पथरी के ऑपरेशन के बाद मौत: गॉल ब्लैडर निकलवाने के एक माह बाद गई जान, अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप
पित्त की थैली का ऑपरेशन करवाने के बाद 29 सितंबर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। इसके बाद से अब तक उनके घाव से लगातार मवाद निकल रहा था और परिजन अस्पताल में लाकर मरहम पट्टी करवा रहे थे।
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गाजियाबाद के लोनी में गोपाल अस्पताल में पित्त की थैली (गॉल ब्लैडर) की पथरी का ऑपरेशन कराने के एक महीने बाद मरीज की मौत होने पर परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर सील कर दिया है। परिजनों की शिकायत पर मृतक के शव का पोस्टमार्टम दो डॉक्टरों के पैनल से कराया जा रहा है।
बॉर्डर क्षेत्र की सुनीता विहार कॉलोनी में 40 वर्षीय सुभाष चंद्र अपने परिवार सहित रहते थे। वे वैशाली क्षेत्र के कार शोरूम में नौकरी करते थे। पेट में दर्द होने पर जांच कराने में पता चला कि पित्त की थैली में पथरी है। 26 सितंबर को परिजनों ने उन्हें शांतिनगर के गोपाल अस्पताल में भर्ती कराया। 27 सितंबर को सुभाष चंद्र के पित्त की थैली में पथरी का ऑपरेशन हुआ।
29 सितंबर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। इसके बाद से अब तक उनके घाव से लगातार मवाद निकल रहा था और परिजन अस्पताल में लाकर मरहम पट्टी करवा रहे थे। सोमवार शाम को हालत बिगड़ने पर फिर अस्पताल लेकर गए वहां पर दवाई देने के बाद डॉक्टरों ने कुछ जांच करने का पर्चे पर लिख दिया, लेकिन मंगलवार सुबह सुभाष की मौत हो गई।
उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर चरण सिंह और डॉक्टर पंकज शर्मा ने मौके पर पहुंचकर अस्पताल का निरीक्षण किया। डॉ. चरण सिंह ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन न मरीज के इलाज की कोई समरी दे पाया और न ही ऑपरेशन थिएटर के संक्रमण मुक्त करने का रजिस्टर दिखा पाया, इसलिए ऑपरेशन थिएटर सील कर दिया गया है।