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दिल्ली और पंजाब को जोड़ती है हमारी साझा आध्यात्मिक विरासत : उपराज्यपाल
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- आनंदपुर साहिब और कीरतपुर साहिब के गुरुद्वारों में मत्था टेका, विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उपराज्यपाल टीएस संधू ने कहा कि दिल्ली और पंजाब का संबंध केवल भौगोलिक निकटता तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों को एक साझा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत जोड़ती है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी के महान बलिदान, गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रेरणादायी संदेश तथा दिल्ली के गुरुद्वारा शीशगंज साहिब और रकाबगंज साहिब के ऐतिहासिक महत्व ने दिल्ली और पंजाब के बीच गहरे आध्यात्मिक संबंध स्थापित किए हैं।
उपराज्यपाल ने पंजाब के श्री आनंदपुर साहिब और कीरतपुर साहिब की दो दिवसीय यात्रा के दौरान यह बात कही। उन्होंने श्री आनंदपुर साहिब में उस पावन भूमि को नमन किया, जहां सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने तख्त श्री केशगढ़ साहिब, गुरुद्वारा शीशगंज साहिब, गुरु का महल और गुरुद्वारा दमदमा साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेका और देशवासियों की सुख-समृद्धि के लिए अरदास की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बसे विशाल पंजाबी और सिख समुदाय ने दिल्ली और पंजाब के रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाया है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उपराज्यपाल ने कीरतपुर साहिब स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब में पौधरोपण भी किया। उन्होंने यह पौधा अपने बड़े भाई स्व. सरदार जसजीत सिंह समुंदरी की स्मृति में लगाया, जो रोपड़ में पूर्व संभागीय वन अधिकारी रहे थे। कीरतपुर साहिब प्रवास के दौरान उपराज्यपाल ने गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब में अपने दिवंगत माता-पिता और बड़े भाई को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि यह स्थल उनके लिए विशेष भावनात्मक महत्व रखता है, क्योंकि यहां उनके परिवार के सदस्यों की अस्थियां विसर्जित की गई थीं। पंजाब प्रवास के दौरान उपराज्यपाल ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से भी शिष्टाचार भेंट कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उपराज्यपाल टीएस संधू ने कहा कि दिल्ली और पंजाब का संबंध केवल भौगोलिक निकटता तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों को एक साझा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत जोड़ती है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी के महान बलिदान, गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रेरणादायी संदेश तथा दिल्ली के गुरुद्वारा शीशगंज साहिब और रकाबगंज साहिब के ऐतिहासिक महत्व ने दिल्ली और पंजाब के बीच गहरे आध्यात्मिक संबंध स्थापित किए हैं।
उपराज्यपाल ने पंजाब के श्री आनंदपुर साहिब और कीरतपुर साहिब की दो दिवसीय यात्रा के दौरान यह बात कही। उन्होंने श्री आनंदपुर साहिब में उस पावन भूमि को नमन किया, जहां सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने तख्त श्री केशगढ़ साहिब, गुरुद्वारा शीशगंज साहिब, गुरु का महल और गुरुद्वारा दमदमा साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेका और देशवासियों की सुख-समृद्धि के लिए अरदास की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बसे विशाल पंजाबी और सिख समुदाय ने दिल्ली और पंजाब के रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाया है।
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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उपराज्यपाल ने कीरतपुर साहिब स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब में पौधरोपण भी किया। उन्होंने यह पौधा अपने बड़े भाई स्व. सरदार जसजीत सिंह समुंदरी की स्मृति में लगाया, जो रोपड़ में पूर्व संभागीय वन अधिकारी रहे थे। कीरतपुर साहिब प्रवास के दौरान उपराज्यपाल ने गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब में अपने दिवंगत माता-पिता और बड़े भाई को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि यह स्थल उनके लिए विशेष भावनात्मक महत्व रखता है, क्योंकि यहां उनके परिवार के सदस्यों की अस्थियां विसर्जित की गई थीं। पंजाब प्रवास के दौरान उपराज्यपाल ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से भी शिष्टाचार भेंट कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
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