‘निर्मल नहीं, मैली हो रही यमुना’ NGT की फटकार
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के कई आदेशों के बावजूद निर्मल यमुना को लेकर सरकारी हलकों में कोई संजीदगी नहीं दिखाई दे रही। एनजीटी ने इसे महसूस कर संबंधित प्राधिकरणों को जमकर फटकार लगाई है।
वहीं दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि वे हलफनामा दाखिल कर ये बताएं कि आखिर रोक के बावजूद दिल्ली जल बोर्ड ने योजनागत व्यय से सीवरेज और ड्रेनेज के लिए बड़े पैमाने पर कैसे पैसा खर्च किया।
एनजीटी ने बीते वर्ष यमुना मामले पर बोर्ड को बिना इजाजत लिए पैसा खर्च करने पर रोक दिया था। मामले की अगली सुनवाई 22 फरवरी को होगी।
यमुना की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने मंगलवार को यमुना पुनरुद्धार योजना- 2017 के मामले पर सुनवाई की। बेंच ने कहा कि हजारों करोड़ रुपये का बजट होने के बावजूद निर्मल होने के बजाय यमुना की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है।
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि हमने स्पष्ट आदेश दिया था कि सिवाय प्रबंधन कार्य के यमुना से जुड़े निर्माण संबंधी किसी भी काम को शुरू करने से पूर्व ट्रिब्यूनल से इजाजत मांगी जाएगी। बावजूद इसके दिल्ली जल बोर्ड ने फंड खर्च किया है।
सुनवाई के दौरान बोर्ड के कार्यकारी अधिकारी ने पीठ को सूचित किया कि नालों से संबंधित खर्च दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के मद्देनजर किया गया। इस पर एनजीटी ने कहा कि हमारी ओर से स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि प्रबंधन या मरम्मत का काम छोड़कर कुछ भी निर्माण संबंधी कार्य करने के लिए आप मंजूरी लेंगे। आपने इस बारे में हाईकोर्ट को क्यों नहीं सूचित किया।