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असहाय दर्द में एम्स के बाहर बीत गए 10 महीने, किसी ने नहीं ली मासूम की सुध

Fri, 08 Apr 2016 04:58 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 08 Apr 2016 04:58 PM IST
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one year on and 12 year old still waiting for his turn in aiims for surgery
एम्स के बाहर राहुल - फोटो : TOI

कहने को कल विश्व स्वास्थ्य दिवस था 12 साल के मासूम राहुल का इंतजार इस दिन भी खत्म नहीं हुआ। बेघर राहुल पिछले 10 महीने से एक ही इंतजार में है कि कब उसकी सर्जरी हो और कब उसे अपनी पीठ की गांठ से होने वाले दर्द से मुक्ति मिले।

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अब तो एम्स के बाहर एक-एक घंटे गिनना कि कब उसे अस्पताल में दाखिला मिलेगा इसकी आदत पड़ गई है। पीठ में फोड़े के कारण होने वाले दर्द को जो चीज और बढ़ा देती है वो है सर्जरी के लिए लंबा इंतजार और अस्पताल में बेड न मिलना। वो एम्स के बाहर फुटपाथ पर रोज अपनी सर्जरी की डेट मिलने का ‌इंतजार कर रहा है।
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टाइम्स ऑफ इंड‌िया की एक खबर के अनुसार राहुल का दर्द यहीं खत्म नहीं होता उसका परिवार भी उसके इस दुख से बेहद परेशान है। उसके माता-पिता का काम भी छूट गया है। उनका दावा है कि उन्होंने अप्रैल 2015 में राहुल के ऑपरेशन के लिए 15000 रुपए जोड़े थे और उसके चाचा ने जुलाई में होने वाले उसके ऑपरेशन के लिए खून तक का इंतजाम कर लिया था।

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चूहों ने राहुल को इतना काटा क‌ि उसकी पैर की अंगुल‌ियों में हो गया इंफेक्शन

one year on and 12 year old still waiting for his turn in aiims for surgery
राहुल के माता-पिता की वो सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं क्योंकि उसका ऑपरेशन अस्पताल में बेड की कमी के कारण नहीं हो सका और आज तक राहुल इंतजार ही कर रहा है। कुछ समय के लिए उसके माता-पिता उसे गुड़गांव ले गए ताकि वो काम दोबारा शुरू कर सकें लेकिन चूहों ने राहुल को इतना काटा कि उसके पैर की अंगुलियों में इंफेक्शन हो गया।

अपने दर्द से राहुल कभी-कभी ‌इतना मजबूर हो जाता है कि वो अपने कपड़ों में मिट्टी लगा लेता है क्योंकि काफी कमजोर होने के चलते उस दर्द से राहत पाने के लिए वो कहीं घूमने भी नहीं जा सकता।

इसी 5 अप्रैल को राहुल के डॉक्टर, डॉ. मनमोहन सिंह ने सलाह दी थी कि, 'इस मरीज को अस्पताल में भर्ती किया जाए जो एक साल से सर्जरी का इंतजार कर रहा है।' तब से ही राहुल के माता-पिता एम्स के नाइट शेल्टर में रहने लगे हैं लेकिन राहुल अब भी फुटपाथ पर ही रह रहा है।
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