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Delhi: बाणों से पहले रावण पर महंगाई की चौतरफा बमबारी, पुतला बनाने में लगने वाली हर सामग्री महंगी
Sat, 17 Sep 2022 09:31 AM IST
विजय पुंडीर
दीपक सिंह नेगी, नई दिल्ली
दीपक सिंह नेगी, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Sat, 17 Sep 2022 09:31 AM IST
सार
रावण के पुतलों के लिए मशहूर तितारपुर में दो साल बाद फिर हलचल है। दशहरे के लिए यहां बीते एक माह से रावण के पांच से पचास फीट तक के पुतले बन रहे हैं। कारीगरों में दशहरे को लेकर उत्साह है लेकिन उम्मीदन मांग न आने से उनमें मायूसी भी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बांस काटकर उससे रावण के पुतले को आकार देता सन्नी पुतले की मजबूती को परखने के बाद अरारोट से बांस पेपर लगाते हुए बताते हैं कि कोरोना के बाद इस बार राम जी से पहले महंगाई ने रावण पर हमला कर दिया है।
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इस बार हर सामान महंगा हुआ है, नतीजा पुतले की कीमत पर भी असर पड़ा है, तभी पहले जैसे ऑर्डर नहीं मिल रहे जबकि एक महीने से पुतले बना रहे हैं...। कहानी सिर्फ सन्नी की नहीं, पुतला बनाने वाले सभी कारीगरों की दिखी, जो तितारपुर में रावण का पुतला बना रहे हैं।
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रावण के पुतलों के लिए मशहूर तितारपुर में दो साल बाद फिर हलचल है। दशहरे के लिए यहां बीते एक माह से रावण के पांच से पचास फीट तक के पुतले बन रहे हैं। कारीगरों में दशहरे को लेकर उत्साह है लेकिन उम्मीदन मांग न आने से उनमें मायूसी भी है। कारीगर अजय बताते हैं कि इस बार पुतले के निर्माण में लगने वाले बांस, वाटर प्रूफ खाकी पेपर, कलर पेपर, अरारोट और तार आदि की कीमत 2019 के मुकाबले दोगुनी से अधिक बढ़ गई है। इससे पुतले की कीमत में भी डेढ़ से दोगुना वृद्धि हुई है। कारीगर पवन बताते हैं कि इसी पुश्तैनी काम के सहारे उनका परिवार चलता है लेकिन दो साल काम नहीं होने के कारण हालात सही नहीं हैं। हर साल करीब 50 पुतले बनाते हैं लेकिन अभी तक सिर्फ 12 पुतलों की ही बुकिंग हुई है।
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पंजाब, यूपी और एमपी से भी आए ऑर्डर
तितारपुर की पुतला मंडी से दिल्ली के प्रमुख स्थलों पर रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले जाते हैं। इस बार यहां बंगलूरू, पंजाब, मध्यप्रदेश सहित यूपी के कई हिस्सों से पुतलों के ऑर्डर आए हैं।
पांच से सात दिन में बनता है एक पुतला
कारीगर पवन बताते हैं कि एक पुतला बनाने में पांच से सात दिन का समय लग जाता है। बड़े पुतलों के मुकाबले छोटे पुतलों में ज्यादा बारीकी से काम करना पड़ता है। अमूमन उनके यहां 30 फीट के पुतले ज्यादा बनते हैं। इसे बनाने में 40 बांस, 25 किलो खाकी कागज, 30 किलो रंगीन कागज, 10 किलो अरारोट और तीन किलो तार लग जाता है। मजदूरी और अन्य खर्च जोड़ दें तो एक पुतले को बनाने में 25 हजार से अधिक का खर्च आता है।