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Nuh News: जिला रेड क्रॉस नूंह में 22.33 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा
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हरियाणा रेड क्रॉस सोसाइटी की जांच में फंड दुरुपयोग, रिकॉर्ड में टेंपरिंग और नियम विरुद्ध भुगतान का चला पता
हरियाणा रेड क्रॉस ने जिला रेड क्रॉस के सचिव को विस्तृत रिपोर्ट जारी कर जवाब तलब किया
शेरसिंह डागर
नूंह। जिला रेड क्रॉस सोसाइटी एवं सेंट जॉन शाखा नूंह में 22.33 लाख रुपये की गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। हरियाणा रेड क्रॉस सोसाइटी, चंडीगढ़ की जांच टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में राशि लंबे समय तक बैंक खाते में जमा न कराने, रिकॉर्ड में गड़बड़ी, फंड के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन के कई मामले उजागर हुए। जांच के बाद हरियाणा रेड क्रॉस की ओर से जिला रेड क्रॉस नूंह के सचिव को विस्तृत रिपोर्ट जारी कर जवाब तलब किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान प्राप्त लगभग 20 लाख 70 हजार रुपये समय पर रेड क्रॉस के बैंक खाते में जमा नहीं कराए गए। जांच में पाया गया कि अलग-अलग अवधियों में लंबित राशि बढ़ते-बढ़ते 22 लाख 33 हजार 500 रुपये तक पहुंच गई थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 में 15 अप्रैल को 5 लाख रुपये, 17 अप्रैल को 12.50 लाख रुपये और 22 अप्रैल को 3 लाख रुपये नकद के रूप में बैंक खाते में जमा करवाए गए। जांच टीम ने इसे कार्यालयी फंड के दुरुपयोग का मामला मानते हुए सचिव और लेखाकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि तहसीलों में संचालित स्कैनिंग परियोजना से प्राप्त राशि को समय पर बैंक खाते में जमा नहीं कराया गया और उसे निजी तौर पर रखा गया। यह राशि वित्तीय वर्ष 2025-26 की बजाय 2026-27 में नकद के रूप में जमा करवाई गई। रिपोर्ट के अनुसार अभी भी 1.05 लाख रुपये की राशि लंबित है। टीम ने पाया कि लेखाकार को नियुक्ति से सेवा समाप्ति तक कैश बुक लिखने के नाम पर अलग से भुगतान किया गया, जबकि यह नियमों के विरुद्ध है। संबंधित राशि की रिकवरी के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि हरियाणा की अन्य जिला रेड क्रॉस शाखाओं की तुलना में नूंह में लेखाकार को लगभग दोगुना वेतन दिया गया। जांच टीम ने अतिरिक्त भुगतान की रिकवरी करने के आदेश दिए हैं।
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जांच के दौरान जिला रेड क्रॉस एवं सेंट जॉन शाखा नूंह में वित्तीय रिकॉर्ड व्यवस्था भी बेहद खराब पाई गई। अधिकांश लेजर और कैश बुक नियमित रूप से नहीं लिखी गई थीं। कई वाउचर अधूरे मिले और उनके साथ जरूरी दस्तावेज संलग्न नहीं थे। कई बिल कर्मचारियों द्वारा सत्यापित तक नहीं किए गए थे। रिपोर्ट में सचिव महेश गुप्ता पर अपने बेटे को आउटसोर्सिंग नियमों के तहत नियुक्त कर गलत वेतनमान जारी करने का भी आरोप लगाया गया है। साथ ही चार्टर्ड अकाउंटेंट को निर्धारित मानकों से अधिक भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा नूंह और पलवल रेड क्रॉस शाखाओं की गाड़ियों पर अत्यधिक डीजल और मरम्मत खर्च दिखाए जाने पर भी जांच टीम ने सवाल उठाए हैं।
राज्य मुख्यालय ने संबंधित लॉग बुक और रिकॉर्ड की सत्यापित प्रतियां मांगी हैं। सबसे गंभीर टिप्पणी जांच टीम ने मुख्य रसीदों में टेंपरिंग को लेकर की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रिकॉर्ड में छेड़छाड़ से कार्यालय की धनराशि के गबन के प्रयास की आशंका पैदा होती है। टीम ने स्पष्ट लिखा है कि फंड के दुरुपयोग में सचिव की सहभागिता से इन्कार नहीं किया जा सकता। हरियाणा रेड क्रॉस मुख्यालय ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से जवाब तलब करते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
