भीतरी न बाहरी, आई अब मोदी की बारी
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भाजपा ने इस बार जब प्रत्याशियों की घोषणा की थी तो बाहरी प्रत्याशी को टिकट देने का मुद्दा खूब उछाला गया। लेकिन इसे दरकिनार कर दिल्ली की जनता ने दो पूर्वांचली समेत तीन बाहरी प्रत्याशियों को गले लगाया और उन्हें चुनकर संसद की राह दिखाई।
गत विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी थी, लेकिन मोदी लहर में यह चुनौती भी बह गई।
कांग्रेस के विकास की रफ्तार तो विधानसभा चुनाव में ही सुस्त हो गई थी, अब जनता ने लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्रियों और कांग्रेस के महासचिव की एक नहीं सुनी और भाजपा में विश्वास जताया।
उदित राज, मनोज तिवारी और महेश गिरी थे बाहरी कैंडिडेट
उत्तर-पूर्वी लोकसभा क्षेत्र में भाजपा की ओर से चुनाव मैदान में उतारे गए पूर्वांचली चेहरे मनोज तिवारी के बाहरी होने का खूब प्रचार किया गया, लेकिन क्षेत्र की जनता ने तिवारी पर भरोसा जताया।
इसी तरह उत्तर-पश्चिम लोकसभा क्षेत्र में विपक्षी पार्टियां डॉ. उदित राज को उत्तर प्रदेश का बाशिंदा कहकर जनता के बीच गईं, लेकिन जनता ने अपने दिल की आवाज सुनी और डॉ. उदित राज को ही चुना। अगर पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो महेश गिरी को लेकर भी काफी चर्चा रही कि वे बाहरी हैं।
उन्होंने ज्यादातर समय महाराष्ट्र में गुजारा, लेकिन उनके बाहरी होने का ठप्पा विपक्षी पार्टियों के काम नहीं आया और दिल्लीवासियों ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बढ़चढ़ कर वोट किया। इसी का नतीजा है कि तीनों बाहरी प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की।
बीजेपी का हर दांव हुआ हिट
इसके अलावा प्रवेश वर्मा का विधानसभा क्षेत्र दक्षिणी दिल्ली था, लेकिन भाजपा ने उन्हें पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा। इसी तरह डॉ. हर्षवर्धन का विधानसभा क्षेत्र पूर्वी दिल्ली था, लेकिन उन्हें पार्टी ने चांदनी चौक से उतारा।
पार्टी का निर्णय सही साबित हुआ। क्षेत्र के लोगों ने मोदी लहर के सामने केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल को तीसरा स्थान दिया। इसी तरह मतदाताओं ने केंद्रीय मंत्री कृष्णा तीरथ को भी नकार दिया। इतना ही नहीं वर्तमान में कांग्रेस के महासचिव अजय माकन की भी एक नहीं चली।