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आधार से शवों की पहचान संभव नहीं, यूआईडीएआई ने हाईकोर्ट में दाखिल किया जवाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 12 Nov 2018 09:58 PM IST
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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा कि देश के 120 करोड़ लोगों के डेटाबेस के जरिए किसी अज्ञात शव की फिंगर प्रिंट का मिलान कर उसकी पहचान करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। पीठ अज्ञात शवों का आधार बायोमैट्रिक की मदद से पहचान करने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अब इस मामले में अगली सुनवाई पांच फरवरी 2019 को होगी।
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हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की पीठ के समक्ष यूआईडीएआई ने कहा कि फिंगर प्रिंट, आंख की पुतली सहित बायोमैट्रिक्स के मिलान आमने-सामने से किए जाते हैं। इसके लिए आधार संख्या की जरूरत पड़ती है। ऐसे में किसी अज्ञात शव की पहचान इस डेटाबेस से नहीं की जा सकती। साथ ही यूआईडीएआई ने कहा कि अज्ञात शव की पहचान करने के लिए मृतक की अंगुलियों के फिंगर प्रिंट और पुतली स्कैन की जरूरत होती है। मृतक के सिर्फ अंगुठे के बायोमैट्रिक से जांच की जाए तो हो सकता है कि अंगुठे के फिंगर प्रिंट कई लोगों से मेल खा जाएं।
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यह है मामला
सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी की ओर से याचिका दायर कर मांग की गई है कि केंद्र और यूआईडीएआई को अज्ञात शवों की पहचान के लिए आधार बायोमैट्रिक्स के इस्तेमाल करने का निर्देश दिए जाएं। सुनवाई के दौरान पीठ ने यूआईडीएआई से जानकारी रिकार्ड में लाने और याचिका पर अपने जवाब में यह बताने को कहा था कि आधार डेटाबेस के साथ फिंगर प्रिंट का मिलान संभव क्यों नहीं है। इसके साथ ही पीठ ने याचिका पर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का भी जवाब मांगा है।
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