स्कूल में आत्मदाह की कोशिश से दहले अभिभावक
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फरीदाबाद सेक्टर-29 स्थित होली चाइल्ड स्कूल में बुधवार को कक्षा आठ के छात्र द्वारा खुद को आग लगाने की घटना ने अन्य अभिभावकों की नींद उड़ा दी है। स्कूल के अंदर पेट्रोल लेकर आने और सीसीटीवी कैमरा लगे होने के बाद भी बच्चे द्वारा खुद को आग लगाने की घटना को अंजाम देने में अभिभावक स्कूल प्रबंधन को दोषी मान रहे हैं।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल की ओर से बरती गई ढिलाई के कारण ही ऐसी घटना हुई है। अभिभावक स्कूल में बच्चों को भेजकर सुरक्षित महसूस करते हैं मगर जब इतनी बड़ी घटना हो गई तो कुछ भी हो सकता है।
अभिभावक किस विश्वास पर बच्चों को स्कूल भेजें। रिजल्ट में सुधार को लेकर पिछले दिनों गुड़गांव के कॉलेज में छात्रा पिंकी द्वारा आत्मदाह का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि फरीदाबाद के स्कूल में इस दर्दनाक हादसे से अभिभावकों का दिल दहला हुआ है।
स्कूलों द्वारा फीस के नाम पर वसूली जाने वाली मोटी रकम और सुरक्षा के नाम पर ऐसे लचर इंतजाम से अभिभावक आक्रोशित हैं। घटना पर अभिभावकों से हुई बात में उन्होंने जांच कराने और ढिलाई बरतने का आरोपी पाए जाने पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
आरोप लगाया, कहा स्कूल में बरती गई होगी ढिलाई
सबसे बड़ा सवाल है कि बच्चा स्कूल में पेट्रोल लेकर कैसे पहुंचा। कल को कोई कुछ भी लेकर पहुंचे और घटना को अंजाम दे दे, तब भी क्या स्कूल प्रबंधन मूक दर्शक बना रहेगा। परेशानी तो अभिभावकों को होगी।
रंजना गुप्ता, अभिभावक
बच्चे के स्कूल बैग में किताबों की जगह मिली हॉरर नावेल ही अपने आप में बड़ा सवाल है। बच्चे के हिसाब से ऐसी घटना को अंजाम देने के लिए उसे स्कूल सुरक्षित जगह लगी तभी उसने ऐसा कदम उठाया। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
हरि मोहन सिंह, अभिभावक
सीवियर डिप्रेशन है घटना का कारण
डॉ. मीनाक्षी मनचंदा, मनोचिकित्सक के मुताबिक कोई भी शख्स इस तरह का कदम सीवियर डिप्रेशन में उठाता है। जब किसी बात से परेशान होकर उसे लगने लगे कि अब जिंदगी बेकार है। कई दिन की योजना के बाद आखिरकार वह दिन निर्धारित कर लेता है। या फिर कोई ऐसी घटना हुई हो जिससे परेशान होकर उसने तुरंत ये कदम उठाया हो।
स्कूल प्रबंधन पर उठे सवाल, कहां हैं सुरक्षा के इंतजाम
अगर स्कूल प्रबंधन आग पर काबू पाने के सही उपाय करता तो छात्र इतना नहीं झुलसता। शौचालय की दीवार पर लगे फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल करने के बजाय पेट्रोल की आग पर पानी डाला गया। मालूम हो कि पेट्रोलियम पदार्थ (पेट्रोल, मिट्टी का तेल, डीजल) आदि की आग पानी डालने से और बढ़ती है।
यही वजह रही कि शौचालय के अंदर लपटों से घिरे छात्र पर पानी की पहली बाल्टी पड़ते ही आग और भड़क गई। बच्चे को चारों तरफ से घेरे स्टॉफ के करीब पंद्रह बीस लोगों में से किसी ने भी सामने ही लगे फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल नहीं किया।
अगर पानी की जगह सही उपकरण का इस्तेमाल किया जाता तो शायद छात्र का शरीर इतना न झुलसता। दिल दलहा देने वाली इस घटना ने स्कूल के सुरक्षा प्रबंधों पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठता है कि स्कूलों में सुरक्षा के क्या प्रबंध किए जाते हैं।
स्कूल में ही क्यों लगाई आग
छात्र के आग लगाने की घटना के पीछे अन्य बच्चों के अभिभावक स्कूल प्रबंधन और टीचिंग स्टाफ को दोषी मान रहे हैं। इन लोगों का मानना है कि शिक्षक की सख्ती के चलते ही उसने यह कदम उठाया होगा।
उनका सवाल है कि छात्र ने स्कूल में ही यह काम क्यों किया, घर पर क्यों नहीं ? अगर वह नाना की मौत से डिप्रेशन में था तो दो दिन पहले भी यह कदम उठा सकता था। हालांकि कुछ अन्य परिजनों का मानना है कि टीचरों से सहानुभूति मिलने की आस में ही उसने स्कूल में आग लगाई होगी। इन लोगों का कहना है नाना की मौत से डिप्रेशन में आए छात्र को जितनी केयर की जरूरत थी परिजन नहीं कर सके होंगे।
तीन घंटे बाद क्यों दी सूचना
किशोर छात्र की खुदकुशी की कोशिश को स्कूल प्रबंधन ने सबसे छिपाया। यहां तक कि पुलिस को भी सूचना तुरंत नहीं दी गई। घर पहुंचे छात्रों के जरिए स्कूल में हुई घटना की जानकारी लोगों तक पहुंची।
छात्रों के परिजनों ने फोन कर प्रबंधन से जानकारी लेनी शुरू की। मामला खुलता देख मजबूर होकर घटना के तीन घंटे बाद प्रबंधन ने बारह बजे के बाद सेक्टर-31 पुलिस को सूचना दी।
घटना को छिपाए जाने से अन्य छात्रों के परिजन स्कूल प्रबंधन से नाराज दिखाई दिए। उनका कहना है कि यदि प्रबंधन की कोई गड़बड़ी नहीं थी तो पुलिस को सूचना देने में इतनी देर क्यों लगाई गई।
नहीं दिखा आपात प्रबंधन
करीब दो हजार छात्रों वाले होली चाइल्ड पब्लिक स्कूल का स्टाफ आपात प्रबंधन में शून्य दिखा। आग से घिरे बच्चे को देख स्टाफ में भगदड़ मची हुई थी। आग की लपटों से घिरे छात्र को सबसे पहले एक टीचर ने देखा। बच्चे को बचाने का प्रयास करने के बजाय वह चिल्लाती हुई बाहर की तरफ भाग खड़ी हुईं।
हालांकि वह तो दोबारा अंदर नहीं आईं लेकिन आठ-दस टीचर और प्रबंधन के लोग दौड़ते हुए पहुंचे। इनमें भी अफरा-तफरी मच गई। बच्चे को बचाने की बजाय अधिकतर लोग तमाशबीन बने रहे। दो तीन लोगों ने जलते छात्र पर पानी डालना शुरू किया। आग बुझने के बाद छात्र को प्राथमिक उपचार देने के लिए स्कूल में कुछ नहीं मिला।
न ही अस्पताल तक ले जाने के लिए स्कूल में कोई स्ट्रेचर था। आग से घिरे एक बच्चे की सुरक्षा में नाकाम स्कूल स्टाफ करीब दो हजार बच्चों को कैसे संभालेगा यह सवाल उठने लगे हैं।