किसान आंदोलनः सर्दी के साथ बढ़ रही किसानों की ताकत, टिकरी बॉर्डर पर तेज हुआ प्रदर्शन
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सर्दी के साथ किसानों की ताकत भी लगातार बढ़ रही है। किसान आंदोलन की बढ़ती ताकत को टिकरी बॉर्डर पर देखा जा सकता है। यदि पिछले हफ्ते से तुलना करें तो यहां पर इस समय दोगुना भीड़ हो गई है। साथ ही यहां पर ट्रैक्टर-ट्रॉली की संख्या भी अधिक हो गई है।
किसान आंदोलन के 36वें दिन गुरुवार को भी मंच पर केंद्र सरकार के खिलाफ भाषण और नारेबाजी होती रही। दोपहर में दो बज रहे थे और हरियाणा के क्षेत्रीय कलाकार गीत संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे। किसानों ने बताया कि एक जनवरी को इसी तरह नए वर्ष का स्वागत किया जाएगा।
टिकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन में पहले सड़क के दोनों तरफ इतनी जगह बची रहती थी, दो वाहन आमने सामने से आसानी से पार हो जाया करते थे। लेकिन अब बड़ी मुश्किल से दोनों तरफ केवल एक वाहन निकलने भर की जगह बची है। बाकी सड़क पर दोनों तरफ टैक्टर-ट्रॉली खड़ी हैं। तेज सर्दी की वजह से ट्रालियों को तिरपाल से पूरी तरह ढंका गया है। जिसके भीतर लोगों के सोने की व्यवस्था है।
दो ट्रालियों के बीच की बची हुई जगह में ही भोजन तैयार हो रहा है। कड़ाके की ठंड और साथ में सर्द हवाओं के सितम से बचने का भी प्रबंध है। लगभग सभी ट्रालियों के सामने पानी गर्म करने के लिए मोबाइल गीजर रखा है। दिन में भी जगह-जगह पर अलाव जल रहे हैं।
केन्द्र सरकार पहले किसानों का सम्मान करे-सलमान खुर्शीद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों के आंदोलन का समर्थन करती है। केन्द्र सरकार पहले किसानों का सम्मान करे और फिर कानून वापस लेकर वार्ता करे। उन्होंने कहा कि किसानों को पहले अपने सम्मान का लड़ाई लड़नी चाहिए। इसके बाद कृषि कानूनों को वापस लेने की लड़ाई। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता खुर्शीद जंतर-मंतर के पास टाॅलस्टाॅय मार्ग पर धरने पर बैठे पंजाब के कांग्रेसी नेताओं को समर्थन देने गुरुवार दोपहर को धरनास्थल पर पहुंचे। वह वहां कई घंटे तक रहे। दूसरी तरफ सांसद गुरजीत सिंह ओजला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बुधवार शाम को एक पत्र लिखा है।
पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि केन्द्र सरकार कह रही है कांग्रेस समेत कुछ लोग किसानों को भड़का रहे हैं। अगर हम किसानों को बहका रहे हैं तो वह किसानों को समझा दे। सरकार पहले किसानों को सम्मान तो करे। सरकार को पहले तीनों कानून वापस लेने चाहिए। इसके बाद बैठकर बात करनी चाहिए। अगर सरकार कानूनों को वापस ले लेगी तो कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा। अन्ना हजारे जब अनशन पर बैठे थे तब कांग्रेस सरकार ने उनसे जाकर बात की थी और उन्हें मनाया था। जवान जिस हौसले के साथ बॉर्डर पर तैनात होते हैं, उसी हौसले से किसान आंदोलन कर रहे हैं। जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होती जब सरकार को भी शांति नहीं मिलेगी। सरकार के पास किसानों के लिए कोई योजना नहीं है। सरकार को किसानों से बात करनी चाहिए। सरकार कह रही है कि किसानों की दो बातें मान ली गई हैं। जबकि किसानों ने कुछ नहीं कहा है। सरकार संसद नहीं बुला रही है। कानून वापस लेकर सरकार को जल्द ही कोई हल निकालना चाहिए।
दूसरी तरफ अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह ओजला ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पंजाब एड नामक संस्था के बारे में आपत्तिजनक कहने पर विरोध जताया है। सांसद ओजला ने कहा कि 1999 के बाद पंजाब की इस संस्था ने देश-विदेश में आए आपातकाल में लोगों की सहायता की है। ब्रिटेन समेत कई देशों के प्रधानमंत्री इस संस्था की तारीफ कर चुके हैं। ऐसे में सरकार को उस चैनल पर प्रतिबंध लगाना चाहिए, जिसने संस्था के बारे में आपत्तिजनक बोला है। टॉलस्टॉय मार्ग पर पंजाब के नेताओं को धरना 24वें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर सांसद रवनीत सिंह बिट्टू, गुरजीत ओजला,जसवीर सिंह गिल उर्फ डिम्पा, विधायक कुलबीर जीरा समेत पंजाब के कई नेता धरना स्थल पर बैठे थे।