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दिल्ली मेट्रो अब कोच बढ़ाने नहीं बल्कि फ्रीक्वेंसी और रफ्तार पर फोकस करेगी। फेज एक और दो में सामने आई दिक्कतों को देखते हुए मुकुंदपुर से शिव विहार और बॉटेनिकल गार्डन से जनकपुरी वेस्ट के बीच चलने वाली दोनों नई लाइनों से फ्रीक्वेंसी और स्पीड की शुरुआत होगी।
इसके लिए दोनों लाइनों के ट्रैक से लेकर प्लेटफॉर्म तक को नई तकनीक से तैयार किया जा रहा है, ताकि सिग्नल व कोच की संख्या बाधा न बन सके।
डीएमआरसी की योजना फेज तीन में ट्रेन बिना ड्राइवर के दौड़ाने की है। इसमें ट्रेन सीबीटीसी (कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल) तकनीक से चलेंगी।
...तो और जल्दी-जल्दी मिलेगी मेट्रो!
इस तकनीक के तहत प्लेटफॉर्म से लेकर स्टेशन की दूरी व स्पीड सभी सेट होगी, जिसकी मदद से ट्रेन सीधे प्लेटफॉर्म के गेट पर रुका करेगी। इसको प्रयोग में लाने से पहले मेट्रो प्रबंधन नई लाइन को सिग्नल फ्री भी करेगा।
डीएमआरसी ने आठ कोच की मेट्रो उतारी थी, लेकिन उसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। अब फ्रीक्वेंसी बढ़ाने के लिए डीएमआरसी छह कोच की मेट्रो चलाएगी।
अब योजना यह है कि स्टैंडर्ड गेज की लाइन पर मेट्रो ज्यादा तेज स्पीड़ में चल सकेगी और फ्रीक्वेंसी बढ़ाने से यात्रियों को जल्दी-जल्दी मेट्रो मिल सकेगी। वही, डीएमआरसी फरीदाबाद-कश्मीरी गेट, इंद्रलोक से मुंडका के बीच भी छह कोच की ट्रेन में स्पीड व फ्रीक्वेंसी बढ़ाएगा।
जानिए इसकी खास बातें:
- स्पीड एवरेज 35-36 से बढ़ाकर 39-40 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
- पैंटाग्राफ अभी छह कोच में दो होते हैं, लेकिन अब ट्रेनों में तीन होंगे।
- दोनों लाइन स्टैंडर्ड गेज की बनाई जा रही हैं। दुनिया की सभी मेट्रो स्टैंडर्ड गेज ट्रैक पर ही चलती हैं।
फ्रीक्वेंसी व स्पीड पर रहेगा जोर
डीएमआरसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (कम्युनिकेशन) अनुज दयाल ने बताया कि जनकपुरी वेस्ट से बॉटेनिकल गार्डन और मुकुंदपुर से शिव विहार के बीच चलने वाली लाइनों में छह कोच ही होंगे।
दिल्ली मेट्रो का मुख्य मकसद फ्रीक्वेंसी व स्पीड बढ़ाने पर रहेगा, ताकि यात्रियों को कम समय में अधिक ट्रेन की सुविधा हो और वे अपने गंतव्य पर जल्दी पहुंच सकें। उसी के आधार पर दोनों नई लाइनों को तैयार किया जा रहा है।