फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   ola uber drivers on ptotest against companies

उबर-ओला के ड्राइवर पहले कमा रहे थे लाखों, अब गुजारा करना भी हो रहा मुश्किल

Fri, 27 Jan 2017 05:29 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला,दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला,दिल्ली Updated Fri, 27 Jan 2017 05:29 PM IST
विज्ञापन
ola uber drivers on ptotest against companies
taxi

बीते रविवार की रात दिल्ली के वसंत विहार इलाके में तेज रफ्तार बीएमडब्लयू ने उबर टैक्सी को जोरदार टक्कर मारी जिसमें कार चालक की मौत हो गई थी। उबर कैब चला रहे तीस वर्षीय नसरुल इस्लाम का काम पर पहला ही दिन था। अब उनके पीछे उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं और अब परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है।इस घटना ने उबर ड्राइवरों को मिलने वाली घटनाओं की कलई खोल दी है।

विज्ञापन


श्रीनिवासन ने् अपनी गाड़ी को ही अपना घर बना लिया है। सोने से लेकर ब्रश करने तक का सारा सामान उनकी टोयोटा एटिओस में ही रखा रहता है। उनका कहना है कि- " मैं 18 घंटे गाड़ी चलाने के बाद अपनी गाड़ी मे ही सो जाता हूं। मैं सुवह जल्दी उठ जाता हूं जिससे अपने बिलों की पेमेंट कर सकूं।" श्रीनिवासन पिछले ढाई साल से उबर के लिए टैक्सी चला रहे हैं।
विज्ञापन


उबर ने उनको एक नई तरीके की जिंदगी का प्रलोभन दिया था। टैक्सी चलाने के शुरुआती दिनों में श्रीनिवासन एक महीने में 70 हजार से एक लाख तक कमाते थे। अभी उन्होंने घर बनाने कि लिए लोन भी ले रखा है, साथ ही उनकी बेटी बेंगलुरु के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ती है। उबर ने् इसी तरीके के लुभावने झांसे कई ड्राइवरों को दिये थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ओला की तरह ही उबर ने धीरे-धीरे ड्राइवरों के लिए गुजारा करना मुश्किल कर दिया है। श्रीनिवासन की मासिक आमदनी में 40 से 50 हजार तक की गिरावट आई है। ऐसे ही हालत उनके जैसे अन्य ड्राइवरों की भी है।

अलग-अलग शहरों में हो रहे हैं प्रदर्शन

ola uber drivers on ptotest against companies
taxi

अपनी आमदनी पर पड़े असर के चलते बेंगलुरु में लोगों ने प्रदर्शन भी किया। ऐसे ही हड़ताल ड्राइवरों द्वारा हैदराबाद में की गई। इसी तरह अपनी शिकायतों  को लेकर हजारों ड्राइवर चंडीगढ़ में भी सड़कों पर उतरे थे।

ड्राइवरो के बीच इस असंतोष से कंपनियों पर भारी दबाव बनने लगा है। कंपनियों के सामने एक तरफ अपनी बातों पर मजबूत ड्राइवर यूनियनें है तो दूसरी तरफ टैक्सी नियमन को लेकर कानूनी दांव-पेंच।

बेंगलुरु शहर में यह परेशानी संजीदा तौर पर मुश्किलों को बढ़ा रही है। इस शहर में दोनों कंपनियों के कारोबार का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। यहां डेढ़ लाख से ज्यादा टैक्सियां चलती हैं। 

उम्मीद बढ़ा देने वाले वायदे किए थे कंपनी ने

ola uber drivers on ptotest against companies
taxi

ड्राइवरों की तादात तो और भी ज्यादा है क्योंकि, एक टैक्सी को दो-तीन ड्राइवर अलग-अलग शिफ्टों में चलाते हैं। टैक्सी कारोबार में उबर जहां 2013 से आई वहीं, ओला 2010 से ड्राइवरों को काम पर रख रही है।

एक कंसल्‍टेंसी फर्म के इकट्ठा किए आंकड़ों से पता चला है कि ड्राइवरों की आमदनी मे 50 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। जनवरी 2015 में कंपनी ड्राइवरो को प्रत्येक ट्रिप पर 500 रुपये देती थी। उस वक्त कंपनी ने गारंटी के तौर पर मासिक आमदनी देने, जिंदगी बदल देने जैसी बातें कही थी, ऐसे ही उम्मीद बढ़ा देने वाले वायदे कंपनी द्वारा किए गए थे।  

फर्म के ही एक व्यक्ति जसपाल सिंह का कहना है कि पहले ड्राइवर 6-7 घंटे में हजार रुपये से ऊपर तक कमा लेते थे। दिनभर की उनकी कमाई ढाई हजार तक हो जाती थी। अब हालात ऐसे हैं कि हजार रुपये कमाने के लिए ड्राइवरों को 12-13 घंटे काम करना पड़ता है।

टैक्सियों की बढ़ती तादात ने मुश्किलों को बढ़ाया है

ola uber drivers on ptotest against companies
taxi

प्रसाद जो कि बेंगलुरु शहर में ओला और उबर दोनों की टैक्सियां चलाते हैं उन्हें भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वह दो साल पहले एक महीने में 80 हजार तक कमाते थे और अब उनकी आमदनी लगभग आधी हो गई है। उन्होंने कहा कि- " पहले से अब गाड़ियों के चक्कर बढ़ गई हैं। सड़कों पर टैक्सियां भी बढ़ गई हैं। इससे भी काम पर असर पड़ा है। "
 
ड्राइवरों की परेशानियों वाकई बढ़ गई हैं। ऑनलाइन कैब सर्विस में एक तरह की ओवर सप्लाई हो रही है। पिछले साल से अब तक टैक्सियों का रजिस्ट्रेशन लगभग दोगुना हो गया है।

ओला और उबर दोनों कंपनियों के ड्राइवरों ने कंपनियों पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि कंपनी की रेटिंग और कंपनी के खिलाफ शिकायतों का पेमेंट पर असर पड़ता है। आमदनी में गिरावट मे यह भी एक बड़ी वजह है।

स्थिर सैलरी का इंतजाम कर रही है उबर

ola uber drivers on ptotest against companies
taxi shimla

छह महीने से उबर चला रहे अब्दुल जमील का कहना है कि "मैं पहले सऊदी अरब में काम किय़ा करता था। मुझे मेरे दोस्तों ने बताया कि यहां हैदराबाद में उबर और ओला के ड्राइवर अच्छा पैसा कमा रहे हैं। इसी वजह से मैं नौकरी छोड़ यहां आ गय़ा।"

आगे उन्होंने बताया कि "अब बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। किराया बढ़ने के बाद से सवारी मिलनी भी कम हो गई है। गुजारा करने के  लिए 17-18 घंटे काम करना पड़ता है। "

उबर के प्रवक्ता ने इस मामले पर कहा है कि "हमें खेद है कि कुछ लोगों के चलते हमारे ग्राहकों को और ड्राइवर साथियों को मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। हम कोशिश कर रहे हैं कि ड्राइवरों के लिए एक स्थिर सैलरी का इंतजाम कर सकें। ग्राहकों की सुविधा हमारी पहली प्राथमिकता है।"

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed