ऑपरेशन गंगा : वायुसेना के तीन और विमानों से पहुंचे 629 भारतीय, छात्रों ने बताई अपनी और औरों की व्यथा
रोमानिया, स्लोवाकिया और पोलैंड से आए विद्यार्थी हिंडन एयरबेस पर उतरे।
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विस्तार
ऑपरेशन गंगा के तहत भारतीय वायुसेना द्वारा यूक्रेन में फंसे छात्र-छात्राओं की वतन वापसी कराने का सिलसिला जारी है। अभी तक हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर सात विमानों से 1428 भारतीयों को लाया जा चुका है। इसी बीच शुक्रवार रात करीब 11 बजे से लेकर शनिवार सुबह छह बजे तक वायुसेना के तीन सी-17 ग्लोबमास्टर 629 भारतीयों को लेकर पहुंचे। इसके बाद जवानों ने सभी को एयरबेस कैंपस में बैठाकर उनकी कागजी प्रक्रिया को पूरा किया। वहीं, सी-17 ग्लोबामास्टर विमान में 16.5 टन राहत सामग्री भी रवाना की गई।
भारतीय वायुसेना (हिंडन एयरफोर्स) के प्रवक्ता आशीष मोघे ने बताया कि शनिवार सुबह छह बजे तक दस विमानों से 2058 भारतीयों की वापसी कराई जा चुकी है। रात 11 बजे की पहली फ्लाइट में 210 भारतीय पहुंचे। सुबह 5:30 बजे दूसरा विमान 210 और सुबह 5:45 बजे तीसरा विमान 209 छात्र-छात्राओं को लेकर उतरा। ये तीनों विमान रोमानिया, पोलैंड और हंगरी-स्लोवाकिया से आए। रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने छात्रों का स्वागत किया। रात दो बजे तक चली कागजी प्रक्रिया के बाद सभी को नाश्ता कराया गया।
भारतीयों समेत सभी विदेशियों को निकालने के लिए तैयार
रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार की रात कहा कि यूक्रेनी शहरों खारकीव और सुमी में फंसे भारतीयों और अन्य विदेशी नागरिकों को निकालने के लिए उसकी बसे सीमा पर तैयार हैं। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थाई प्रतिनिधि वेसिली नेबेंजिया ने कहा, रूसी सेना यूक्रेन से विदेशी नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से निकालना सुनिश्चित कर रही है। हालांकि उन्होंने एक बार फिर आरोप लगाया कि यूक्रेन ने इन दोनों शहरों में 3700 भारतीयों को बंधक बना रखा है। उन्होंने कहा, रूस के बेलग्रॉद में 130 आरामदेह बसें इन नागरिकों को ले जाने के लिए इंतजार कर रही हैं।
यूक्रेन से लौटे बच्चों से बात करेंगे योगी
यूक्रेन के युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित वतन वापसी करने वाले बच्चों से रविवार सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भेंटकर संवाद करेंगे, जिसमें लखनऊ के 24 बच्चे शामिल हैं। मुख्य विकास अधिकारी अश्विनी कुमार पांडेय व एडीएम वित्त व राजस्व विपिन कुमार मिश्रा ने शनिवार को कलेक्ट्रेट में यूक्रेन से लौटे बच्चों व अभिभावकों संग बैठक की। इस दौरान बच्चों ने अपने अनुभव साझा किये। वहीं, परिजनों ने युद्ध की विभीषिका के बीच पढ़ाई छोड़कर लौटे वापस लौटे छात्रों के भविष्य को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। अभिभावकों ने बताया कि वह मुख्यमंत्री से यह गुजारिश करेंगे कि उनके बच्चों की पढ़ाई किसी तरह प्रदेश में ही पूरी हो जाए, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित रहे।
'लोग बना रहे थे पेट्रो बम, सैनिक सिखा रहे थे बंदूक चलाना'
जब यूक्रेन के कीव में हमला शुरू हुआ तो उजहोरोद में हाई अलर्ट हो गया। सुबह जब हम घर से बाहर निकले तो वहां पार्कों में लोग खाली बोतलों में पेट्रोल व कपड़ा भरकर बम बना रहे थे। सैनिक उन्हें बंदूक चलाना सिखा रहे थे। शनिवार को लौटे वायु विहार निवासी 22 वर्षीय विवेक चौधरी ने ये बातें बताईं।
