गाड़ियों के पसंदीदा नंबर चुनने की सुविधा खत्म
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अगली बार जब आप वाहन खरीदने के लिए शोरूम जाएंगे। वहां कार डीलर्स रजिस्टर दिखाकर आपसे पसंदीदा नंबर के बारे में नहीं पूछेंगे। आप आरटीओ कार्यालय से सिफारिश लगाकर भी मनपसंद नंबर हासिल नहीं कर पाएंगे।
जी हां, क्योंकि आपकी नई गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर अब कोई अधिकारी, डीलर या सिफारिशी तय नहीं करेगा। यह काम अब कंप्यूटर करेगा।
दिल्ली परिवहन विभाग ने एमएलओ ऑफिस में वाहन फोर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जहां नंबर क्लाउड पर होगा। वहीं से आपके गाड़ी का नंबर तय होगा।
पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दिल्ली में हुई शुरूआत
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली के चार एमएलओ ऑफिस वसंत विहार, नई दिल्ली, मयूर विहार और सूरजमल विहार में इस पर काम भी शुरू हो चुका है।
मसलन, अगर आप इस इलाके में वाहन खरीद रहे हैं तो आपका नंबर कंप्यूटर ही तय करेगा। अधिकारियों की माने तो यह व्यवस्था पूरे देश में लागू होनी है, जिसका सबसे पहला ट्रायल दिल्ली के वसंत विहार एमएलओ ऑफिस में हुआ था।
क्लाउड एक वर्चुअल मेमोरी है। इसका सारा डाटा ऑनलाइन उपलब्ध होता है, उसे आप कही किसी भी वक्त किसी भी कंप्यूटर पर खोल सकते हैं। इसमें खास बात यह है कि वहां पर सेव होने वाले पूरे डाटा का बैकअप भी होता है।
वाहन फोर में सब कुछ ऑनलाइन
इस नए सॉफ्टवेयर में सब कुछ ऑनलाइन होगा। मसलन इस पर सारा काम यानी वाहन रजिस्ट्रेशन से लेकर वाहनों के लगने वाले टैक्स का पेमेंट तक ऑनलाइन हो जाएगा।
परिवहन विभाग के मुताबिक वाहन फोर सॉफ्टवेयर का लिंक एमएलओ ऑफिस के अलावा कार डीलर्स को दिया जाएगा। वाहन खरीदने के साथ ही वहां कार डीलर्स उस लिंक से वाहन फोर सॉफ्टवेयर पर पहुंचेगा।
वहां रजिस्ट्रेशन के दौरान लगने वाली जानकारी मसलन नाम, चेसिस नंबर, मॉडल नंबर समेत अन्य जानकारी देनी होगी। वहीं साथ के साथ सभी जरूरी टैक्स का पेमेंट भी हो ऑनलाइन हो जाएगा।
एमएलओ कार्यालय जाने की जरूरत खत्म
इसके लागू होने से एमएलओ कार्यालय जाने की जरूरत खत्म हो जाएगी। डीलर्स के यहां से सारी जानकारी कार्यालय को मिल जाएगी। वहीं से टैक्स भी जमा हो जाएगा।
आरसी अगले एक पखवाड़े में कार स्वामी (जिसके नाम पर रजिस्टर्ड) के पते पर पहुंच जाएगा। यहीं नहीं नए वाहन पर टैक्स वसूलने वाले विभागों को तुरंत पैसा मिलेगा। अभी डीलर्स के पास तो पैसा पहुंच जाता है पर वह विभागों के पास पहुंचने में लंबा वक्त लग जाता है।
सॉफ्टवेयर अपडेट पर कंप्यूटर स्लो
वाहन फोर से सब कुछ ऑनलाइन तो होगा। इससे आम लोगों को फायदा मिलेगा। लेकिन विभाग इसकी परेशानी से दो चार होने लगा है। एक अधिकारी के मुताबिक सॉफ्टवेयर तो अपडेट कर दिया गया, मगर कंप्यूटर को उसकी जरूरत के लिहाज से अपग्रेड नहीं किया गया है। इससे सिस्टम स्लो हो गए हैं। इससे लोगों को उन चार एमएलओ ऑफिस में आरसी मिलने में एक महीने तक का इंतजार करना पड़ रहा है।