NRHM: बिना मेडिकल ऑफिसर कैसे होगा बच्चों का इलाज?
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फरीदाबाद में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के प्रबंधक निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने बुधवार को बीके अस्पताल स्थित डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) का दौरा किया। इस दौरान उन्हें मौके पर कई कमियां मिलीं।
खामियों को पूरा करने के लिए डॉ. गुप्ता ने स्थानीय अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद डॉ. गुप्ता ने स्कूलों के लिए शुरू की गई मोबाइल हेल्थ टीमों के साथ एक बैठक ली।
बैठक में स्कूल हेल्थ प्रोग्राम की डिप्टी डॉयरेक्टर दीप्ति गुप्ता, प्रोग्राम नोडल अधिकारी डॉ. गीता पालिया, सिविल सर्जन डॉ. रामेंद्र सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
यहां न तो जगह है, न ही सीएमओ
डॉ. गुप्ता ने स्कूल हेल्थ प्रोग्राम की नोडल अधिकारी को निर्देश दिए कि सेंटर की जगह को बदला या विस्तार किया जाए। इसके अलावा सेंटर के लिए मुख्य मेडिकल ऑफिसर नहीं है, उसका इंतजाम किया जाए।
नोडल अधिकारी डॉ. पालिया ने बताया कि वेतन कम होने के कारण कोई अधिकारी नहीं आया। इस पर डॉ. गुप्ता ने अस्थाई तौर पर किसी मेडिकल आफिसर को चंड़ीगढ़ से भेजने की बात कही। जबकि स्थाई समाधान के रूप में उन्होंने वेतन बढ़ाने का आश्वासन दिया।
बैठक में डॉ. गुप्ता ने कहा कि दो माह से टीमें जिले में हेल्थ सर्वे कर रही है। लेकिन इतने समय में केवल 94 स्कूलों को कवर किया गया है।
डेढ़ लाख में महज 17 हजार बच्चों की हुई जांच
जहां लगभग 50 हजार बच्चों की जांच हो जानी चाहिए थी, वहीं अब तक केवल 17 हजार बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई है। कुल लगभग डेढ़ लाख बच्चे हैं।
अभी तक 3017 बच्चों को इलाज के लिए अस्पतालों में रेफर किया गया है। जिनमें से 586 बच्चों का इलाज संपन्न हुआ है। उन्होंने बताया कि जिले में कार्य धीमा है। जिस कारण कम बच्चों को प्रोग्राम में शामिल किया जा सका है।
बैठक समाप्त होने के बाद बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर डॉ. गुप्ता का घेराव किया। कर्मचारी संगठन की वरिष्ठ नेता आशा शर्मा ने बताया कि 10 साल से जिले में करीब 300 कर्मचारी कांट्रेक्ट पर काम कर रहे है। लेकिन इनका वेतन नही बढ़ाया गया है और न ही इन्हें पक्का किया जा रहा है।