आज से भारी पड़ेगी एक-एक यूनिट बिजली
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आम आदमी पार्टी की सरकार ने 50 फीसदी बिजली कीमत सस्ती करने की वादा किया था। सरकार बनने के बाद 400 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं के बिल में 50 फीसदी की कमी भी की गई लेकिन ‘आप’ के जाते ही लोगों तगड़ा झटका लगने वाला है।
एक अप्रैल से बिजली के दाम पर सरकार की ओर से किसी तरह की सब्सिडी नहीं मिलेगी। इसकी सूचना बिजली वितरण कंपनियों और दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) को दे दी गई है। तीनों बिजली वितरण कंपनियों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी तरह की सब्सिडी नहीं मिलेगी।
ऊर्जा विभाग के सूत्रों के मुताबिक, जब तक आम चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, तब तक सब्सिडी पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। आम चुनाव के बाद अथवा नई सरकार के गठन होने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
आठ साल बाद मिलेगा बिना सब्सिडी का बिल
आठ वर्ष बाद दिल्ली के लोगों को बिना सब्सिडी का बिल मिलेगा। दिल्ली में कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान प्रति माह 0 से 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 1.20 रुपये की सब्सिडी मिलती थी।
अगर एक माह में 200 यूनिट से एक यूनिट भी अधिक बिजली खर्च की गई तो प्रति यूनिट महज 80 पैसे की सब्सिडी मिलती थी। आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो एक माह में 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 1.95 रुपये और 201-400 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 2.90 रुपये की सब्सिडी मिली।
400 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को किसी भी सरकार की ओर से सब्सिडी नहीं मिलती थी। यह सब्सिडी 31 मार्च तक ही लागू थी।
अभी और बढ़ जाएगी बिजली कीमत
दिल्ली सरकार ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त सचिव अंकुर गर्ग का कहना है कि एक अप्रैल से बिजली कीमत पर सरकार की ओर से किसी तरह की सब्सिडी नहीं दी जाएगी। इसका निर्णय पहले ही लिया जा चुका है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अभी तक बिजली शुल्क और स्थायी शुल्क पर सब्सिडी देने के बाद जो राशि बनती थी उस पर आठ प्रतिशत का सरचार्ज लगाया जाता था। लेकिन अब स्थायी शुल्क और बिजली शुल्क पर ही आठ प्रतिशत का सरचार्ज लगेगा। लिहाजा उपभोक्ताओं को कुल बिजली बिल पर आठ प्रतिशत का सरचार्ज देना होगा। तीनों बिजली वितरण कंपनियों के प्रवक्ताओं ने कहा है कि एक अप्रैल से बिना सब्सिडी के बिजली कीमत तय होगी।
वर्ष 2002 में बिजली वितरण का जिम्मा निजी बिजली वितरण कंपनियों के हाथों में दिया गया। इसके बाद डीईआरसी ने वित्त वर्ष 2005-06 में कीमत बढ़ाई। इस पर सब्सिडी की मांग उठी और दिल्ली सरकार की ओर से 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को छूट मिली।