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हरियाणा रेड क्रॉस ने जिला रेड क्रॉस के सचिव को विस्तृत रिपोर्ट जारी कर जवाब तलब किया
शेरसिंह डागर
नूंह। जिला रेड क्रॉस सोसाइटी एवं सेंट जॉन शाखा नूंह में 22.33 लाख रुपये की गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। हरियाणा रेड क्रॉस सोसाइटी, चंडीगढ़ की जांच टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में राशि लंबे समय तक बैंक खाते में जमा न कराने, रिकॉर्ड में गड़बड़ी, फंड के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन के कई मामले उजागर हुए। जांच के बाद हरियाणा रेड क्रॉस की ओर से जिला रेड क्रॉस नूंह के सचिव को विस्तृत रिपोर्ट जारी कर जवाब तलब किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान प्राप्त लगभग 20 लाख 70 हजार रुपये समय पर रेड क्रॉस के बैंक खाते में जमा नहीं कराए गए। जांच में पाया गया कि अलग-अलग अवधियों में लंबित राशि बढ़ते-बढ़ते 22 लाख 33 हजार 500 रुपये तक पहुंच गई थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 में 15 अप्रैल को 5 लाख रुपये, 17 अप्रैल को 12.50 लाख रुपये और 22 अप्रैल को 3 लाख रुपये नकद के रूप में बैंक खाते में जमा करवाए गए। जांच टीम ने इसे कार्यालयी फंड के दुरुपयोग का मामला मानते हुए सचिव और लेखाकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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जांच में यह भी सामने आया कि तहसीलों में संचालित स्कैनिंग परियोजना से प्राप्त राशि को समय पर बैंक खाते में जमा नहीं कराया गया और उसे निजी तौर पर रखा गया। यह राशि वित्तीय वर्ष 2025-26 की बजाय 2026-27 में नकद के रूप में जमा करवाई गई। रिपोर्ट के अनुसार अभी भी 1.05 लाख रुपये की राशि लंबित है। टीम ने पाया कि लेखाकार को नियुक्ति से सेवा समाप्ति तक कैश बुक लिखने के नाम पर अलग से भुगतान किया गया, जबकि यह नियमों के विरुद्ध है। संबंधित राशि की रिकवरी के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि हरियाणा की अन्य जिला रेड क्रॉस शाखाओं की तुलना में नूंह में लेखाकार को लगभग दोगुना वेतन दिया गया। जांच टीम ने अतिरिक्त भुगतान की रिकवरी करने के आदेश दिए हैं।
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जांच के दौरान जिला रेड क्रॉस एवं सेंट जॉन शाखा नूंह में वित्तीय रिकॉर्ड व्यवस्था भी बेहद खराब पाई गई। अधिकांश लेजर और कैश बुक नियमित रूप से नहीं लिखी गई थीं। कई वाउचर अधूरे मिले और उनके साथ जरूरी दस्तावेज संलग्न नहीं थे। कई बिल कर्मचारियों द्वारा सत्यापित तक नहीं किए गए थे। रिपोर्ट में सचिव महेश गुप्ता पर अपने बेटे को आउटसोर्सिंग नियमों के तहत नियुक्त कर गलत वेतनमान जारी करने का भी आरोप लगाया गया है। साथ ही चार्टर्ड अकाउंटेंट को निर्धारित मानकों से अधिक भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा नूंह और पलवल रेड क्रॉस शाखाओं की गाड़ियों पर अत्यधिक डीजल और मरम्मत खर्च दिखाए जाने पर भी जांच टीम ने सवाल उठाए हैं।
राज्य मुख्यालय ने संबंधित लॉग बुक और रिकॉर्ड की सत्यापित प्रतियां मांगी हैं। सबसे गंभीर टिप्पणी जांच टीम ने मुख्य रसीदों में टेंपरिंग को लेकर की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रिकॉर्ड में छेड़छाड़ से कार्यालय की धनराशि के गबन के प्रयास की आशंका पैदा होती है। टीम ने स्पष्ट लिखा है कि फंड के दुरुपयोग में सचिव की सहभागिता से इन्कार नहीं किया जा सकता। हरियाणा रेड क्रॉस मुख्यालय ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से जवाब तलब करते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।