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Nuh News: सफाईकर्मियों की हड़ताल ने नूंह को बनाया कूड़ाघर, पांच दिन में बिगड़े हालात
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वार्डों में कूड़े के पहाड़, सड़कों पर गंदा पानी और नालियां जाम; बदबू से परेशान शहरवासी, घरों के बाहर खुद झाड़ू लगाने को मजबूर लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। शहर की सफाई व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। सफाईकर्मियों की हड़ताल के चलते नूंह शहर के कई वार्डों में पिछले करीब पांच दिनों से नियमित सफाई नहीं हुई है। सोमवार को शहर में की गई पड़ताल में जगह-जगह कूड़े के ढेर, जाम नालियां, सड़कों पर जमा गंदा पानी और कीचड़ नजर आया। हालात यह हैं कि कई जगह लोग अपने घरों और दुकानों के सामने खुद झाड़ू लगाने को मजबूर हैं, लेकिन कूड़ा उठाने की व्यवस्था नहीं होने से गंदगी एक जगह से दूसरी जगह जमा होती जा रही है।
वार्ड-13 में सड़क बनी गंदे पानी की नाली
वार्ड नंबर 13 में सफाई व्यवस्था की बदहाली सबसे ज्यादा दिखाई दी। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण गंदा पानी सड़क पर फैल गया है। बरसात के पानी के साथ नालियों का गंदा पानी मिल जाने से रास्तों पर कीचड़ जमा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को यहां से गुजरने में सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
वार्ड-3 और वार्ड-1 में कूड़े के ढेर
वार्ड नंबर 3 में कई दिनों से सफाई नहीं होने के कारण जगह-जगह कूड़ा जमा है। वहीं वार्ड नंबर 1 में लोग अपने घरों के सामने की सफाई खुद कर रहे हैं। स्थानीय लोग कूड़े को एक स्थान पर जमा तो कर रहे हैं, लेकिन नियमित उठान नहीं होने के कारण वहां कूड़े का ढेर बढ़ता जा रहा है।
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यानी सफाईकर्मियों की हड़ताल का असर अब सिर्फ गलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
बाजार में दुकान खोलना भी हुआ मुश्किल
शहर के बाजार में दुकानदारों का कहना है कि गंदगी और बदबू के कारण ग्राहकों को भी परेशानी हो रही है। दुकानदार सरफराज ने कहा कि कई दिनों से सफाई नहीं होने के कारण दुकान के आसपास कूड़ा जमा है। बारिश के पानी से कूड़ा सड़ने लगा है और बदबू इतनी ज्यादा है कि उन्हें मुंह ढककर दुकान पर बैठना पड़ रहा है।
36 कर्मचारी संभालते हैं नूंह की सफाई व्यवस्था
नूंह शहर में नगरपालिका के करीब 36 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं और सभी हड़ताल पर हैं। जिले में कुल करीब 130 नगरपालिका सफाई कर्मचारी बताए जा रहे हैं। प्रदेशभर में करीब 13 हजार सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 6 अगस्त से हड़ताल पर हैं।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 11 अगस्त तक सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था और बिगड़ने की आशंका है।
पक्की नौकरी से लेकर 30 हजार वेतन तक मांग
सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान सुभाष का कहना है कि सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पेरोल पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों को नियमित करना, एचकेआरएन व अन्य ठेकों में लगे तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कच्चे कर्मचारियों को नीति बनाकर पक्का करना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि नियमित किए जाने तक उन्हें 30 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए।
इसके अलावा एक्सग्रेशिया पॉलिसी को सरल बनाकर कच्चे कर्मचारियों को भी इसमें शामिल करने, छंटनी किए गए कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लेने तथा रोहतक से लगाए गए 42 डोर-टू-डोर कर्मचारियों सहित अन्य हटाए गए कर्मचारियों को वापस काम पर लेने की मांग भी की जा रही है।
पांच दिन की हड़ताल में ही कूड़ा और गंदा पानी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। अब निगाहें 11 अगस्त पर टिकी हैं सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत से समाधान निकलता है या शहर को अनिश्चितकालीन गंदगी का सामना करना पड़ता है।
कूड़ा कई दिनों से नहीं उठ रहा। बदबू इतनी ज्यादा है कि दुकान पर मुंह ढककर बैठना पड़ रहा है। बारिश ने समस्या और बढ़ा दी है।
- सरफराज, दुकानदार
नालियां जाम हैं और गंदा पानी सड़क पर आ गया है। बच्चों और बुजुर्गों को घर से निकलने में दिक्कत हो रही है।
- इस्लाम, ग्रामीण
हम अपने घर के सामने खुद सफाई कर रहे हैं, लेकिन कूड़ा उठाने वाला कोई नहीं है। अगर हड़ताल लंबी चली तो हालात बहुत खराब हो जाएंगे।
- कय्यूम, ग्रामीण
बाजार में जगह-जगह गंदगी और बदबू है। बारिश के कारण कीचड़ भी है। खरीदारी करने में परेशानी हो रही है।
- मौसीम खान, ग्रामीण
हड़ताल पर चल रहे 35 कर्मचारियों के कारण शहर में गंदगी न फैले इसके लिए डोर-टू-डोर सफाई अभियान व रोड स्वीपिंग के तहत एक वर्ष के टेंडर वाले कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। सोमवार को पूरे शहर में अभियान चलाकर कूड़ा उठवाया जा रहा है।
