अब राजधानी में बढ़ी दरें, ज्यादा देना होगा टोल टैक्स
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आर्थिक तंगी से जूझ रही तीनों नगर निगम ने टोल टैक्स की दरों में सात प्रतिशत से 66 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई दरें एक फरवरी से लागू होगी।
इससे दिल्ली वासियों के साथ अन्य राज्यों से यहां कमर्शियल वाहनों में सामान लेकर आने वालों को जेब ढीली करनी पड़ेगी। नगर निगम आम तौर पर वर्ष 2004 से तीन वर्ष के अंतराल के बाद टोल टैक्स की दरों में बढ़ोतरी करती थी, लेकिन इस बार डेढ़ साल बाद ही की गई है।
नगर निगम के निर्णय का सबसे अधिक भार टैक्सी, टेंपो, बस, ट्रक चलाने वालों पर पड़ेगा। उन्हें करीब 54 से 66 प्रतिशत अधिक टोल टैक्स देना होगा।
वर्ष 2014 में 20 रुपये बढ़ाए थे, इस बार 35 रुपये बढ़ाए हैं
जबकि 6 टायर वाले वाहनों के लिए 30 प्रतिशत, 10 पहिये वाहनों के लिए 11 प्रतिशत और 14 पहिये वाले वाहनों के लिए टोल टैक्स में सात प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।
नगर निगम टोल टैक्स की दरों में बढ़ोतरी करने में पिछले सभी रिकार्ड तोड़ दिए। वर्ष 2008, 2011 व 2014 की तुलना में इस बार अधिक दरें बढ़ाई हैं।
वर्ष 2008, 2011 में टैक्सी, टेंपों से वसूले जाने वाले टोल टैक्स की दरों में 10-10 रुपये बढ़ाए गए थे, जबकि वर्ष 2014 में 20 रुपये बढ़ाए थे। इस बार 35 रुपये बढ़ाए हैं।
जान लीजिए ये हैं दरें
बस, ट्रक-निशान, केंटर की दरों में वर्ष 2008 में 20 रुपये, वर्ष 2011 में 15 रुपये और वर्ष 2014 में 35 रुपये बढ़ाए थे। इस बार 80 रुपये बढ़ाए हैं।
छह पहिये वाहनों की दरों में वर्ष 2008 में 40 रुपये, 2011 में 35 रुपये और 2014 में 60 रुपये बढ़ाए थे, वहीं इस बार 75 रुपये बढ़ाए हैं। 10 पहिये वाहनों की दरों में वर्ष 2008 में 80 रुपये, 2011 में 50 रुपये और 2014 में 120 रुपये बढ़ाए, अब 50 रुपये बढ़ाए हैं।
तीनों नगर निगम ने 14 पहिये वाहनों की दरों में वर्ष 2008 में 200 रुपये, 2011 में 120 रुपये और 2014 में 300 रुपये की बढ़ोतरी की थी। अब मात्र 80 रुपये ही बढ़ाए गए हैं।