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पुस्तक मेला में सीएए के विरोधी और समर्थक आमने-सामने, जमकर हुई नारेबाजी
Sun, 12 Jan 2020 07:57 PM IST
Abhishek Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhishek Singh
Updated Sun, 12 Jan 2020 07:57 PM IST
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पुस्तक मेला (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेले के आखिरी दिन नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोधी और समर्थक आमने-सामने आ गए। दोनों ने अपना-अपना पक्ष लेकर जमकर नारेबाजी की। सीएए के विरोधियों के साथ तिमारपुर क्षेत्र से आप विधायक पंकज पुष्कर भी थे।
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शाम करीब चार बजे हिंदी पुस्तकों के हॉल संख्या 12 के ठीक सामने अस्मिता थियेटर ग्रुप से जुड़े लोग हाथों में सीएए और एनआरसी के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां लेकर नारे लगा रहे थे। आधा घंटे तो यह सब चलता रहा, लेकिन फिर पुस्तक मेले में आए कुछ नौजवानों ने इस प्रदर्शन का विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहां हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। सीएए के खिलाफ और समर्थन में दोनों पक्षों का नाटकीय अंदाज में प्रदर्शन शुरू हो गया।
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इस दौरान, सीएएए का विरोध कर रहे लोगों ने ‘वंदेमातरम’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाए और राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ गाने लगे। उधर, सीएए के समर्थन में जुटे नौजवानों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। उन्होंने ‘कश्मीर को आजाद किया अब जेएनयू की बारी है’ के नारे भी लगाए। यह सब आधा घंटे तक चलता रहा, लेकिन पुलिस नहीं पहुंची। बाद में सूचना मिलने पर भारी संख्या में पुलिस पहुंच गई और प्रदर्शन कर रहे लोगों को यहां से हटाया। इसके बाद मेला फिर से सामान्य चलने लगा।
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बिना इजाजत कैसे हुआ प्रदर्शन
पुस्तक मेले में आए लोग इस अप्रिय घटनाक्रम से हैरान रह गए। उन्होंने सवाल उठाए कि बिना इजाजत अस्मिता थिएटर ग्रुप के लोगों को पुस्तक मेले में प्रदर्शन कैसे करने दिया गया। जब यह प्रदर्शन चल रहा था तो कड़ी सुरक्षा का दावा करने वाले दिल्ली पुलिस के जवान कहां थे? उधर, इस संबंध में नई दिल्ली जिला पुलिस का कहना है कि बिना इजाजत प्रदर्शन करने के आरोप में पांच लोगों को हिरासत में लेकर तिलक मार्ग थाने ले जाया गया था। देर शाम इन्हें वहीं से छोड़ दिया गया।