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'केवल सिंदूर भरने मात्र से ही नहीं मिल जाता पत्नी का दर्जा'

Tue, 13 Sep 2016 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 13 Sep 2016 12:04 AM IST
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'Only fill the Vermilion means didn't gave the status of wife.'
कोर्ट - फोटो : file photo

पहले पति के रहते अगर कोई व्यक्ति महिला की मांग में सिंदूर डाल देता है, तो इस आधार पर महिला को कैसे पत्नी का दर्जा दिया जा सकता है। 

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हाईकोर्ट ने उक्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में आश्चर्य यह भी है कि पहले पति की मौजूदगी में ही सिंदूर लगाया गया था। अदालत ने कहा कि महिला या उसके बच्चे कथित दूसरे पति से गुजाराभत्ता पाने के हकदार नहीं हैं।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने महिला द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं है कि प्रतिवादी बनाए गए व्यक्ति व महिला के बीच पति-पत्नी के संबंध थे। 

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लगातार बयान बदलती रही महिला

'Only fill the Vermilion means didn't gave the status of wife.'
कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

कोर्ट ने कहा कि विवाह के लिए समारोह आयोजित किया जाता है। इस मामले में ऐसा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि स्वयं महिला ने माना है कि उसका पहले से विवाह हो चुका था और प्रतिवादी ने उसके पति के सामने ही वर्ष 1994 में उसकी मांग भरी थी, यह तथ्य आश्चर्य करने वाला है। 

मात्र सिंदूर भरने के तर्क पर उसे पत्नी का दर्जा नहीं माना जा सकता। अदालत ने महिला व उसके चार बच्चों के गुजारे के लिए भत्ता प्रदान करने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया।

बयान बदलती रही महिला
अदालत ने कहा कि यह तथ्य भी विरोधाभासी है कि पहले महिला ने वर्ष 2004 में दायर याचिका में प्रतिवादी से दो बच्चे बताते हुए उनके व अपने लिए गुजाराभत्ता मांगा।  इसके बाद जिरह में कहा कि उसके तीन बच्चे हैं, लेकिन 24 अप्रैल 2008 को चार बच्चे होने का तर्क रख दिया। 

जानिए क्या है पूरा मामला

'Only fill the Vermilion means didn't gave the status of wife.'

प्रतिवादी ने पति-पत्नी के रिश्तों से इंकार करते हुए बच्चों का पिता होने से भी इंकार किया और डीएनए टेस्ट की मांग की। आखिर में महिला ने कहा कि उसके साथ रेप किया गया था।

महिला के मुताबिक, क्या है पूरा मामला
पेश मामले में महिला ने कहा कि वह वर्ष 1989 में पति के साथ दिल्ली आई और प्रतिवादी के घर किराए पर रहना शुरू किया। पति की गैर-मौजूदगी में प्रतिवादी ने उससे शारीरिक संबंध बनाए और लोगों को उसकी पहचान अपनी दूसरी पत्नी के रूप में करवाने लगा। 

उसके पति ने आपत्ति जताई तो वह रोजाना पति को शराब व मीट देने लगा। इससे उसकी मारुति उद्योग से नौकरी ही छूट गई। 

वर्ष 1994 में पति के सामने प्रतिवादी ने उसकी मांग में सिंदूर भर दिया और प्रति माह चार हजार रुपये खर्च के लिए देने लगा। बाद में खर्च बंद कर दिया अत: उसे गुजाराभत्ता दिलवाया जाए।

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