तिरंगा बना आन-बान-शान, बची जान
यूक्रेन से भारतीय छात्रों की वतन वापसी के लिए भारत का सिर्फ मानवीय सहयोग ही नहीं मिल रहा है, बल्कि देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी छात्रों का साथ दे रहा है। एमबीबीएस के प्रथम वर्ष के छात्र आबिद अली ने हाथों से बने तिरंगे के साथ हॉस्टल से लेकर लवीव रेलवे स्टेशन तक पैदल मार्च किया। इस सफर में उनके साथ अन्य 200 भारतीय छात्र भी मौजूद रहे। तिरंगा हाथ में होने पर यूक्रेनी सैनिकों ने छात्रों को रेलवे स्टेशन तक सुरक्षित रास्ता मुहैया करवाया।
मूलरूप से उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के रहने वाले आबिद अली ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले ही वीएन कराजीन यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस में दाखिला लिया था। रूस की ओर से यूक्रेन में युद्ध छिड़ने पर सभी छात्रों के आगे जान बचाने का संकट था। भारत आने के लिए छात्रों को हॉस्टल से लवीव रेलवे स्टेशन तक पहुंचना था। लेकिन, कई बार प्रयास करने के बाद भी जब कैब नहीं मिली तो छात्रों ने पैदल ही सफर करने का निर्णय लिया।
छात्रों ने कागज पर तैयार किया तिरंगा
पैदल निकलने के लिए छात्रों ने अपने साथ तिरंगा रखने का फैसला लिया था। लेकिन, दुर्भाग्य था कि सभी के पास तिरंगा नहीं था। इसके लिए छात्रों ने कागज पर तिरंगा बनाना शुरू किया। तिरंगा बनाने के बाद छात्र सड़कों पर एक साथ निकल गए। डेढ़ घंटे के पैदल सफर में तिरंगा छात्रों के सीने से लगा रहा व मुंह से निकल रहे भारत माता की जय के नारे डर की जंजीर को तोड़ने का काम कर रहे थे।
माइकोलेइव में फंसे 21 भारतीय नाविक
यूक्रेन के माइकोलेइव बंदरगाह पर भारत से गया एक व्यावसायिक जहाज फंसा हुआ है। इसके चालक दल में 21 भारतीय नाविक हैं। जहाज की प्रबंधन एजेंसी वीआर मेरिटाइम के संस्थापक और सीईओ संजय पाराशर ने बताया कि ये सभी सुरक्षित हैं और अपने परिवारों के साथ नियमित संपर्क में हैं। पाराशर ने बताया कि भारतीय जहाज के साथ ही बंदरगाह पर 24 अन्य जहाज भी फंसे हैं।
संकट : बर्फ उबाल प्यास बुझा रहे यूपी के छात्र
यूक्रेन के सुमी में 800 भारतीय छात्र अभी भी फंसे हैं। उनके पास न राशन है, न पानी। उनके पास रात में गिरी बर्फ को उबालकर अपने सूखे कंठों को तर करने की मजबूरी है। सुमी राज्य विश्वविद्यालय में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले लखनऊ के राहुल सिंह व बुलंदशहर के अनुज कुमार ने बताया कि वे विश्वविद्यालय के हॉस्टल में फंसे हुए हैं। पेयजल का संकट हो गया है। बर्फबारी हो रही है, उस बर्फ को उबाल कर छात्र पानी पी रहे हैं। खाने में न तो ब्रेड है, न ही अन्य खाद्य पदार्थ। यहां सूमी में कुछ स्वयंसेवी संगठन काम कर रहे हैं, लेकिन उनके पास भी सीमित राशन है। अनुज ने बताया कि सूमी से पोलैंड का बॉर्डर हजार किलोमीटर दूर है। जबकि यहां से रूस की सीमा सिर्फ 50 किमी दूर है। भारत सरकार अगर रूस से बात करे तो हम रूसी सीमा पर जाकर आसानी से भारत लौट सकते हैं।
कोई 30 घंटे ट्रेन में खड़ा रहा किसी ने ब्रेड-पानी के सहारे रास्ता काटा
यूक्रेन से शनिवार को स्वदेश लौटे छात्रों के चेहरों पर सुकून दिखा। यूक्रेन में इनमें से किसी ने 30 घंटे ट्रेन में खड़े होकर, तो कई छात्रों ने तो सिर्फ ब्रेड खाकर और पानी पीकर सफर तय किया। हाथरस के आवास-विकास कॉलोनी निवासी आशीष ने बताया कि उसने बुुखार में सफर तय किया।
