शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए दिल्ली में किया गया नाटक का आयोजन
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अमर बलिदानी भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु के बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर 'रंग दे बसंती' अमर बलिदान गाथा नाट्य मंचन किया गया । डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशन और अपस्टेज आर्ट ग्रुप द्वारा मयूर विहार के कार्थियायनी सभागार में इसका मंचन किया गया । देश के नौजवानों सहित सभी नागरिकों को देश पर कुर्बान हुए बलिदानियों की याद दिलाने और आजादी की कीमत समझाने के लिए डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशन और अपस्टेज आर्ट ग्रुप राष्ट्र शहीद भगत सिंह के बलिदान की स्मृति में युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा दृष्टि से 'रंग दे बसंती- अमर बलिदान गाथा' नामक नाट्य संवाद प्रस्तुत किया गया।
रंग दे बसंती के लेखक राकेश योगी ने बताया कि भगत सिंह, बिस्मिल, अशफाक , राजगुरू , सुखदेव और आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों ने राष्ट्र यज्ञ में अपनी आहुति देते वक्त जिन गीतों को प्रेरणा गीत बनाया उनमें बिस्मिल का लिखा रंग दे बसंती गीत बहुत महत्वपूर्ण है । इस गीत में बिस्मिल ने क्रांतिकारियों में जोश भरने के लिए शिवाजी और महाराणा प्रताप के नामों का भी उल्लेख किया है ।
अत्यंत रोचक बात यह है कि इस गीत का एक हिस्सा भगत सिंह ने पूरा किया । इसीलिए इस नाटक का नाम रंग दे बसंती रखा गया है। नाटक की शुरुआत बेहद रोचक है जिसमें भगत सिंह मौजूदा वक्त में लौटकर आते हैं और भटके हुए नौजवानों से संवाद करते हुए गुलामी के दिनों की दर्दनाक दास्तां सुनाते हैं । बारह साल के बालक भगत सिंह का जलियां वाला बाग की मिट्टी लाने वाला, खेत में बंदूक उगाने वाला और असेंबली में बम फेंकने वाले कई दृश्य नाटक में दिखाए गए हैं। इस नाटक का अगला मंचन 26 मार्च को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में किया जाएगा ।