एम्स में मरीज का लिवर निकाला तो गया, लेकिन नहीं हो पाया प्रत्यारोपित
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हालांकि, दान किए गए दोनों किडनी को एम्स में ही भर्ती दो मरीजों को प्रत्यारोपित किया गया और कॉर्निया एम्स के नेत्र बैंक में सुरक्षित रखवा दिया गया है।
गत 2 सितंबर को सड़क हादसे में घायल उत्तम नगर के एक 30 वर्षीय युवक को इलाज के दौरान स्थिति खराब हो गई, जिसके बाद उसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में ब्रेन डेड घोषित किया गया।
30 वर्षीय युवक को एम्स ने घोषित किया था ब्रेन डेड
इसके बाद अंगदान के लिए हामी भरने के बाद उसकी दोनों किडनी, लिवर और कॉर्निया को निकाला गया। किडनी एम्स में ही दो मरीजों को प्रत्यारोपित कर दिया गया और लिवर को प्रत्यारोपण के लिए दिल्ली सरकार के स्वायत्त संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बैलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) भेज दिया गया।
एम्स से लिवर ले जाने के बाद जब आईएलबीएस के लिवर प्रत्यारोपण रोग विशेषज्ञों ने लिवर की जांच-पड़ताल और बॉयोप्सी की, जिसके बाद लिवर को प्रत्यारोपित नहीं करने का निर्णय लिया।
सूत्रों की मानें तो लिवर का कुछ हिस्सा ही काम कर रहा था और लिवर में संक्रमण भी था। ऐसे में लिवर प्रत्यारोपित किया भी जाता तो प्रत्यारोपित कराने वाले मरीज की स्थिति ठीक नहीं रह पाती।