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युवाओं को रोजगारदाता बनने की जरूरत : राज्यपाल
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42 विवि में दीक्षांत समारोह में प्रमाण-पत्र वितरण समारोह संपन्न होने के बाद राज्यपाल के साथ मंच
आजमगढ़/चक्रपानपुर। महराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में मंगलवार को पहुंची राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवाओं को रोजगार से जुड़ने की सलाह दी। समारोह में उन्होंने 68 मेधावियों स्वर्ण पदक और 40 को उपाधि दी। वहीं 61456 विद्यार्थियों की डिग्री को डिजिलॉकर में सुरक्षित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को जो विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देखा है उसे युवा ही साकार करेंगे। युवाओं को रोजगारदाता बनने की जरूरत हैं। संस्थानों में हासिल की गई शिक्षा का प्रयोग अगर वह अपने जीवन में नहीं करते हैं तो उनकी डिग्री व्यर्थ है।
इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को जोड़ना और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में योगदान देना होना चाहिए। उन्होंने सभी उपाधि प्राप्त छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि आप भारत की नींव हैं, राष्ट्र प्रथम के संकल्प को लेकर आगे बढ़ें और देश की गरिमा बनाए रखें।
नई शिक्षा नीति के अंतर्गत छात्रों के कौशल विकास और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा मिलेट्स जैसे पोषणयुक्त अनाजों पर काम करना भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। हमारे यहां गुरु शिष्य की परंपरा है। इस परंपरों को फिर से जिंदा करने की जरूरत है। ज्ञान सिर्फ किताबों में नहीं संवाद और गुरु के सानिध्य में मिलता है। इसके लिए विद्यालयों में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य की गई है। अगर यह भी नहीं कर सकते तो घर जाओ खेती करो।
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हमें शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उसे व्यवहारिक जीवन में उतारने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का पहला प्रयोग स्वयं के जीवन में होना चाहिए, अन्यथा डिग्री का कोई अर्थ नहीं रह जाता। कार्यक्रम में सबसे ज्यादा स्वर्ण पदक छात्राओं ने हासिल किए।
हर 15 दिन में छात्राएं बनाएं भोजन
राज्यपाल ने गर्ल्स हॉस्टल और मेस की व्यवस्थाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मेस में केवल कुक और सफाई कर्मी को ही प्रवेश दिया जाए। छात्राओं को हर पंद्रह दिन में एक बार स्वयं भोजन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। क्योंकि यह भी उनका एक काम है। उन्होंने कहा कि उनके साथ एक टीम चलती है जो कार्यक्रम के दौरान हॉस्टल की सुविधाओं का जायजा लेती है और उसकी रिपोर्ट हमें सौंपती है। टीम की जांच में हॉस्टल में कहीं-कहीं शराब की बोतलें भी मिलती हैं। इसलिए विवि परिसर में बाहर का सामान बंद कराइए। तभी हम इसको नशे और ड्रग्स से बचा सकते हैं।
मेस का काम न हाेने पर जताई नाराजगी
राज्यपाल ने कहा कि पिछली बार मेस की जो हालत थी वैसी ही है। उसमें कोई काम नहीं कराया गया है। अभी तक तक उसमें एग्झास्ट तक नहीं लगाया गया है। छात्रों की एक समिति बनाए जो मेस के लिए बाजार से अच्छे सामान की खरीद करें। साथ ही कुलपति से कहा कि विवि में कई जगह गंदगी मिली है तो वह स्वयं एक टीम बनाकर एक दिन खुद भी सफाई करें।
सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व में जगह बनाने की जरूरत
राज्यपाल ने कहा कि आज भारत की 65 प्रतिशत आबादी युवा है। यह समय सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व में जगह बनाने की समय है। डिग्री का यह मतलब नहीं कि हमें सरकारी नौकरी ही चाहिए। सरकारी नौकरी नहीं है, क्योंकि टेक्नॉलोजी का युग है। इसलिए हमें आत्मनिर्भर बनना हैं। पढ़ाई के बाद जो समय बचता है उसमें हमें अपने रोजगार के बारे में सोचना चाहिए।
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इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को जोड़ना और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में योगदान देना होना चाहिए। उन्होंने सभी उपाधि प्राप्त छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि आप भारत की नींव हैं, राष्ट्र प्रथम के संकल्प को लेकर आगे बढ़ें और देश की गरिमा बनाए रखें।
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नई शिक्षा नीति के अंतर्गत छात्रों के कौशल विकास और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा मिलेट्स जैसे पोषणयुक्त अनाजों पर काम करना भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। हमारे यहां गुरु शिष्य की परंपरा है। इस परंपरों को फिर से जिंदा करने की जरूरत है। ज्ञान सिर्फ किताबों में नहीं संवाद और गुरु के सानिध्य में मिलता है। इसके लिए विद्यालयों में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य की गई है। अगर यह भी नहीं कर सकते तो घर जाओ खेती करो।
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हमें शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उसे व्यवहारिक जीवन में उतारने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का पहला प्रयोग स्वयं के जीवन में होना चाहिए, अन्यथा डिग्री का कोई अर्थ नहीं रह जाता। कार्यक्रम में सबसे ज्यादा स्वर्ण पदक छात्राओं ने हासिल किए।
हर 15 दिन में छात्राएं बनाएं भोजन
राज्यपाल ने गर्ल्स हॉस्टल और मेस की व्यवस्थाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मेस में केवल कुक और सफाई कर्मी को ही प्रवेश दिया जाए। छात्राओं को हर पंद्रह दिन में एक बार स्वयं भोजन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। क्योंकि यह भी उनका एक काम है। उन्होंने कहा कि उनके साथ एक टीम चलती है जो कार्यक्रम के दौरान हॉस्टल की सुविधाओं का जायजा लेती है और उसकी रिपोर्ट हमें सौंपती है। टीम की जांच में हॉस्टल में कहीं-कहीं शराब की बोतलें भी मिलती हैं। इसलिए विवि परिसर में बाहर का सामान बंद कराइए। तभी हम इसको नशे और ड्रग्स से बचा सकते हैं।
मेस का काम न हाेने पर जताई नाराजगी
राज्यपाल ने कहा कि पिछली बार मेस की जो हालत थी वैसी ही है। उसमें कोई काम नहीं कराया गया है। अभी तक तक उसमें एग्झास्ट तक नहीं लगाया गया है। छात्रों की एक समिति बनाए जो मेस के लिए बाजार से अच्छे सामान की खरीद करें। साथ ही कुलपति से कहा कि विवि में कई जगह गंदगी मिली है तो वह स्वयं एक टीम बनाकर एक दिन खुद भी सफाई करें।
सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व में जगह बनाने की जरूरत
राज्यपाल ने कहा कि आज भारत की 65 प्रतिशत आबादी युवा है। यह समय सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व में जगह बनाने की समय है। डिग्री का यह मतलब नहीं कि हमें सरकारी नौकरी ही चाहिए। सरकारी नौकरी नहीं है, क्योंकि टेक्नॉलोजी का युग है। इसलिए हमें आत्मनिर्भर बनना हैं। पढ़ाई के बाद जो समय बचता है उसमें हमें अपने रोजगार के बारे में सोचना चाहिए।