशास्त्र के क्षेत्रों में योगदान के लिए 2005 में इंडियानापॉलिस यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी थी।
बॉक्स : कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर से संदीप भुथोरिया, अर्चना डालमिया, नीलिमा डालमिया, अपरा कुच्छल, अनंत माला और बीजेपी की शाजिया इल्मी सहित तमाम राजनीति और साहित्य क्षेत्र की हस्तियां मौजूद रहीं। इनके अलावा लेखक पवन कुमार वर्मा के साथ लेखक रक्षनंदा ने आदि शंकराचार्य पुस्तक और हिंदू धर्म को लेकर सवाल पूछते हुए मंच संचालन किया।