दिल्ली में स्पेशल-26: पुलिसवाले बन करते लूट, स्पा-मसाज सेंटर को बनाते निशाना; काजग के टुकड़े ने पहुंचाया जेल
पुलिस की पूछताछ में आरोपी शानू ने बताया कि ये उन लोगों को निशाना बनाते थे, जो लोग अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं। पहले ऑन लाइन या जस्ट डायल के जरिये स्पा और मसाज सेंटर का पता लगाते थे। वहां पर नकली ग्राहक भेजकर पता किया जाता था कि वहां कुछ गड़बड़ी चल रही है या नहीं।
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बॉलीवुड मूवी स्पेशल-26 की तर्ज पर लूटपाट करने वाले एक गिरोह का शाहदरा जिला के स्पेशल स्टाफ ने खुलासा किया है। आरोपी नकली पुलिसकर्मी बनकर स्पा और मसाज सेंटर पर छापेमारी करते थे। पुलिस ने इस संबंध में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से पुलिस की वर्दी, वायरलेस सेट, फर्जी आईकार्ड, सायरन लगी बाइक व अन्य सामान बरामद हुआ है।
आरोपियों की पहचान मास्टर माइंड जिशान उर्फ शानू, अमजद और इमरान उर्फ पहलवान के रूप में हुई है। इनकी गिरफ्तारी से पुलिस ने सीमापुरी इलाके में लूटपाट की दो वारदातों को सुलझाने का दावा किया है। आरोपियों ने खुलासा किया है कि ये लोग करीब एक साल से इसी तरह वारदात को अंजाम दे रहे हैं।
शाहदरा जिला के पुलिस उपायुक्त रोहित मीना ने बताया कि 25 नवंबर को सीमापुरी इलाके के एक स्पा सेंटर में पांच लोग खुद को पुलिसकर्मी बताकर जबरन घुस गए। कुछ लोगों ने पुलिस की वर्दी भी पहनी हुई थी। इन लोगों ने पीड़ित को बुरी तरह पीटा। इनका आरोप था कि वह स्पा सेंटर में अवैध गतिविधियों में शामिल है। डरा-धमकाकर आरोपियों ने पीड़ित से 33 हजार रुपये, दो मोबाइल फोन और अन्य सामान लूट लिया।
इसी तरह 22 नवंबर को दिलशाद कॉलोनी में भी वारदात को अंजाम दिया गया। यहां से आरोपी 50 हजार रुपये और अन्य सामान लूटकर फरार हो गए। दोनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। लोकल पुलिस के अलावा जिले के स्पेशल स्टाफ इंस्पेक्टर विकास कुमार व अन्यों की टीम को जांच में लगाया गया। सीसीटीवी कैमरा और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से पुलिस ने मुख्य आरोपी जिशान उर्फ शानू की पहचान कर ली। पुलिस ने आरोपी को मौजपुर, घोंडा से दबोच लिया। बाद में उसके दोनों साथियों को दबोच लिया गया।
घटना स्थल पर गिरे पेपर की वजह से पकड़े गए
मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर विकास कुमार ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि आरोपियों ने दोनों ही वारदातों में लाल रंग की सायरन लगी बाइक का इस्तेमाल किया था। 22 नवंबर वाली घटना की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपियों के पास मौजूद एक फाइल से एक पेपर घटना स्थल पर गिर गया था। पुलिस ने उस पेपर की पड़ताल की तो वह पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (पीसीसी) की फोटो कॉपी थी। इसका अप्रैल 2023 में ऑन लाइन आवेदन किया गया था। रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस आवेदनकर्ता के पास पहुंची तो उसने बताया कि पेपर उसने मौजपुर के रहने वाले शानू को दिया था। शानू ने उससे कहा था कि वह पीसीसी दिलवाने में उसकी मदद करेगा। इसके बाद पुलिस गैंग लीडर शानू तक पहुंच गई। वह अनपढ़ है और वेल्डिंग का काम करता था। उसने अपने दोस्त जुबैर के जरिये पुलिस की वर्दी मंगाई थी।
ऐसे दिया जाता था वारदात को अंजाम...
पुलिस की पूछताछ में आरोपी शानू ने बताया कि ये उन लोगों को निशाना बनाते थे, जो लोग अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं। पहले ऑन लाइन या जस्ट डायल के जरिये स्पा और मसाज सेंटर का पता लगाते थे। वहां पर नकली ग्राहक भेजकर पता किया जाता था कि वहां कुछ गड़बड़ी चल रही है या नहीं। ग्राहक का इशारा मिलते ही नकली पुलिस अपने काम के लिए तैयार हो जाती थी। शानू नकली एसआई जाकिर खान बनता था। इमरान, अशोक राणा नाम से सिपाही बनता था। असली पुलिस लगने के लिए वॉकी-टॉकी, फर्जी आईकार्ड, पुलिस की वर्दी, कैप, पुलिस का लोगो लगा मास्क, मोजे और दूसरे सामान का इस्तेमाल किया जाता था। वारदात स्थल पर पहुंचकर आरोपी असली रेड का भ्रम फैलाकर वहां मौजूद लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे। अवैध गतिविधियों में शामिल होने के कारण कोई इनकी पुलिस से शिकायत भी नहीं करता था।