उबर-ओला के ड्राइवर पहले कमा रहे थे लाखों, अब गुजारा करना भी हो रहा मुश्किल
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बीते रविवार की रात दिल्ली के वसंत विहार इलाके में तेज रफ्तार बीएमडब्लयू ने उबर टैक्सी को जोरदार टक्कर मारी जिसमें कार चालक की मौत हो गई थी। उबर कैब चला रहे तीस वर्षीय नसरुल इस्लाम का काम पर पहला ही दिन था। अब उनके पीछे उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं और अब परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है।इस घटना ने उबर ड्राइवरों को मिलने वाली घटनाओं की कलई खोल दी है।
श्रीनिवासन ने् अपनी गाड़ी को ही अपना घर बना लिया है। सोने से लेकर ब्रश करने तक का सारा सामान उनकी टोयोटा एटिओस में ही रखा रहता है। उनका कहना है कि- " मैं 18 घंटे गाड़ी चलाने के बाद अपनी गाड़ी मे ही सो जाता हूं। मैं सुवह जल्दी उठ जाता हूं जिससे अपने बिलों की पेमेंट कर सकूं।" श्रीनिवासन पिछले ढाई साल से उबर के लिए टैक्सी चला रहे हैं।
उबर ने उनको एक नई तरीके की जिंदगी का प्रलोभन दिया था। टैक्सी चलाने के शुरुआती दिनों में श्रीनिवासन एक महीने में 70 हजार से एक लाख तक कमाते थे। अभी उन्होंने घर बनाने कि लिए लोन भी ले रखा है, साथ ही उनकी बेटी बेंगलुरु के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ती है। उबर ने् इसी तरीके के लुभावने झांसे कई ड्राइवरों को दिये थे।
ओला की तरह ही उबर ने धीरे-धीरे ड्राइवरों के लिए गुजारा करना मुश्किल कर दिया है। श्रीनिवासन की मासिक आमदनी में 40 से 50 हजार तक की गिरावट आई है। ऐसे ही हालत उनके जैसे अन्य ड्राइवरों की भी है।
अलग-अलग शहरों में हो रहे हैं प्रदर्शन
अपनी आमदनी पर पड़े असर के चलते बेंगलुरु में लोगों ने प्रदर्शन भी किया। ऐसे ही हड़ताल ड्राइवरों द्वारा हैदराबाद में की गई। इसी तरह अपनी शिकायतों को लेकर हजारों ड्राइवर चंडीगढ़ में भी सड़कों पर उतरे थे।
ड्राइवरो के बीच इस असंतोष से कंपनियों पर भारी दबाव बनने लगा है। कंपनियों के सामने एक तरफ अपनी बातों पर मजबूत ड्राइवर यूनियनें है तो दूसरी तरफ टैक्सी नियमन को लेकर कानूनी दांव-पेंच।
बेंगलुरु शहर में यह परेशानी संजीदा तौर पर मुश्किलों को बढ़ा रही है। इस शहर में दोनों कंपनियों के कारोबार का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। यहां डेढ़ लाख से ज्यादा टैक्सियां चलती हैं।
उम्मीद बढ़ा देने वाले वायदे किए थे कंपनी ने
ड्राइवरों की तादात तो और भी ज्यादा है क्योंकि, एक टैक्सी को दो-तीन ड्राइवर अलग-अलग शिफ्टों में चलाते हैं। टैक्सी कारोबार में उबर जहां 2013 से आई वहीं, ओला 2010 से ड्राइवरों को काम पर रख रही है।
एक कंसल्टेंसी फर्म के इकट्ठा किए आंकड़ों से पता चला है कि ड्राइवरों की आमदनी मे 50 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। जनवरी 2015 में कंपनी ड्राइवरो को प्रत्येक ट्रिप पर 500 रुपये देती थी। उस वक्त कंपनी ने गारंटी के तौर पर मासिक आमदनी देने, जिंदगी बदल देने जैसी बातें कही थी, ऐसे ही उम्मीद बढ़ा देने वाले वायदे कंपनी द्वारा किए गए थे।
फर्म के ही एक व्यक्ति जसपाल सिंह का कहना है कि पहले ड्राइवर 6-7 घंटे में हजार रुपये से ऊपर तक कमा लेते थे। दिनभर की उनकी कमाई ढाई हजार तक हो जाती थी। अब हालात ऐसे हैं कि हजार रुपये कमाने के लिए ड्राइवरों को 12-13 घंटे काम करना पड़ता है।
टैक्सियों की बढ़ती तादात ने मुश्किलों को बढ़ाया है
प्रसाद जो कि बेंगलुरु शहर में ओला और उबर दोनों की टैक्सियां चलाते हैं उन्हें भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वह दो साल पहले एक महीने में 80 हजार तक कमाते थे और अब उनकी आमदनी लगभग आधी हो गई है। उन्होंने कहा कि- " पहले से अब गाड़ियों के चक्कर बढ़ गई हैं। सड़कों पर टैक्सियां भी बढ़ गई हैं। इससे भी काम पर असर पड़ा है। "
ड्राइवरों की परेशानियों वाकई बढ़ गई हैं। ऑनलाइन कैब सर्विस में एक तरह की ओवर सप्लाई हो रही है। पिछले साल से अब तक टैक्सियों का रजिस्ट्रेशन लगभग दोगुना हो गया है।
ओला और उबर दोनों कंपनियों के ड्राइवरों ने कंपनियों पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि कंपनी की रेटिंग और कंपनी के खिलाफ शिकायतों का पेमेंट पर असर पड़ता है। आमदनी में गिरावट मे यह भी एक बड़ी वजह है।
स्थिर सैलरी का इंतजाम कर रही है उबर
छह महीने से उबर चला रहे अब्दुल जमील का कहना है कि "मैं पहले सऊदी अरब में काम किय़ा करता था। मुझे मेरे दोस्तों ने बताया कि यहां हैदराबाद में उबर और ओला के ड्राइवर अच्छा पैसा कमा रहे हैं। इसी वजह से मैं नौकरी छोड़ यहां आ गय़ा।"
आगे उन्होंने बताया कि "अब बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। किराया बढ़ने के बाद से सवारी मिलनी भी कम हो गई है। गुजारा करने के लिए 17-18 घंटे काम करना पड़ता है। "
उबर के प्रवक्ता ने इस मामले पर कहा है कि "हमें खेद है कि कुछ लोगों के चलते हमारे ग्राहकों को और ड्राइवर साथियों को मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। हम कोशिश कर रहे हैं कि ड्राइवरों के लिए एक स्थिर सैलरी का इंतजाम कर सकें। ग्राहकों की सुविधा हमारी पहली प्राथमिकता है।"