यूनिवर्सिटी ने युद्ध शुरू होने से पहले नहीं आने दिया
जिले के तीन मेडिकल विद्यार्थी शनिवार को स्वदेश लौट आए। सिसवा कस्बे की हुस्नआरा सुबह दिल्ली से बस से अपने घर पहुंच गईं। उसने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की थी कि छात्र घर लौट जाएं, लेकिन यूनिवर्सिटी ने छात्रों को आश्वासन देकर रोके रखा कि युद्ध नहीं होगा। युद्ध शुरू हो गया और उड़ानें निरस्त कर दी गईं। यूनिवर्सिटी ने बस से सीमा से आठ किलोमीटर पहले छुड़वा दिया। बाकी दूरी पैदल चल कर पूरी की।
नवीन की मौत के बाद सहम गए छात्र
मुजफ्फरनगर के जीवना गांव की दिव्यांशी बालियान ने बताया कि कर्नाटक के नवीन को गोली लगने की सूचना मिली तो छात्र बदहवास और असहाय स्थिति में थे। किसी तरह पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचे। बॉर्डर पर खड़े-खड़े ही सूरज डूबा और यहीं खड़े-खड़े सूरज निकल भी आया। यह बेहद मुश्किलों भरा था।
सात लाख में की बस, तब रोमानिया सीमा पर पहुंचे : एटा। मारहरा के ईओ की पुत्री समेत तीन विद्यार्थी स्वदेश लौट आए। उन्होंने बताया कि सात लाख रुपये में किराये पर बस करके रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे। चार दिन वहां शरणार्थी शिविर में बिताने पड़े। वतन आकर कई दिन बाद सुकून महसूस किया।
आश्वासन के बाद रुके छात्र, भारत के राजदूत ने उनके साहस को सराहा
यूक्रेन में भारत के राजदूत पार्थ सतपति ने भारतीयों को भरोसा दिलाया है कि सभी को यूक्रेन से निकाला जाएगा। उन्होंने ट्विटर के जरिये दिए संदेश में कहा, पिछले दो सप्ताह सभी के लिए डरावने और चुनौतीपूर्ण रहे हैं। शायद ही कोई इस तरह के विनाश का गवाह बना हो। भारतीय नागरिकों, खासकर युवाओं की परिपक्वता और साहस पर गर्व है कि वे इस कठिन समय में बहादुरी के साथ वहां रुके हैं।
दूतावास भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी में कोई भी कसर नहीं छोड़ेगा। छात्रों ने इस कठिन समय में अतुलनीय साहस और संकल्प दिखाया है। कुछ समय के लिए थोड़ा और धैर्य व साहस रखें, ताकि सबकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। छात्रों ने बहुत कुछ झेला है। सबको घर ले जाएंगे।
असल में सतपति का यह बयान सुमी में फंसे भारतीय छात्रों के एक वीडियो के बाद आया। वीडियो में कहा गया था कि वे रूसी सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। उनके साथ कोई हादसा होता है, तो भारत सरकार और यूक्रेन का भारतीय दूतावास जिम्मेदार होगा। हालांकि, बाद में दूतावास के आश्वासन के बाद छात्रों ने सुमी शहर नहीं छोड़ा है।
सतपति ने बताया कि बीते सात दिन में यूक्रेन से 10,000 से अधिक भारतीय छात्रों को निकाला जा चुका है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सुमी को छोड़कर यूक्रेन के बाकी हिस्सों से लगभग सभी भारतीयों को निकाला जा चुका है। इसी सिलसिले में विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर बताया कि खारकीव से सभी भारतीयों लोगों को निकाला जा चुका है। फिलहाल सुमी में फंसे छात्रों
को निकालने के प्रयास जारी हैं।
सतपति ने बताया कि पीसोचिन में फिलहाल 300 भारतीय फंसे हैं, जिन्हें निकाला जा रहा है। तमाम बाधाओं के बाद भी पिसोचीन में खाने-पानी की आपूर्ति की जा रही है।