महिलाओं से बेरुखी देखनी है तो इस सीट पर नजर डालिए॔
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजनीतिक पार्टियां भले ही महिलाओं को बराबरी का हक देने की बात करती हों लेकिन जब उनकी खुद की बारी आती है तो पैमाना बदल जाता है। फरीदाबाद लोकसभा सीट पर अब तक महिलाओं को राजनीतिक पार्टियों एवं वोटरों दोनों की ओर से जबरदस्त बेरुखी का सामना करना पड़ा है।
वर्ष 1977 से अब तक इस शहर ने 10 आम चुनाव देखे हैं। जिनमें से सिर्फ तीन में पांच महिला प्रत्याशी खड़ी हुईं। वह भी किसी प्रमुख पार्टी ने टिकट नहीं दी। जबकि अब तक 179 पुरुष चुनाव लड़ चुके हैं।
ऐसे में समझा जा सकता है कि इस सीट पर महिलाओं को जरा भी तवज्जो नहीं मिली। इस सीट पर जिन महिलाओं ने चुनाव लड़ने की हिम्मत दिखाई उन्हें वोटरों ने निराश किया। जबकि लगभग आधे वोट महिलाओं के ही हैं।
इन पांच महिलाओं में से किसी को एक फीसदी वोट भी नहीं मिले। उनके वोटों का आंकड़ा एक हजार तक भी नहीं पहुंच सका, यानी सबकी जमानत जब्त हुई। भाजपा की टिकट पर बड़खल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकीं सीमा त्रिखा का कहना है कि पुरुषवादी समाज में महिलाओं को इसलिए टिकट कम मिलते हैं क्योंकि पुरुषों को उनसे हमेशा अपने अस्तित्व का खतरा सताता रहता है।
हरियाणा महिला कल्याण समिति की अध्यक्ष एवं दर्शनशास्त्री आलोकदीप का कहना है कि महिला विंग तो हर पार्टी में है, लेकिन सिर्फ वही महिलाएं आगे बढ़ पा रही हैं जिनके पति, पिता राजनीति में हैं या फिर उनका कोई आका है। फरीदाबाद में जिन पांच महिलाओं ने चुनाव लड़ा उन्हें इसलिए वोट नहीं मिले क्योंकि वह बड़ी पार्टियों से नहीं थीं और समाज में उनकी कोई विशेष पहचान नहीं थी।
|
अब तक के चुनावों में महिलाओं की स्थिति |
||||
|
चुनाव वर्ष |
प्रत्याशी |
पार्टी |
वोट |
प्रतिशत |
|
2009 |
लता रानी |
एसपी |
972 |
0.16 |
|
2009 |
रेखा सिंह |
एसबीपी |
922 |
0.15 |
|
1998 |
सुमित्रा |
निर्दलीय |
800 |
0.09 |
|
1998 |
पूनम सिंह |
एजेबीपी |
673 |
0.07 |
|
1996 |
संतोष |
निर्दलीय |
645 |
0.08 |
* एसपी: समाजवादी पार्टी। * एसबीपी: समस्त भारतीय पार्टी। * एजेबीपी: अजेय भारत पार्टी।
(स्रोत: चुनाव आयोग)