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छोटे से गांव की यह महिला बदल रही है दिल्ली

Thu, 09 Oct 2014 02:50 PM IST
Updated Thu, 09 Oct 2014 02:50 PM IST
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Padmavati is chenging delhi.

दिल्ली में एक ऐसी लेडी का आगमन हुआ है जो उन लोगों के लिए खतरे की घंटी है जो अपनी कारों से बहुत प्यार करते हैं।

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इस महिला को 'ट्री सेंसस लेडी' के नाम से जाना जाता है। इनके नाम एक अनोखा रिकॉर्ड है। दिल्ली में ट्री सेंसस बनाने वाली यह पहली महिला हैं।

यह काम इन्होंने 2011 में शुरू किया था। इनका नाम है पद्मावती दिवेदी। पद्मावती एक बार फिर से दिल्ली में हैं और एक नया अभियान शुरू करने जा रही हैं।

दिल्ली में लोगों के पास जगह की कमी है और पार्किंग अपने आप में एक बड़ी समस्या है। ऐसे में लोग अपने घरों के सामने की जमीन पर कार पार्किंग करने लगते हैं। बात सिर्फ कार पार्किंग तक ही सीमित नहीं है।

कार को पार्क करने के लिए लोग घर के सामने की कच्ची जमीन को सीमेंटेड करवा देते हैं। यहीं से शुरू होती है पद्मावती की चिंता।

दो साल पहले शुरू किया था अभियान

Padmavati is chenging delhi.

पद्मावती का कहना है कि दिल्ली में घरों के समाने की जमीन से लेकर सड़कों के किनारे बने फुटपाथ तक को कंक्रीट में तब्दील कर दिया गया है।

इसका गंभीर परिणाम हुआ है कि दिल्ली में सड़कों और कॉलोनियों में लगे लाखों पेड़ खतरे में है। पद्मावती का कहना है कि कंक्रीट के पेवमेंट और रैंप बनवाने की वजह से न सिर्फ भू-जलस्तर गिरा है बल्कि, कंक्रीट से निकलने वाली गर्मी से शहर का तापमान भी तेजी से बढ़ा है।

पद्मावती ने तय किया है कि अपने नए अभियान के तहत वह दिल्ली के सभी इलाकों के फुटपाथ और कॉलोनियों में बने कंक्रीट की परत को हटवा कर रहेंगी।

पद्मावती ने इस अभियान की शुरूआत दो साल पहले सर्वोदय इंक्लेव से की थी। वह खुद भी इसी इलाके में रहती हैं। उन्होंने अपने कॉलोनी के लोगों से अपील की कि या तो वो घर के बाहर की जमीन को यूं ही छोड़ दें या 'X' आकार के टाइल का इस्तेमाल करें जिससे की पानी को जमीन के अंदर पहुंचने में मदद मिले।

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कई इलाकों का कर चुकी है कायाकल्प

Padmavati is chenging delhi.

पद्मावती के इस प्रयास को न सिर्फ सराहा गया बल्कि लोगों ने उनकी मदद भी की। सर्वोदय एंक्लेव के अलावा नवजीवन विहार, गुलमोहर पार्क, अरविंदो मार्ग और अन्य पार्कों में भी उनकी यह मुहीम कारगर रही है।

पद्मावती ने बताया कि पहली बार जब वह आंध्र प्रदेश के एक छोटे से शहर से निकल कर दिल्ली आईं तो उन्हें यह शहर थोड़ा अजीब दिखा। बाद में उन्हें पता चला कि शहर में चारों ओर बिछा कंक्रीट का जाल असल में इसे बेहद नुकसान पहुंचा रहा है।
 
तभी उन्होंने तय किया कि इस बुराई से वह शहर को मुक्त कराकर ही दम लेंगी।

साभार : मेलटूडे

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