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Nirmal Yamuna : सिटीजन रिपोर्ट की सिफारिश- बाढ़ क्षेत्र के पार्क देंगे ऑक्सीजन तो यमुना नदी को मिलेगा जीवन

Sun, 10 Dec 2023 07:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 10 Dec 2023 07:21 AM IST
सार

दिल्ली में यमुना को पुनर्जीवित करने की संभावना तलाशती यमुना संसद की मैली से निर्मल यमुना पर तैयार सिटीजन रिपोर्ट में करीब 20 बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित करने की सिफारिश की गई है। 

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Parks in flood area will provide oxygen and Yamuna river will get life.
मैली यमुना... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली अपने स्रोतों से मृतप्राय यमुना में जीवन डाल सकती है। इसके लिए नदी के बाढ़ क्षेत्र में जैव विविधता पार्क का विकास करना पड़ेगा। दिल्ली में यमुना को पुनर्जीवित करने की संभावना तलाशती यमुना संसद की मैली से निर्मल यमुना पर तैयार सिटीजन रिपोर्ट में करीब 20 बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित करने की सिफारिश की गई है। 

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इसमें कहा गया है कि पल्ला से कालिंदी कुंज के बीच के 9000 हेक्टेयर फ्लड प्लेन में विकसित होने वाले इन पार्क में हर एक का विस्तार 200 हेक्टेयर में किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय प्रजाति के पौधों, नम भूमियों व जल संग्रहण क्षेत्र में बाढ़ के पानी को अधिकतम रोकना संभव हो सकेगा और यमुना में ऑक्सीजन बढ़ेगी।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य प्रवाह ही नदी नहीं है। इसमें प्रवाह के एकदम नजदीक नमी से भरा रिपेरियन जोन, बाढ़ में भर जाने वाला सक्रिय बाढ़ क्षेत्र और इसके बाद पुराना बाढ़ क्षेत्र और बांध भी शामिल है। इसमें से किसी भी हिस्से में छेड़छाड़ नदी की सेहत पर असर डालती है।
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वजीराबाद से कालिंदी कुंज के सर्वे के आधार पर रिपोर्ट बताती है कि ऊपर से नीचे चलने में अतिक्रमण बढ़ता गया है। गीता काॅलोनी पुल तक पहुंचते-पहुंचते तभी नदी से बदबू उठने लगती है। यहां से नदी में सिर्फ सीवरेज गिरता है। हालात बेहद खराब हैं। फिर भी, उम्मीद की धुंधली किरण बची है।

विशेषज्ञ इस पर उत्साहित दिखे कि बाढ़ क्षेत्र में कुछ जगहों पर स्थानीय प्रजाति की घास व शाकीय पौधे दिखे हैं। इनसे ही रिपोर्ट जैव विविधता पार्क विकसित करने के हक में है। इसमें यमुना के स्थानीय पौधों का भी विस्तार से जिक्र है।

इस तरह तैयार हुई रिपोर्ट
रिपोर्ट वजीराबाद से कालिंदी कुंज तक के सर्वे, डीडीए यमुना जैव विविधता पार्क के अध्ययन व दिल्लीवालों से संवाद के आधार पर तैयार की गई है। इसमें दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर रामकुमार सिंह, बुंदेलखंड में छोटी-छोटी कई नदियों को पुनर्जीवित करने वाले डॉ. संजय सिंह, आईआईटी एल्मुनाई काउंसिल के अध्यक्ष रवि शर्मा के साथ डीयू के प्रोफेसर का विशेषज्ञ समूह शामिल था। 

  • विशेषज्ञ सलाह जैव विविधता पार्क की देश में अवधारणा देने वाले नामचीन पर्यावरणविद व डीयू के प्रो-वाइस चांसलर रहे प्रो. सीआर बाबूू, जलपुरुष राजेंद्र सिंह और डीयू के भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर शशांक शेखर ने भी दी। 

अपने जरूरत भर का जल कर लेगी संचय
प्रो. रामकुमार सिंह के मुताबिक, जैव विविधता पार्क विकसित होने से यमुना बाढ़ के दौरान अपनी जरूरत भर का जल बाढ़ क्षेत्र में ही संचित कर लेगी। जैसा कि एनजीटी ने सिफारिश की है, अगर इसके साथ नया तालाब भी बनाए जा सके तो नदी को निर्मल किया जा सकता है। फिलहाल छेड़छाड़ की वजह से यमुना खुद को साफ करने की क्षमता खो चुकी है। फिर, बेतरतीब पौधरोपण ने स्थिति को गंभीर किया है। वहीं, डॉ. संजय सिंह ने बताया कि अब इस रिपोर्ट को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से लेकर केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों व यमुना से जुड़ी सभी राज्य सरकारों को भेजा जाएगा। 

यमुना के अलग-अलग जोन के स्थानीय पौधे

रिपेरियन जोन
घास : कोदो घास, नरसल/नरकट, पटेरा, कांस, खस आदि।
शाकीय पौधे: कोदो घास के साथ मयूर शिखा, गुलाबी गोधाडी/मचेची, पानी घास, करेम/करेमुआ, चार पतिया/चरपतिया, मोथा आदि।
सक्रिय बाढ़ क्षेत्र
घास : खस, कांस, जरगा/बरलू आदि।
शाकीय पौधा/झाड़ी: निर्गुण्डी, फुलुजिया आदि।
सीमित संख्या में वृक्ष: जंगली कदम/कैम, खैर, अर्जुन, गुटेल, कठजामुन, गूलर।
पुराना बाढ़ क्षेत्र
घास : खस, कांस, जरगा/बरलू आदि।
शाकीय पौधा/झाड़ी : फुलुजिया, निर्गुण्डी, बसाका, जंगली फालसा आदि।
वृक्ष : खैर, गुटेल, जामुन, अर्जुन, चमरोर, कैथ, शीशम व शहतूत आदि।
बांध
घास : खस, जरगा, दूब आदि।
शाकीय पौधे/झाड़ी : जंगली फालसा, बसाका, निर्गुण्डी, दाबी, फलुजिया आदि।
वृक्ष : केम, हरर, बहेड़ा, शीशम, पलाश, दुधी, साजा/असना, जामुन, सेमल, बेल आदि।

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