'जब आना हो तो बताना मैं झुग्गी में पहुंच जाऊंगा'

बृजेश सिंह/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 29 Jan 2014 04:59 PM IST
nursery admission race in delhi
राजधानी दिल्ली में इन दिनों नर्सरी दाखिलों के लिए भागमभाग चल रही है। अभिभावक दाखिले का कोई भी मौका गंवाना नहीं चाहते। फिर वह चाहे ईडब्ल्यूएस (गरीब वर्ग) कोटे से ही क्यों न हो।

गाइडलाइंस को ध्यान में रखकर अभिभावक दस्तावेज बनवाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पॉश कॉलोनी इलाके में रहने वाला गरीब बन रहा है तो कोई कागजों में अपना पता बदल रहा है।

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यही नहीं, वे बिचौलियों की मदद लेने से भी गुरेज नहीं कर रहे। ऐसे ही कुछ अजग-गजब तरीकों से प्रमाण पत्र बनवा रहे केस के बारे में जानिए, जिसे खारिज करने में अधिकारी लाचार हैं।

पॉश कॉलोनी का गरीब पिता
मामला नई दिल्ली जिले का है। अधिकारियों के मुताबिक आय प्रमाण पत्र का एक आवेदन आया। आवेदक पेशे से वकील है। वह अपने माता-पिता के साथ नई दिल्ली इलाके में सरकारी फ्लैट में रहता है। पिता केंद्रीय कर्मचारी हैं और मां दिल्ली सरकार में हैं। आवेदक ने कहा कि उसकी सालाना आय एक लाख से कम है।

उसने दिखाया कि उसके पास कुछ नहीं है। वकालत के अलावा वह अपने मां-पिता पर निर्भर है। कार का लोन मां चुकाती हैं। अधिकारी इस आवेदन को मंजूरी देने के लिए लाचार हैं, क्योंकि आय प्रमाण पत्र के लिए पारिवारिक आय में पति-पत्नी की आय ही आती है और आवेदक के कागजों में यह आय एक लाख से कम है।

टूटे घर पर रहते नहीं पर वोटर आई कार्ड चाहिए
जनाब को बेटे का अच्छे स्कूल में दाखिला कराना है। रहते तो उत्तरी पूर्वी जिले में रहते हैं, लेकिन नई दिल्ली के किसी स्कूल में दाखिले की तमन्ना है। पता बदलने के लिए वह नई दिल्ली के एक टूटे घर का पता दिखाते हैं। मतदाता पहचान पत्र के लिए आवेदन करते हैं। बीएलओ से कहते हैं, जब आना होगा तो बता देना मैं वहीं मिलूंगा। मकान को अपना दिखाने के लिए उन्होंने सेल एग्रीमेंट लगाया। असल में वह किसी जानकार का मकान था। हालांकि इस मामले में आवेदन खारिज कर दिया गया।

दलालों के बीच फंसे अभिभावक
इकोनॉमिक वीकर सेक्शन (ईडब्ल्यूएस) प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अभिभावक बिचौलियों की भी मदद ले रहे हैं। वह बिना किसी देरी के प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पांच से छह हजार रुपये तक बिचौलियों को दे रहे हैं। गीता कॉलोनी का एसडीएम कार्यालय हो या उत्तरी दिल्ली माल रोड का या फिर नई दिल्ली का जाम नगर हाउस। सभी कार्यालयों के बाहर अभिभावकों को देखते ही दलाल सक्रिय हो जाते हैं। बिना बुलाए तीन-चार दिनों में सर्टिफिकेट देने का दावा करते हैं।

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