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समन्वय बैठक में खुलासा: दिल्ली पुलिस के 215 से अधिक जवान ‘लापता’, तबादले के बाद नई तैनाती पर नहीं पहुंचे

Sat, 04 Jul 2026 03:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 04 Jul 2026 03:51 AM IST
सार

यह खुलासा पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा की अध्यक्षता में हुई समन्वय बैठक में हुआ।

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Over 215 Delhi Police personnel ‘missing’; failed to report for new postings following transfers.
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली पुलिस के 215 से अधिक पुलिसकर्मी तबादले के बाद नई तैनाती वाली यूनिट में रिपोर्ट किए बिना ही व्यवस्था से बाहर हो गए हैं। उनकी वर्तमान तैनाती कहां है और वे किस यूनिट से वेतन ले रहे हैं, इसे लेकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय में भी स्पष्ट जानकारी नहीं है। यह खुलासा पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा की अध्यक्षता में हुई समन्वय बैठक में हुआ।

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बैठक बृहस्पतिवार को शाम चार से छह बजे तक चली, जिसमें पुलिसकर्मियों के तबादले, रवानगी, तैनाती और आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संजय भाटिया ने प्रस्तुति के दौरान बताया कि 215 से अधिक पुलिसकर्मी पुराने जिले से रिलीव होने के बाद नई यूनिट में आमद कराने नहीं पहुंचे। इस पर पुलिस आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल स्थिति स्पष्ट करने और पूरी व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश दिए।
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बैठक में भ्रष्टाचार के मामलों पर भी सख्त रुख अपनाया गया। पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिया कि रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने या भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच अधिकतम तीन महीने में पूरी की जाए, ताकि उनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई समयबद्ध तरीके से की जा सके। बैठक में चर्चित करोड़पति इंस्पेक्टर सुभाष यादव का मामला भी उठा।
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पुलिस पर अटैचमेंट का खेल पड़ रहा है भारी
बैठक में पुलिसकर्मियों की लंबे समय तक अनौपचारिक अटैचमेंट पर भी चिंता जताई गई। कई मामलों में पुलिसकर्मी वेतन एक जिले से लेते हैं, जबकि वर्षों तक किसी अधिकारी के साथ दूसरी जगह तैनात रहते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे जवाबदेही कमजोर होती है और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ती है। कुछ महीने पहले वसंतकुंज में एक आईपीएस अधिकारी और 16 वर्षों से उनके साथ तैनात हवलदार के बीच मारपीट का मामला भी इसी संदर्भ में चर्चा में आया। पुलिस आयुक्त ने इस व्यवस्था को गलत बताते हुए इसे समाप्त करने और नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।

तीन महीने में विभागीय जांच पूरी कर होगी कार्रवाई
पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में विभागीय कार्रवाई अब लंबित नहीं रखी जाएगी। रिश्वत लेते पकड़े गए या भ्रष्टाचार में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच तीन महीने में पूरी कर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी, ताकि दोषियों के खिलाफ समयबद्ध निर्णय लिया जा सके। इसमें बर्खास्तगी भी की जा सकती है।

सात वर्ष बाद हुई समन्वय बैठक
दिल्ली पुलिस में समन्वय बैठक हर वर्ष आयोजित किए जाने की परंपरा रही है। इसमें पुलिस आयुक्त, स्पेशल सीपी, संयुक्त पुलिस आयुक्त तथा विभिन्न इकाइयों के डीसीपी शामिल होकर प्रशासनिक और आंतरिक विषयों की समीक्षा करते हैं। अंतिम नियमित बैठक 2019 में हुई थी, जबकि 2020 में कोरोना महामारी के दौरान यह ऑनलाइन आयोजित की गई थी। इसके बाद पहली बार यह बैठक आयोजित हुई, जिसमें प्रशासनिक पारदर्शिता, अटैचमेंट व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण को प्रमुख एजेंडा बनाया गया।


मैंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भ्रष्टाचार में शामिल या रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने वाले पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच तीन महीने के भीतर पूरी की जाए। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भ्रष्टाचार करने वालों को अब किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
-सतीश गोलचा, पुलिस आयुक्त, दिल्ली पुलिस

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