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अब सर्किल रेट बढ़ने पर भी नहीं बढ़ेगा प्रॉपर्टी टैक्स
राजीव शर्मा/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 23 Sep 2014 12:54 AM IST
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प्रदेश सरकार के एक फैसले ने छोटे दुकानदारों पर वर्तमान हाउस टैक्स की तुलना में तीन गुना अधिक टैक्स का बोझ डाल दिया है। वहीं दूसरी ओर उद्यमियों और बड़ीकॉमर्शियल बिल्डिंगों के मालिकों को राहत दे दी है।
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दरअसल नगर विकास विकास ने यूपी में नई कॉमर्शियल टैक्स नीति निर्धारित कर दी है। इसके अंतर्गत अब किसी क्षेत्र के सर्किल रेट बढ़ने पर कॉमर्शियल बिल्डिंग पर प्रापर्टी टैक्स नहीं बढ़ेगा।
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व्यावसायिक भवनों पर टैक्स की गणना अब लैंड कास्ट और कंस्ट्रक्शन कास्ट के आधार पर नहीं, बल्कि रोड की चौड़ाई के आधार पर की जाएगी। व्यापारियों ने नई नीति का विरोध करने की घोषणा की है।
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पूर्व में कामर्शियल बिल्डिंगों का टैक्स सर्किल रेट के आधार पर लैंड की कास्ट और निर्माण की लागत को मिलाकर निकाला जाता था। एक निर्धारित फार्मूले पर बिल्डिंग की एआरवी (एनुअल रेंटल वैल्यू) निकाली जाती है।
एआरवी की 24 फीसदी रकम टैक्स के रूप में देनी होती है। ऐसे में एक ही क्षेत्र में बनी दो बिल्डिंगों पर अलग-अलग वर्षों में लगे टैक्स की रकम भी अलग होती थी।
कामर्शियल बिल्डिंगों पर टैक्स निर्धारण में अनियमितताओं के मामले भी अक्सर सामने आते हैं। नगर विकास विभाग ने अब यूपी में नई कामर्शियल टैक्स नीति निर्धारित कर दी है।
उधर, माना जा रहा है कि टैक्स की यह रकम लैंड कॉस्ट और कंस्ट्रक्शन कास्ट वाले फार्मूले से काफी कम होगी। ऐसे में इस पॉलिसी के आधार पर टैक्स वसूली हुई तो निगम को घाटा उठाना पड़ सकता है।
किस भवन पर कितना गुना होगा टैक्स
फैक्ट्री और छोटे कामर्शियल कांप्लेक्स पर आवासीय दरों का 3 गुना
3 स्टार होटल तक आवासीय दरों का 3 गुना
5 स्टार होटल पर आवासीय दरों का 5 गुना
नर्सिंग होम 3 गुना
जिम/बारात घर 3 गुना
मोबाइल टावर वाले मकान/दुकान 3 गुना
प्रोफेशनल कॉलेज आवासीय दर के बराबर
मॉल 6 गुना
मल्टीप्लेक्स 5 गुना
सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर 3 गुना
यहां समर्थन
अप्रैल 2013 में ही यूपी सरकार ने नई कॉमर्शियल प्रापर्टी टैक्स नियमावली लागू कर दी थी। इस पॉलिसी में उद्यमियों और मॉल-मल्टीप्लेक्स मालिकों को लाभ होगा। उन्हें हर दो साल में वैल्यूएशन रिपोर्ट बनवाकर निगम में जमा करने से भी निजात मिल जाएगी। गाजियाबाद इंडस्ट्रियलिस्ट फेडरेशन की मांग पर ही यह पॉलिसी प्रदेश में बनी हैं। नगर निगम इसे लागू नहीं कर रहा है। पॉलिसी लागू हुई तो निगम में इंस्पेक्टर राज भी खत्म हो जाएगा। - अरुण शर्मा, अध्यक्ष गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन
यहां विरोध
पिछली सरकार में भी इस तरह की पॉलिसी बनाने की तैयारी की गई थी। व्यापारियों ने इसका पुरजोर विरोध किया था। इसमें तीन से छह गुना तक टैक्स बढ़ाया जाना सही नहीं है। छोटे दुकानदारों पर टैक्स का बोझ बढ़ जाएगा। जो दुकानदार अभी तक एक हजार रुपये टैक्स दे रहा है। उस पर तीन हजार रुपये टैक्स हो जाएगा। दो गुना से ज्यादा टैक्स लगाया गया तो व्यापारी सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे। - अशोक चावला, महामंत्री, महानगर उद्योग व्यापार मंडल
बोले अधिकारी
अपर नगरायुक्त डीके सिन्हा ने बताया कि नई पॉलिसी जल्द ही लागू होगी। कार्यकारिणी ने आवासीय टैक्स दरों में वृद्धि का प्रस्ताव पास किया है। बोर्ड से इस प्रस्ताव सहमति मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।
कर निर्धारण अधिकारी नरेंद्र यादव के मुताबिक अब आवासीय टैक्स दरों को आधार मानकर कॉमर्शियल बिल्डिंगों पर 3 से 6 गुना तक टैक्स लगाया जाएगा।