नोटबंदी का असर: बिना दहेज हुई शादी, न बैंडबाजा न बाराती
नोटबंदी से हो रही परेशानी देख वधू पक्ष टालना चाहता था शादी
वर पक्ष ने दहेज लेने से किया मना, मैरिज होम रद्द करा रेस्तरां में हुआ विवाह
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नोटबंदी में परेशानी के बीच पॉजिटिव इफेक्ट भी दिखने लगा है। शादियों में फिजूलखर्ची काफी कम हो गई है। इसका ताजा उदाहरण है दनकौर के युवक और दिल्ली की युवती की शादी। नकदी का बंदोबस्त न होने पर वधू पक्ष ने वर पक्ष से विवाह टालने की बात कही।
तो वर पक्ष न केवल दहेज के बिना शादी के लिए राजी हो गया, बल्कि पहले से बुक मैरिज होम को कैंसिल कराकर रेस्तरां में विवाह किया। इसका दोनों पक्षों ने मिलकर भुगतान कर दिया।दनकौर के तुलसी नगर निवासी वेद प्रकाश ने अपने बेटे आदित्य गर्ग का विवाह तीन माह पूर्व दिल्ली के रोहिणी निवासी प्रेमचंद की बेटी लक्ष्मी से तय किया था।
1 दिसंबर को दोनों का विवाह होना निश्चित हुआ था, लेकिन नोटबंदी के बाद नकदी के संकट के मद्देनजर प्रेमचंद ने कुछ माह के लिए विवाह स्थगित करने का प्रस्ताव रखा। वेदप्रकाश नेे विवाह स्थगित करने के बजाय प्रेमचंद सेे दहेज के बिना विवाह की बात कही।
साथ ही कहा कि शादी के लिए उन्होंने जो मैरिज होम बुक किया है, उसे कैंसिल कर दें। इस पर दोनों पक्षों में मंदिर में विवाह करने पर चर्चा हुई, लेकिन बाद में रेस्तरां में विवाह करने पर सहमति बनी।
घोड़ी-बग्घी नहीं, कार सेे पहुंचा दूल्हा
1 दिसंबर को बारात के बजाय वेदप्रकाश का परिवार व कुछ करीबी रिश्तेदार ही दिल्ली पहुंचे। यहां घोड़ी-बग्घी के बजाय दूल्हा कार से अग्रवाल वेंकट हॉल एंड रेस्तरां पहुंचा। इस दौरान बैंडबाजे की भी व्यवस्था नहीं की गई।
विवाह समारोह में जूते चुरानेे की रस्म के दौरान नकदी को लेेकर वर और दुल्हन की बहनों के बीच कुछ देर तक हंसी मजाक हुआ और 2000 के नए नोट की मांग की गई। दूल्हे नेे चेक सेे शगुन दिया।
इसके बाद विवाह की सभी रस्में सादे समारोह में पूरी की गईं। वर-वधू पक्ष ने मिलकर रेस्तरां का भुगतान करने के लिए रुपये एकत्रित किए और बिना दहेज के दुल्हन को विदा कराकर घर ले आए।