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Nuh News: दो दशक से विकास कार्यों का इंतजार, मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे खेंचातान के ग्रामीण
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न पंचायत का हिस्सा, न नगर पालिका में जगह, खेंचातान के ग्रामीण बोले-आखिर हम कहां हैं
चुनाव में मतदाता और विकास में बने बेगाना, 450 ग्रामीणों को दो दशक से अपने प्रतिनिधि का इंतजार
गुरुदत्त भारद्वाज
पुन्हाना। पुन्हाना शहर से सटा खेंचातान गांव आज अपनी पहचान के लिए ही मोहताज है। शहर की सीमा से सटे होने के बावजूद गांव न तो पुन्हाना नगर पालिका का हिस्सा है और न ही इसकी अपनी ग्राम पंचायत है। प्रशासनिक व्यवस्था के इस असमंजस का खामियाजा करीब दो दशक से ग्रामीण भुगत रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ है। कच्चे रास्ते, बिजली-पानी की समस्या और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं। गांव में करीब 450 मतदाता हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ग्रामीण अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं, लेकिन पंचायत और नगर पालिका चुनावों में उन्हें मतदान का अधिकार नहीं मिलता। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय उन्हें मतदाता माना जाता है, लेकिन विकास और स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व की बात आती है तो गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं मिलता।
दो दशक से विकास की राह देख रहा गांव
ग्रामीणों के अनुसार गांव को अलग पंचायत का दर्जा देने या पुन्हाना नगर पालिका में शामिल करने की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों और जिला उपायुक्त तक शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर गांव की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण विकास योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
स्कूल नहीं, बच्चों की पढ़ाई पर भी संकट
गांव में सबसे बड़ी समस्या शिक्षा की है। यहां अपना कोई स्कूल नहीं है। बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांवों या पुन्हाना शहर का रुख करना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों को रोजाना बाहर भेजना आसान नहीं है। इसके चलते कई बच्चे नियमित शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
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खेंचतान गांव की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि शहर से सटा होने के बावजूद आज तक गांव की अपनी कोई पहचान नहीं है। न पंचायत है और न ही नगर पालिका में शामिल किया गया है। करीब दो दशक से विकास कार्य ठप पड़े हैं। अधिकारियों से कई बार गुहार लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
- तारिफ हुसैन, ग्रामीण
गांव में सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। बरसात के दिनों में कच्चे रास्तों से आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है। जब गांव को किसी स्थानीय निकाय में शामिल ही नहीं किया गया तो विकास कार्यों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
- शकील खान, ग्रामीण
गांव में स्कूल नहीं होने से बच्चों को दूसरे गांव या पुन्हाना शहर जाना पड़ता है। गरीब परिवारों के लिए रोज बच्चों को बाहर पढ़ने भेजना आसान नहीं है। इसी वजह से कई बच्चे शिक्षा से दूर हो जाते हैं। प्रशासन को इस गंभीर समस्या का तत्काल समाधान करना चाहिए।
- मिसरु खान, ग्रामीण
हमारे गांव में करीब 450 मतदाता हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हम मतदान करते हैं, लेकिन पंचायत और नगर पालिका चुनाव में अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार नहीं मिलता। यह गांव के लोगों के साथ बड़ा अन्याय है। सरकार को खेंचातान की प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट कर विकास का रास्ता खोलना चाहिए।
- हाजी सुलेमान, ग्रामीण
मामला जानकारी में है। इस संबंध में नगर पालिका के अधिकारियों को आदेश दिए कि जल्द ही बैठक कर गांव की स्थिति के बारे में जानकारी ले। गांव अगर नियमों के अनुसार नगर पालिका में शामिल होता है तो इस पर कार्यवाही की जाएगी। गांव में विकास कार्यो को भी गति दी जाएगी।
- अमित कुमार, एसडीएम पुन्हाना
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चुनाव में मतदाता और विकास में बने बेगाना, 450 ग्रामीणों को दो दशक से अपने प्रतिनिधि का इंतजार
गुरुदत्त भारद्वाज
पुन्हाना। पुन्हाना शहर से सटा खेंचातान गांव आज अपनी पहचान के लिए ही मोहताज है। शहर की सीमा से सटे होने के बावजूद गांव न तो पुन्हाना नगर पालिका का हिस्सा है और न ही इसकी अपनी ग्राम पंचायत है। प्रशासनिक व्यवस्था के इस असमंजस का खामियाजा करीब दो दशक से ग्रामीण भुगत रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ है। कच्चे रास्ते, बिजली-पानी की समस्या और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं। गांव में करीब 450 मतदाता हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ग्रामीण अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं, लेकिन पंचायत और नगर पालिका चुनावों में उन्हें मतदान का अधिकार नहीं मिलता। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय उन्हें मतदाता माना जाता है, लेकिन विकास और स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व की बात आती है तो गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं मिलता।
दो दशक से विकास की राह देख रहा गांव
ग्रामीणों के अनुसार गांव को अलग पंचायत का दर्जा देने या पुन्हाना नगर पालिका में शामिल करने की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों और जिला उपायुक्त तक शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर गांव की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण विकास योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
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स्कूल नहीं, बच्चों की पढ़ाई पर भी संकट
गांव में सबसे बड़ी समस्या शिक्षा की है। यहां अपना कोई स्कूल नहीं है। बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांवों या पुन्हाना शहर का रुख करना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों को रोजाना बाहर भेजना आसान नहीं है। इसके चलते कई बच्चे नियमित शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
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खेंचतान गांव की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि शहर से सटा होने के बावजूद आज तक गांव की अपनी कोई पहचान नहीं है। न पंचायत है और न ही नगर पालिका में शामिल किया गया है। करीब दो दशक से विकास कार्य ठप पड़े हैं। अधिकारियों से कई बार गुहार लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
- तारिफ हुसैन, ग्रामीण
गांव में सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। बरसात के दिनों में कच्चे रास्तों से आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है। जब गांव को किसी स्थानीय निकाय में शामिल ही नहीं किया गया तो विकास कार्यों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
- शकील खान, ग्रामीण
गांव में स्कूल नहीं होने से बच्चों को दूसरे गांव या पुन्हाना शहर जाना पड़ता है। गरीब परिवारों के लिए रोज बच्चों को बाहर पढ़ने भेजना आसान नहीं है। इसी वजह से कई बच्चे शिक्षा से दूर हो जाते हैं। प्रशासन को इस गंभीर समस्या का तत्काल समाधान करना चाहिए।
- मिसरु खान, ग्रामीण
हमारे गांव में करीब 450 मतदाता हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हम मतदान करते हैं, लेकिन पंचायत और नगर पालिका चुनाव में अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार नहीं मिलता। यह गांव के लोगों के साथ बड़ा अन्याय है। सरकार को खेंचातान की प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट कर विकास का रास्ता खोलना चाहिए।
- हाजी सुलेमान, ग्रामीण
मामला जानकारी में है। इस संबंध में नगर पालिका के अधिकारियों को आदेश दिए कि जल्द ही बैठक कर गांव की स्थिति के बारे में जानकारी ले। गांव अगर नियमों के अनुसार नगर पालिका में शामिल होता है तो इस पर कार्यवाही की जाएगी। गांव में विकास कार्यो को भी गति दी जाएगी।
- अमित कुमार, एसडीएम पुन्हाना