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Nuh News: मेवात के लोग बने बाढ़ पीड़ितों के फरिश्ता, महिलाओं ने गहने बेचकर भेजी मदद
Mon, 08 Sep 2025 11:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नूंह
संवाद न्यूज एजेंसी, नूंह
Updated Mon, 08 Sep 2025 11:14 PM IST
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नगीना। पंजाब की बाढ़ से लाखों लोग बेघर हुए, खेत और गांव डूब गए। ऐसे कठिन समय में हरियाणा के मेवात के लोग फरिश्तों की तरह खड़े हुए और पंजाब, हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के लिए राहत सामग्री भेजी।
लगभग 500 गांवों ने इस मुहिम में हिस्सा लिया। हर गांव से औसतन 200–300 मन गेहूं और 2–5 लाख रुपये नकद इकट्ठा किए गए। कुछ गांवों ने 10 लाख रुपये से अधिक का सहयोग दिया। इसके अलावा गुदड़ी, बर्तन, बाल्टा, डलिया और अन्य आवश्यक वस्तुएं भी भेजी गईं। अब तक करीब 15 करोड़ रुपये मूल्य की राहत सामग्री और नकद भेजा जा चुका है।
महिलाओं ने इस मुहिम को नई ऊंचाई दी। बुजुर्ग माताओं ने अपनी पेंशन और बचत दी, कई ने गहने और बर्तन दान किए। गांव-गांव की महिलाएं मिलकर गुदड़ियां सी रही हैं और रोटियां बना रही हैं, ताकि कोई भूखा न रहे। बच्चों ने अपनी गुल्लक तक तोड़ दी।
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मस्जिदों में ऐलान कर बताया गया कि “हमारे सिख भाई संकट में हैं, हमें उनके साथ खड़ा होना है।” इसके बाद महिलाएं, बुजुर्ग, नौजवान और बच्चे राहत सामग्री, पैसे और गहने लेकर मस्जिदों में पहुंचे।
मेवात, जिसे अक्सर पिछड़ा और गरीब कहा जाता है, इस मुहिम से इंसानियत में सबसे अमीर होने का संदेश दिया। यह योगदान केवल राहत नहीं, बल्कि भाईचारे और मानवता का संदेश भी है।
जिम्मेदारों का कहना है कि यह मिसाल आने वाले भारत के लिए प्रेरणा है, जहां नफरत नहीं, इंसानियत और भाईचारा सबसे बड़ी ताकत होगी।
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लगभग 500 गांवों ने इस मुहिम में हिस्सा लिया। हर गांव से औसतन 200–300 मन गेहूं और 2–5 लाख रुपये नकद इकट्ठा किए गए। कुछ गांवों ने 10 लाख रुपये से अधिक का सहयोग दिया। इसके अलावा गुदड़ी, बर्तन, बाल्टा, डलिया और अन्य आवश्यक वस्तुएं भी भेजी गईं। अब तक करीब 15 करोड़ रुपये मूल्य की राहत सामग्री और नकद भेजा जा चुका है।
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महिलाओं ने इस मुहिम को नई ऊंचाई दी। बुजुर्ग माताओं ने अपनी पेंशन और बचत दी, कई ने गहने और बर्तन दान किए। गांव-गांव की महिलाएं मिलकर गुदड़ियां सी रही हैं और रोटियां बना रही हैं, ताकि कोई भूखा न रहे। बच्चों ने अपनी गुल्लक तक तोड़ दी।
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मस्जिदों में ऐलान कर बताया गया कि “हमारे सिख भाई संकट में हैं, हमें उनके साथ खड़ा होना है।” इसके बाद महिलाएं, बुजुर्ग, नौजवान और बच्चे राहत सामग्री, पैसे और गहने लेकर मस्जिदों में पहुंचे।
मेवात, जिसे अक्सर पिछड़ा और गरीब कहा जाता है, इस मुहिम से इंसानियत में सबसे अमीर होने का संदेश दिया। यह योगदान केवल राहत नहीं, बल्कि भाईचारे और मानवता का संदेश भी है।
जिम्मेदारों का कहना है कि यह मिसाल आने वाले भारत के लिए प्रेरणा है, जहां नफरत नहीं, इंसानियत और भाईचारा सबसे बड़ी ताकत होगी।