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ट्रेन में हार्टअटैक से बुजुर्ग की मौत, समय पर मिलता इलाज तो बच जाती जान
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 16 Feb 2017 12:07 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बांद्रा टर्मिनस से कालका जा रही पश्चिम एक्सप्रेस में सफर के दौरान एक बुजुर्ग यात्री को मथुरा स्टेशन पर इलाज न मिल पाने के कारण अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। सूचना मिलने पर गाड़ी को ओल्ड स्टेशन पर रोककर मरीज की जांच की गई तो डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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यात्री अपने परिवार के साथ मुंबई से चंडीगढ़ जा रहा था। ट्रेन को अटेंड करने पहुंचे आरपीएफ और रेलवे अधिकारियों ने लिखा पढ़ी कर ट्रेन को दिल्ली के लिए रवाना कर दिया। क्योंकि परिजन ओल्ड स्टेशन नहीं उतरना चाह रहे थे। इस बारे में आगरा मंडल के डीसीएम नवीन भटनागर का कहना है कि डॉक्टर जब तक अटेंड करने पहुंचा ट्रेन छूट चुकी थी।
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जानकारी के अनुसार 61 वर्षीय बुजुर्ग यात्री मंगल सिंह 12925 पश्चिम एक्सप्रेस के बी-5 कोच में अपने परिवार के साथ बुधवार को सफर कर रहे थे। मथुरा स्टेशन से पहले वह शौच के लिए गए तभी उन्हें हार्टअटैक आ गया और वह शौचालय में ही गिर गए।
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मंगल सिंह के बेटे तनविंदर सिंह ने बताया कि इसकी सूचना तत्काल कोच कंडक्टर शेख इरफान को दी गई। कोच कंडक्टर ने सुबह 8:22 बजे आगरा फोर्ट कंट्रोल को सूचना दी। परिजनों का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी मरीज को मथुरा में अटेंड नहीं किया गया।
मथुरा स्टेशन पर रुकी थी ट्रेन
यदि समय पर प्राथमिक उपचार मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी। टीटीई शेख इरफान का कहना था कि सूचना देने पर उनसे कहा गया कि मथुरा में इस वक्त कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीज को अटेंड नहीं किया जा सकता। ट्रेन मथुरा से फरीदाबाद के लिए रवाना हो गई।
सूचना पर आरपीएफ एएसआई सतीश कुमार, स्टेशन अधीक्षक केसी मीना, रमन शर्मा आरपीएफकर्मी मनोज कुमार ने सुबह 10:16 बजे प्लेटफार्म नंबर 2 पर पहुंचकर कोच को अटेंड किया और मौके पर डॉक्टर को बुलाया।
डॉ. राजेश सबरवाल ने मरीज की जांच कर उसे मृत घोषित कर दिया। कोच में सफर कर रहे अन्य यात्रियों का कहना था कि यदि मथुरा में यात्री को समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। लेकिन रेलवे ने सूचना को गंभीरता से नहीं लिया।
सूचना पर आरपीएफ एएसआई सतीश कुमार, स्टेशन अधीक्षक केसी मीना, रमन शर्मा आरपीएफकर्मी मनोज कुमार ने सुबह 10:16 बजे प्लेटफार्म नंबर 2 पर पहुंचकर कोच को अटेंड किया और मौके पर डॉक्टर को बुलाया।
डॉ. राजेश सबरवाल ने मरीज की जांच कर उसे मृत घोषित कर दिया। कोच में सफर कर रहे अन्य यात्रियों का कहना था कि यदि मथुरा में यात्री को समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। लेकिन रेलवे ने सूचना को गंभीरता से नहीं लिया।