'राजनैतिक' बैट्री से चार्ज हो रहे हैं ई-रिक्शा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली की सड़कों पर बेलगाम दौड़ते ई-रिक्शा की आड़ी-टेढ़ी चाल से चिंतित हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाने का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन ई-रिक्शा से राजनीतिक बैट्री हटाए बिना न तो इसकी चाल सीधी होगी और न ही थमेगी।
करीब दो लाख संचालक-चालक, व्यापारिक रूप से जुड़े लोग और उनसे जुड़े परिवार के सदस्यों सहित चार-पांच लाख लोगों को पार्टियां वोट बैंक मानती हैं। यही कारण रहा कि अवैध रूप से सड़कों पर उतरे ई-रिक्शे को राजनैतिक दल ग्रीन सिग्नल देते गए जो छोटे घाव से नासूर बन गया।
कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और भाजपा की सरकार आई, लेकिन नेताओं की कथनी और करनी में फर्क दिखाई दे रहा है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद ई-रिक्शा को लेकर भाजपा के सामने दुविधा बन गई है।
मुनाफा देख नेता भी बने संरक्षक
वर्ष 2011 के अंत में जब ई-रिक्शा सड़कों पर उतरा तो इसे चीन की भारतीय बाजार में कब्जे की नीति मानी गई। इनकी संख्या लगातार बढ़ने पर दिल्ली सरकार ने 2012 में पॉलिसी बनाने को कहा तो कई दलों से जुड़े नेता व कार्यकर्ता इस धंधे में मुनाफा कमाने के लिए उतर गए।
बिना रजिस्ट्रेशन व बिना पर्ची के चाइनीज पार्ट को एसेंबल कर बनने वाला यह रिक्शा मुनाफे का अच्छा जरिया बना, लेकिन बिना राजनैतिक संरक्षण व पावर के यह काम संभव नहीं था।
ई-रिक्शा के कई शोरूम नेताओं के ही हैं। अब यह घाव ऐसा नासूर बन गया है जिसका कोई इलाज किसी के पास नहीं दिख रहा।
ई-रिक्शा के पक्ष में कौन कब क्या बोला?
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की 17 जून को रामलीला मैदान में की गई घोषणा में कहा कि 650 वाट तक के ई रिक्शा को लाइसेंस की जरूरत नहीं पड़ेगी। मोटर वाहन अधिनियम में बाहर रखकर इसका रजिस्ट्रेशन नगर निगम मात्र 100 रुपये में करेंगे। इसके अलावा ई-रिक्शा चालकों को 3 फीसदी की ब्याज दर से कर्ज देने के लिए वित्त मंत्री व प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है।
अप्रैल 2013 में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इस संबंध में बैठक के दौरान कहा कि ई-रिक्शा की बिक्री रोकने के आदेश को बदलकर कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी टेरी के साथ ई-रिक्शा की जांच कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजेगी।
22 जून 2014 को ई-रिक्शा एसोसिएशन की सभा में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरवाल ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में ई-रिक्शा पर रोक लगा दी गई थी। केंद्र में भाजपा सरकार आते ही चालान व धरपकड़ शुरू हो गई। इसके बाद नितिन गडकरी ने ई-रिक्शा को वैध करने की बात कही, लेकिन परेशानी और बढ़ गई। पूर्ण बहुमत वाली आप की सरकार आएगी तो समस्या का समाधान होगा।
कांग्रेस ने की ई-रिक्शा बचाने की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ई-रिक्शा चालकों को बेरोजगारी से बचाने के लिए कानूनी तरीके से नीति बनाकर तुरंत प्रभाव से अध्यादेश जारी करे।
अगर ऐसा कुछ नहीं किया गया तो दस लाख से अधिक लोग संकट में आ जाएंगे। नितिन गडकरी ने रामलीला मैदान में घोषणा करके वाहवाही लूटी जबकि सच यह है कि भाजपा व आम आदमी पार्टी ई-रिक्शा के खिलाफ हैं।