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नोएडा प्राधिकरणों में एफएआर के नाम पर गड़बड़ी होगी बंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Updated Wed, 11 Jul 2018 09:04 AM IST
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- फोटो : प्रतिकात्मक फोटो
नोएडा निवासी श्वेता ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक बिल्डर के प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया। बिल्डर ने साढ़े तीन साल में बनाकर देने के वादा किया।
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बाद में बिल्डर ने उस पर प्राधिकरण से एफएआर और परचेज कर लिया, जिससे उसे 24 मंजिल बनाने की अनुमति मिल गई, लेकिन साढ़े तीन साल में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट पांच साल बाद भी अधूरा है। श्वेता अपने घर का पजेशन पाने को इंतजार कर रही हैं।
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यह असलियत किसी एक बिल्डर की नहीं है, बल्कि नोएडा व ग्रेटर नोएडा के तमाम बिल्डर प्राधिकरणों के साथ मिलकर यह गड़बड़ी कर लेते हैं। दोनों प्राधिकरणों में एफएआर परचेज करने का प्रावधान है, जिसका बिल्डर फायदा उठा रहे हैं।
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यीडा में एफएआर (फ्लोर एरिया रेश्यो) परचेज करने का प्रावधान नहीं है। आवंटन के समय प्लॉट पर जितना एफएआर मिला है उसी का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन नोएडा-ग्रेनो में बिल्डर प्राधिकरणों से निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के लिए भी एफएआर परचेज कर लेते हैं, जबकि नए प्रोजेक्ट पर ही परचेजबल एफएआर का प्रावधान है।
पजेशन में देरी के साथ ही सुविधाओं में कटौती कर देते हैं। 14 मंजिल तक के फ्लैट निवासियों के हिसाब से सुविधाएं विकसित की जाती हैं। एफएआर बढ़ाने से 24 मंजिल तक बनने वाले फ्लैट खरीदार उतनी सुविधाएं उपयोग करते हैं।
ऑडिट ने भी उठाई है आपत्ति
सांकेतिक चित्र
प्रदेश सरकार ने इस तरह की तमाम गड़बड़ियों को खत्म करने को सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों का एक जैसा बिल्डिंग बायलॉज बनाने का निर्णय लिया। इसके लिए यीडा के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई। इसमें नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी भी शामिल हैं। कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। परचेजबल एफएआर को खत्म करने का सुझाव दिया गया है।
ऑडिट ने भी उठाई है आपत्ति
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सीएजी ऑडिट हो रहा है। एफएआर परचेज करने की अनुमति की भी जांच हो रही है। ऑडिट टीम को काफी गड़बड़ी मिली है। रिपोर्ट सामने आने पर खुलासा होगा, लेकिन बिल्जडों को एफएआर देने के नाम पर काफी गड़बड़ी सामने आने की बात कही जा रही है।
ल्हासा व अमरावती के बिल्डिंग बायलॉज से लेंगे सीख
प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों का एक जैसा बिल्डिंग बायलॉज तैयार करने को गठित कमेटी ल्हासा (तिब्बत) व अमरावती (महाराष्ट्र) के बिल्डिंग बायलॉज का भी अध्ययन करेगी। वहां की खूबियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
सभी प्राधिकरणों में एक जैसा बिल्डिंग बायलॉज बनाने के लिए बनी समिति एफएआर समेत कई मुद्दों पर रिपोर्ट बन गई है। कुछ तथ्य और जोडने हैं। इस माह के अंत तक रिपोर्ट फाइनल कर शासन को भेज दी जाएगी। - डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यीडा
कमेटी के अन्य सुझाव
1- ग्रीन बिल्डिंग के नाम पर अतिरिक्त एफएआर न दिया जाए।
2- 12 मीटर से कम चौड़ी रोड पर कोई आवंटन न हो।
3- ग्रुप हाउसिंग में स्टिल्ट पार्किंग दिखाकर दुकान बनाने पर रोक।
4- सोसायटी के प्लान में सार्वजनिक परिवहन का भी जिक्र हो।
5- प्रवेश व निकास द्वार बनाने का मानक तय हो।
6- मास्टर प्लान रोड पर व्यावसायिक व ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट को आवंटन न हो।
7- सर्विस रोड सिर्फ आने-जाने के लिए हो, पार्किंग या किसी अन्य उपयोग में न हो।
8- मास्टर प्लान में वेंडर्स के लिए भी जगह तय हो।
9- मुख्य मार्गों के किनारे आबादी की जमीन पर ग्रामीणों को व्यावसायिक उपयोग की छूट।
10- वाटर हार्वेस्टिंग का प्लान फेल हो गया है। जलस्तर नीचे जा रहा है। इसलिए सोसायटी के आसपास तालाब बनाने का प्रावधान हो।
प्राधिकरण एफएआर
नोएडा 3.5
ग्रेटर नोएडा 2.75
यीडा 3.0
(नोट-नोएडा-ग्रेनो में 0.6 प्रतिशत परचेजबल एफएआर की छूट है)
ऑडिट ने भी उठाई है आपत्ति
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सीएजी ऑडिट हो रहा है। एफएआर परचेज करने की अनुमति की भी जांच हो रही है। ऑडिट टीम को काफी गड़बड़ी मिली है। रिपोर्ट सामने आने पर खुलासा होगा, लेकिन बिल्जडों को एफएआर देने के नाम पर काफी गड़बड़ी सामने आने की बात कही जा रही है।
ल्हासा व अमरावती के बिल्डिंग बायलॉज से लेंगे सीख
प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों का एक जैसा बिल्डिंग बायलॉज तैयार करने को गठित कमेटी ल्हासा (तिब्बत) व अमरावती (महाराष्ट्र) के बिल्डिंग बायलॉज का भी अध्ययन करेगी। वहां की खूबियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
सभी प्राधिकरणों में एक जैसा बिल्डिंग बायलॉज बनाने के लिए बनी समिति एफएआर समेत कई मुद्दों पर रिपोर्ट बन गई है। कुछ तथ्य और जोडने हैं। इस माह के अंत तक रिपोर्ट फाइनल कर शासन को भेज दी जाएगी। - डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यीडा
कमेटी के अन्य सुझाव
1- ग्रीन बिल्डिंग के नाम पर अतिरिक्त एफएआर न दिया जाए।
2- 12 मीटर से कम चौड़ी रोड पर कोई आवंटन न हो।
3- ग्रुप हाउसिंग में स्टिल्ट पार्किंग दिखाकर दुकान बनाने पर रोक।
4- सोसायटी के प्लान में सार्वजनिक परिवहन का भी जिक्र हो।
5- प्रवेश व निकास द्वार बनाने का मानक तय हो।
6- मास्टर प्लान रोड पर व्यावसायिक व ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट को आवंटन न हो।
7- सर्विस रोड सिर्फ आने-जाने के लिए हो, पार्किंग या किसी अन्य उपयोग में न हो।
8- मास्टर प्लान में वेंडर्स के लिए भी जगह तय हो।
9- मुख्य मार्गों के किनारे आबादी की जमीन पर ग्रामीणों को व्यावसायिक उपयोग की छूट।
10- वाटर हार्वेस्टिंग का प्लान फेल हो गया है। जलस्तर नीचे जा रहा है। इसलिए सोसायटी के आसपास तालाब बनाने का प्रावधान हो।
प्राधिकरण एफएआर
नोएडा 3.5
ग्रेटर नोएडा 2.75
यीडा 3.0
(नोट-नोएडा-ग्रेनो में 0.6 प्रतिशत परचेजबल एफएआर की छूट है)