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Delhi NCR News: दुष्कर्म के मामले में महिला के खिलाफ झूठी गवाही का मामला चलाने के आदेश
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- महिला ने आरोपी पर दुष्कर्म, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और उसके कपड़े उतारने के इरादे से उस पर हमला करने का मामला किया था दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट ने दुष्कर्म के एक आरोपी को बरी कर दिया है। साथ ही, उसके खिलाफ झूठी कहानी गढ़ने के लिए मामला चलाने का आदेश दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से मामले की जांच करने और कार्रवाई करने को कहा है। 2 जुलाई को अपने आदेश में अदालत ने अमेरिकी आपराधिक बचाव वकील के हवाले से कहा कि अदालत में सच्चाई अक्सर प्रक्रिया में खो जाती है। शपथ का उद्देश्य इसकी रक्षा करना है, लेकिन लोग झूठ बोलते हैं, यहां तक कि भगवान के अधीन भी।
न्यायाधीश ने कहा कि दुष्कर्म के झूठे आरोपों से न केवल लंबित मामलों पर अनावश्यक बोझ पड़ता है, बल्कि वास्तविक दुष्कर्म पीड़ितों के साथ भी घोर अन्याय होता है। अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने महिला के साथ मिलकर आरोपी से पैसे ऐंठने की घटना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उस व्यक्ति पर दुष्कर्म, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और उसके कपड़े उतारने के इरादे से उस पर हमला करने का मामला दर्ज किया गया। उस पर वैवाहिक पोर्टल के जरिए महिला से मिलने के बाद अलग-अलग तारीखों पर उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप है।
अदालत ने कहा कि यह बात रिकॉर्ड में आई कि महिला ने अन्य व्यक्तियों के खिलाफ चार एफआईआर दर्ज की थी। वैवाहिक पोर्टल पर उसकी वैवाहिक प्रोफाइल बनाने से पहले वह आरोपी के साथ टेलीफोन पर संपर्क में थी। आदेश में कहा गया कि शिकायतकर्ता अपनी वैवाहिक प्रोफाइल बनाने से पहले ही दो बार शादी कर चुकी थी, जिसमें उसने खुद को कभी शादीशुदा नहीं बताया और अपने नाम में बदलाव के साथ अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा कि उसके खिलाफ दो आधार कार्ड रखने का मामला दर्ज किया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट ने दुष्कर्म के एक आरोपी को बरी कर दिया है। साथ ही, उसके खिलाफ झूठी कहानी गढ़ने के लिए मामला चलाने का आदेश दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से मामले की जांच करने और कार्रवाई करने को कहा है। 2 जुलाई को अपने आदेश में अदालत ने अमेरिकी आपराधिक बचाव वकील के हवाले से कहा कि अदालत में सच्चाई अक्सर प्रक्रिया में खो जाती है। शपथ का उद्देश्य इसकी रक्षा करना है, लेकिन लोग झूठ बोलते हैं, यहां तक कि भगवान के अधीन भी।
न्यायाधीश ने कहा कि दुष्कर्म के झूठे आरोपों से न केवल लंबित मामलों पर अनावश्यक बोझ पड़ता है, बल्कि वास्तविक दुष्कर्म पीड़ितों के साथ भी घोर अन्याय होता है। अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने महिला के साथ मिलकर आरोपी से पैसे ऐंठने की घटना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उस व्यक्ति पर दुष्कर्म, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और उसके कपड़े उतारने के इरादे से उस पर हमला करने का मामला दर्ज किया गया। उस पर वैवाहिक पोर्टल के जरिए महिला से मिलने के बाद अलग-अलग तारीखों पर उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप है।
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अदालत ने कहा कि यह बात रिकॉर्ड में आई कि महिला ने अन्य व्यक्तियों के खिलाफ चार एफआईआर दर्ज की थी। वैवाहिक पोर्टल पर उसकी वैवाहिक प्रोफाइल बनाने से पहले वह आरोपी के साथ टेलीफोन पर संपर्क में थी। आदेश में कहा गया कि शिकायतकर्ता अपनी वैवाहिक प्रोफाइल बनाने से पहले ही दो बार शादी कर चुकी थी, जिसमें उसने खुद को कभी शादीशुदा नहीं बताया और अपने नाम में बदलाव के साथ अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा कि उसके खिलाफ दो आधार कार्ड रखने का मामला दर्ज किया गया है।
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