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झोला छाप नहीं अब ट्रेंड स्वास्थ्य कर्मियों से मिलेगा इलाज

Sun, 07 Jan 2018 04:02 PM IST
प्रगति मिश्रा/अमर उजाला, नोएडा
प्रगति मिश्रा/अमर उजाला, नोएडा Updated Sun, 07 Jan 2018 04:02 PM IST
सार

यूपी समेत सात राज्यों में शुरू होगी सामुदायिक स्वास्थ्य प्रमाणपत्र योजना
- एनआईओएस ने प्रत्येक राज्य में हर साल 80 हजार स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करने का रखा लक्ष्य
- यूपी के प्रधान सचिव को लिखा पत्र, मुख्यमंत्री योगी से मिलकर करेंगे योजना की शुरुआत 

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now trend health employee will help people in uttar pradesh
- फोटो : amar ujala

विस्तार

एनआईओएस (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) अब यूपी समेत देश के सात राज्यों के स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य में प्रमाणपत्र योजना की शुरुआत करने वाला है। इसके तहत स्वास्थ्यकर्मियों को इंटर्नशिप, प्रैक्टिकल, वीडियो, संपर्क कक्षाओं, ऑडियो आदि के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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बिहार में यह योजना पहले ही शुरू हो चुकी है और अब तक 22 हजार स्वास्थ्य कर्मी प्रशिक्षण के लिए नामांकन करा चुके हैं। इनका प्रशिक्षण कार्यक्रम जनवरी 2018 में शुरू हो जाएगा। एनआईओएस का लक्ष्य हर साल प्रत्येक राज्य में 80 हजार स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने का है।
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नोएडा स्थित एनआईओएस मुख्यालय के निदेशक संजय कुमार सिन्हा ने बताया कि बिहार में यह योजना 2015 में तत्कालीन एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी ने शुरू की थी। जिसकी सफलता के बाद एनआईओएस अब इसे सात अन्य राज्यों यूपी, एमपी, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, छत्तीसगढ़ में भी लागू करना चाहता है।
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इसके लिए इन राज्यों के प्रधान सचिव और मुख्यमंत्री से संपर्क किया गया है। यूपी के प्रधान सचिव को पत्र लिखा गया था। वे संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे।

यह है योजना
ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में आज भी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच पाती हैं। इस कारण लोग झोलाछाप के चक्कर में फंस जाते हैं। एनआईओएस के अध्यक्ष चंद्र भूषण शर्मा के निर्देशन में यह योजना गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अप्रशिक्षित और कम से कम हाईस्कूल पास व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने की है।

इस पाठ्यक्रम को विशेषज्ञ चिकित्सकों और जानकारों के निर्देशन में तैयार किया गया है। पाठ्यक्रम के तहत सामान्य चिकित्सकीय परिस्थितियों में प्रारंभिक उपचार करने का प्रशिक्षण दिया जाता है।


हालांकि गंभीर परिस्थिति हो तो चिकित्सक के पास रेफर करना आवश्यक होता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में केवल स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग जैसे कंपाउंडर, मेडिकल स्टोर चलाने वाले आदि ही हिस्सा ले सकते हैं। 5 हजार की फीस में 1 वर्ष के प्रशिक्षण के बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। 

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