‘लाभ के पद’ को किसी भी कानून में नहीं किया गया परिभाषित : सरकार
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केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसी भी कानून में ‘लाभ के पद’ को परिभाषित नहीं किया गया है। दिल्ली सरकार में संसदीय सचिव के पद धारण करने के चलते संभावित अयोग्यता का सामना कर रहे आम आदमी पार्टी (आप) के 21 विधायकों के मामले में केंद्र सकार का यह बयान सामने आया है।
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संसदीय सचिव के रूप में काम करने वाले विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए उठाए गए कदम राज्य का विषय है और केंद्र सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है।
लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ‘संसद (अयोग्यता का निवारण) अधिनियम-1959 में मंत्रियों के संसदीय सचिव पद का प्रावधान नहीं है।
'कानून में नहीं दी गई है 'लाभ के पद’ की परिभाषा’
इसके अलावा किसी भी कानून में ‘लाभ के पद’ की परिभाषा नहीं दी गई है।’ हालांकि प्रसाद ने यह भी कहा कि कुछ राज्यों में मंत्रियों के संसदीय सचिव के पद बनाए गए हैं, लेकिन यह ‘लाभ के पद’ के दायरे में आते है या नहीं, यह पद की प्रकृति, नियुक्ति एवं बर्खास्तगी की शर्तों और भुगतान पर निर्भर करता है।
दरअसल, मामले में उनसे सवाल किया गया था कि देश में मंत्रियों के संसदीय सचिव के पद ‘लाभ के पद’ के दायरे में आते हैं या नहीं और ऐसे विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं या नहीं।
मालूम हो कि संविधान का अनुच्छेद 191 लाभ के किसी भी पद को धारण करने वाले विधायक को अयोग्य घोषित करता है।