- संजय मनोचा, चेयरमैन नगरपरिषद, नूंह
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। शहर की सफाई व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। सफाईकर्मियों की हड़ताल के चलते नूंह शहर के कई वार्डों में पिछले करीब पांच दिनों से नियमित सफाई नहीं हुई है। सोमवार को शहर में की गई पड़ताल में जगह-जगह कूड़े के ढेर, जाम नालियां, सड़कों पर जमा गंदा पानी और कीचड़ नजर आया। हालात यह हैं कि कई जगह लोग अपने घरों और दुकानों के सामने खुद झाड़ू लगाने को मजबूर हैं, लेकिन कूड़ा उठाने की व्यवस्था नहीं होने से गंदगी एक जगह से दूसरी जगह जमा होती जा रही है।
वार्ड-13 में सड़क बनी गंदे पानी की नाली
वार्ड नंबर 13 में सफाई व्यवस्था की बदहाली सबसे ज्यादा दिखाई दी। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण गंदा पानी सड़क पर फैल गया है। बरसात के पानी के साथ नालियों का गंदा पानी मिल जाने से रास्तों पर कीचड़ जमा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को यहां से गुजरने में सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
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वार्ड-3 और वार्ड-1 में कूड़े के ढेर
वार्ड नंबर 3 में कई दिनों से सफाई नहीं होने के कारण जगह-जगह कूड़ा जमा है। वहीं वार्ड नंबर 1 में लोग अपने घरों के सामने की सफाई खुद कर रहे हैं। स्थानीय लोग कूड़े को एक स्थान पर जमा तो कर रहे हैं, लेकिन नियमित उठान नहीं होने के कारण वहां कूड़े का ढेर बढ़ता जा रहा है।
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यानी सफाईकर्मियों की हड़ताल का असर अब सिर्फ गलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
बाजार में दुकान खोलना भी हुआ मुश्किल
शहर के बाजार में दुकानदारों का कहना है कि गंदगी और बदबू के कारण ग्राहकों को भी परेशानी हो रही है। दुकानदार सरफराज ने कहा कि कई दिनों से सफाई नहीं होने के कारण दुकान के आसपास कूड़ा जमा है। बारिश के पानी से कूड़ा सड़ने लगा है और बदबू इतनी ज्यादा है कि उन्हें मुंह ढककर दुकान पर बैठना पड़ रहा है।
36 कर्मचारी संभालते हैं नूंह की सफाई व्यवस्था
नूंह शहर में नगरपालिका के करीब 36 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं और सभी हड़ताल पर हैं। जिले में कुल करीब 130 नगरपालिका सफाई कर्मचारी बताए जा रहे हैं। प्रदेशभर में करीब 13 हजार सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 6 अगस्त से हड़ताल पर हैं।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 11 अगस्त तक सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था और बिगड़ने की आशंका है।
पक्की नौकरी से लेकर 30 हजार वेतन तक मांग
सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान सुभाष का कहना है कि सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पेरोल पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों को नियमित करना, एचकेआरएन व अन्य ठेकों में लगे तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कच्चे कर्मचारियों को नीति बनाकर पक्का करना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि नियमित किए जाने तक उन्हें 30 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए।
इसके अलावा एक्सग्रेशिया पॉलिसी को सरल बनाकर कच्चे कर्मचारियों को भी इसमें शामिल करने, छंटनी किए गए कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लेने तथा रोहतक से लगाए गए 42 डोर-टू-डोर कर्मचारियों सहित अन्य हटाए गए कर्मचारियों को वापस काम पर लेने की मांग भी की जा रही है।
पांच दिन की हड़ताल में ही कूड़ा और गंदा पानी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। अब निगाहें 11 अगस्त पर टिकी हैं सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत से समाधान निकलता है या शहर को अनिश्चितकालीन गंदगी का सामना करना पड़ता है।
कूड़ा कई दिनों से नहीं उठ रहा। बदबू इतनी ज्यादा है कि दुकान पर मुंह ढककर बैठना पड़ रहा है। बारिश ने समस्या और बढ़ा दी है।
- सरफराज, दुकानदार
नालियां जाम हैं और गंदा पानी सड़क पर आ गया है। बच्चों और बुजुर्गों को घर से निकलने में दिक्कत हो रही है।
- इस्लाम, ग्रामीण
हम अपने घर के सामने खुद सफाई कर रहे हैं, लेकिन कूड़ा उठाने वाला कोई नहीं है। अगर हड़ताल लंबी चली तो हालात बहुत खराब हो जाएंगे।
- कय्यूम, ग्रामीण
बाजार में जगह-जगह गंदगी और बदबू है। बारिश के कारण कीचड़ भी है। खरीदारी करने में परेशानी हो रही है।
- मौसीम खान, ग्रामीण
हड़ताल पर चल रहे 35 कर्मचारियों के कारण शहर में गंदगी न फैले इसके लिए डोर-टू-डोर सफाई अभियान व रोड स्वीपिंग के तहत एक वर्ष के टेंडर वाले कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। सोमवार को पूरे शहर में अभियान चलाकर कूड़ा उठवाया जा रहा है।
- संजय मनोचा, चेयरमैन नगरपरिषद, नूंह