12वीं पेपर लीक: स्कूल के प्रिंसिपल के कहने पर किया ऐसा, कमजोर बच्चों की करना चाहते थे मदद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री कार्यालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय 10वीं के गणित व 12वीं के अर्थशास्त्र के पेपर लीक मामले में दिल्ली पुलिस की जांच पर हर रोज नजर बनाए हुए हैं।
दिल्ली पुलिस हर दिन की जांच रिपोर्ट पीएमओ व मानव संसाधन विकास मंत्रालय को दे रही है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय इतना गंभीर है कि जांच रिपोर्ट लेने के लिए एक अफसर नियुक्त किया गया है।
दूसरी तरफ, मदर खजानी कॉन्वेंट स्कूल में 12वीं कक्षा का अर्थशास्त्र का पर्चा लीक होने के मामले में नया खुलासा हुआ है। एसआईटी के एक सदस्य ने बताया कि प्रिंसीपल प्रवीण कुमार के कहने पर ही परीक्षा शुरू होने से पौने घंटे पहले पेपर खोला गया था।
प्रिंसीपल ने शिक्षक रोहित, ऋभष व कमेटी के सदस्यों से कहा था कि वह समय से पहले पेपर खोलकर पढ़ाई में कमजोर छात्रों की सहायता कर दें। स्कूल में जिस कमरे में पेपर खोला गया था, उसमें मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं थी।
तौकीर ने छात्रों से जमा किए थे 60 हजार रुपये
इसके बावजूद रोहित व ऋषभ छिपाकर मोबाइल ले गए थे। रोहित के कहने पर ऋषभ ने पेपर का फोटो खींच व्हाट्स एप पर ट्य़ूटर तौकीर को भेज दिया था। ऐसा करके रोहित व ऋषभ मोटी रकम कमाना चाहते थे।
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि प्रिंसीपल प्रवीण कुमार को पैसे के लिए पेपर स्कूल से बाहर भेजने की जानकारी नहीं थी। यही कारण है कि पुलिस ने अब तक प्रिंसीपल व कमेटी के सदस्यों को गिरफ्तार नहीं किया है।
एसआईटी के एक वरिष्ष्ठ सदस्य ने बताया कि मदर खजानी स्कूल को लेकर जल्द ही सीबीएसई को रिपोर्ट भेजी जाएगी, ताकि स्कूल के खिलाफ कार्रवाई हो सके। स्कूल ने सीबीएसई की गाइडलाइंस का उल्लंघन किया है।
रोहित और ऋषभ ने ट्यूटर तौकीर को व्हाट्स एप पर अर्थशास्त्र का पर्चा भेजा था। उसने इसे आगे कई छात्रों को भेजा था। तौकीर ने पेपर देने की एवज में छात्रों से 60 हजार रुपये ले लिए थे। उसने ऋषभ को मात्र 25 हजार रुपये दिए। बाद में पर्चा लीक होने के कारण छात्रों ने तौकीर को पैसे देने से मना कर दिया था।