प्रदूषण रोकने के लिए कारगर साबित नहीं हो रहा ऑड इवन
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वकील ने प्रदूषण मामले पर सुनवाई के दौरान जानकारी दी कि मौजूदा समय में ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है, जो यह बताता हो कि सम-विषम योजना के जरिए वाहनों से होने वाले प्रदूषण स्तर में किसी तरह की कमी आई है।
वहीं, शुरूआती आंकड़ों के आकलन और विश्लेषण के आधार पर यह कहा जा सकता है कि सम-विषम योजना से पर्यावरण पर किसी तरह का सुधार नहीं हो रहा है। हालांकि इस दिशा में वैज्ञानिक अध्ययन जारी है।
आकलन के बाद ही इस बाबत पूरी तरह से निष्कर्ष संभव है। इसके बाद बेंच ने मामले की सुनवाई दो मई तक के लिए टाल दी। सीपीसीबी अगली सुनवाई में दिल्ली समेत देश के 15 प्रमुख शहरों के परिवेशी वायु गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करेगी।
ट्रिब्यूनल ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
बृहस्पतिवार को जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने वायु प्रदूषण से जुड़े मामले पर सुनवाई की। बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई तक सीपीसीबी व अन्य संबंधी प्राधिकरण न सिर्फ वाहनों से होने वाले प्रदूषण की, बल्कि खुले में जलाए जाने वाले कूड़े-कचरे और निर्माण गतिविधियों के दौरान होने वाले प्रदूषण की विस्तृत और संपूर्ण रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करें।
मामले की सुनवाई के दौरान सीपीसीबी के वकील ने कहा कि वह सम-विषम योजना के पहले 15 दिन और स्कीम के दौरान व स्कीम के 15 दिन बाद तक के आंकड़ों का वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे।
कुल 45 दिनों का वायु प्रदूषण संबंधी आकलन अगली सुनवाई में ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश किया जाएगा। इस अध्ययन में सिर्फ वाहनों से होने वाले प्रदूषण ही नहीं, बल्कि कूड़ा-कचरा जलाने से होने वाले प्रदूषण और निर्माण की वजह से होने वाले प्रदूषण भी शामिल है।
मौसम और हवाओं की गति में बदलाव भी प्रदूषण स्तर को प्रभावित कर रहा है
वकील ने कहा कि प्रदूषण स्तर में बदलाव के कई कारण हैं। मसलन, मौसम और हवाओं की गति में बदलाव भी प्रदूषण स्तर को प्रभावित कर रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने दिल्ली सरकार से पूछा कि वह प्रदूषण कम करने के लिए सम-विषम स्कीम तो चला रही है, लेकिन गंभीर प्रदूषण फैलाने वाली 15 साल पुरानी गाड़ियों को सड़कों से क्यों नहीं हटा रही है?
हाल ही में एनजीटी ने महेंद्र पांडेय की याचिका का निपटारा करते हुए सीपीसीबी को निर्देश दिया था कि वह स्वतंत्र तरीके से वायु प्रदूषण स्तर की जांच करे। वहीं, डीपीसीसी ने कहा था कि वह 30 अप्रैल तक रोजाना प्रदूषण स्तर के आंकड़ों को रिकॉर्ड करना जारी करेगी।
प्रदूषण स्तर में जारी है उतार-चढ़ाव : टेरी
राष्ट्रीय राजधानी में सम-विषम योजना के दौरान मापे जा रहे वायु प्रदूषण स्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) के मुताबिक मंगलवार के मुकाबले बुधवार को धूल (पर्टिकुलेट मैटर) और गैसीय (नाइट्रोजन ऑक्साइड) प्रदूषण में कमी आई है। हालांकि बीते 24 घंटे में मापे गए आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को भी दिल्ली-एनसीआर के कुल 9 स्थानों पर पर्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 व पीएम 10) और नाइट्रोजन ऑक्साइड अधिकांश स्थानों में तय मानकों से अधिक पाए गए।
टेरी के मुताबिक, बुधवार को एनसीआर में नोएडा, गाजियाबाद और गुड़गांव में पीएम 2.5 तय मानक से 1 और 2 गुना अधिक पाया गया। वहीं पीएम 10 में 2 से 4 गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं आरकेपुरम, लोधी रोड, पंजाबी बाग, मंदिर मार्ग में भी पीएम 2.5 और पीएम 10 मानक से अधिक रहे।
टेरी के फेलो सुमित शर्मा के मुताबिक, सम-विषम योजना के दौरान मौसम में भी उतार-चढ़ाव जारी है। इसके अलावा सप्ताहांत या अन्य अवकाश के दौरान वाहनों के आवागमन में कमी के चलते उत्सर्जन में फर्क आता है। लिहाजा राजधानी में भी प्रदूषण स्तर के बढ़ने और गिरने के पीछे ये प्रमुख कारक भी जुड़े हैं।