कोरोना संकट: पूरी दिल्ली में केवल एक वेंटीलेटर बेड खाली, आईसीयू बेड्स भी पर भी भारी दबाव
- कोरोना मरीजों की रिकॉर्ड संख्या के कारण किसी भी अस्पताल में आईसीयू वेंटीलेटर बेड खाली नहीं
- भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी- ऑक्सीजन गैस सिलेंडर की कीमत तय करने की मांग
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चिंता जाहिर की थी कि अगर राजधानी में कोरोना के मामले इसी तरह बढ़ते रहे तो दिल्ली का स्वास्थ्य ढांचा बिगड़ सकता है। उनकी बात सच साबित होती दिख रही है। इस समय पूरी दिल्ली में कोविड 19 मरीजों के लिए केवल एक वेंटीलेटर आईसीयू बेड खाली है। 1472 आईसीयू बेड्स (वेंटीलेटर सहित) में से केवल एम्स ट्रामा सेंटर में एक बेड खाली है, बाकी सभी निजी-सरकारी अस्पतालों के सभी बेड्स भर चुके हैं।
यही हाल आईसीयू बेड्स (वेंटीलेटर के बिना) का भी है। दिल्ली कोरोना (Delhi Corona) पर शुक्रवार शाम चार बजे उपलब्ध जानकारी के अनुसार राजधानी के अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए इस तरह के 3118 बेड्स हैं, लेकिन इनमें केवल 38 बेड ही खाली बचे हैं। समान्य बेड्स पर भी दबाव बढ़ रहा है। सामान्य बेड्स की संख्या बढ़कर 20,344 तक पहुंच चुकी है, लेकिन इनमें केवल 1911 बेड्स ही रिक्त रह गये हैं। हालांकि, इसी दौरान नॉन-कोविड मरीजों के लिए 1154 आईसीयू बेड्स में से 274 बेड्स अभी भी खाली हैं।
टेस्ट की संख्या में आई कमी
राजधानी में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग टेस्ट कराने के लिए भी सामने आ रहे हैं, लेकिन लोगों को टेस्ट रिपोर्ट पाने में चार-पांच दिन तक का इंतज़ार करना पड़ रहा है। अब प्रशासन ने केवल बेहद गंभीर लक्षण दिखने वाले लोगों का ही RT-PCR टेस्ट कराने का निर्णय किया है। इससे राजधानी में कोरोना टेस्ट की कुल संख्या में कमी आ गई है।
एक हफ्ते पहले तक राजधानी में एक लाख से ज्यादा टेस्ट किये जा रहे थे, लेकिन गुरुवार को केवल 72,208 टेस्ट ही किये गये। इसके पहले 21 अप्रैल को 78,768 टेस्ट किये गये थे। टेस्ट घटाने की इस सोच पर विपक्ष ने हमला किया है। भाजपा ने कहा है कि सरकार टेस्ट कम करके कोरोना आंकड़ों की संख्या छिपाने की कोशिश कर रही है।
भाजपा ने कहा, तय हो ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत
दिल्ली भाजपा नेता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि राजधानी में लोगों की सांसों के साथ सौदा किया जा रहा है। ऑक्सीजन का एक सिलेंडर जिसकी सामान्य कीमत दो हजार रुपये से भी कम कीमत होती है, उसे राजधानी में कहीं 10 हजार रुपये तो कहीं इससे भी ज्यादा कीमत पर कालाबाजारी हो रही है। इससे गरीब लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पा रही है और लोगों की जान जा रही है।
प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि दिल्ली सरकार को राजधानी में कहीं भी ऑक्सीजन गैस सिलेंडर बेचने की एक अधिकतम कीमत तय कर देनी चाहिए, ताकि इसकी ब्लैक मार्केटिंग न की जा सके। उन्होंने कहा कि अनेक जगहों पर दवाएं और अन्य जरूरी चीजों के भी ऊंची कीमतों पर बेचने की शिकायत आ रही है, सरकार को इस पर नियंत्रण करना चाहिए। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र भी लिखा है।